12 साल की उम्र में जेल जा चुके हैं मिल्खा सिंह, पढ़ें फ्लाइंग सिख की अनटोल्ड स्टोरी

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खेल की दुनिया में फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म 17 अक्टूबर 1935 को लैलापुर (अब फैसलाबाद,पाकिस्तान) में हुआ था। भारतीय ट्रैक और फील्ड एथलीट रहे मिल्खा सिंह ने 1960 में रोम ओलंपिक्स में फाइनल में पहुंचकर 400 मीटर की दौड़ में चौथा स्थान हासिल किया था। 

अपनी जीवनी पर बनी फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' देखने के बाद मिल्खा सिंह की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने  फिल्म में उनका किरदार निभाने वाले फरहान अख्तर को अपनी डुपलीकेट बताया। मिल्खा सिंह अकेले भारतीय एथलीट थे जिन्होंने ओलंपिक रिकार्ड ब्रेक किया था। मिल्खा सिंह के बेटे जीव मिल्खा सिंह दुनिया के टॉप रैंकड गोल्फ खिलाड़ी हैं।

भारत के विभाजन के बाद हुए दंगों में अपने माता-पिता को खोने से लेकर खुद को पाकिस्तानी जनरल से 'द फ्लाइंग सिख' की उपाधि हासिल करने तक का मिल्खा सिंह का सफर वाकई युवाओं के लिए एक प्रेरणा हैं। मिल्खा सिंह ने कुल 80 दौड़ में हिस्सा लेकर 77 में जीत हासिल की। आइए आज हम लिजेंड्री मिल्खा सिंह से जुड़ी कुछ फैक्ट्स के बारे में जानते हैं।

►मिल्खा सिंह को पाकिस्तान में स्कूल जाने के लिए प्रति दिन 10 किलो मीटर की दूरी नंगे पैर तय करनी पड़ती थी।

►भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद हुए दंगों में मिल्खा सिंह ने अपने माता-पिता को खो दिया और उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 12 साल थी। हालांकि बाद में वह भारत आ गए। मिल्खा सिंह एक बार बिना टिकट के ट्रेन में सफर करते वक्त पकड़े जाने से तिहाड़ जेल भेजे गए, लेकिन उनकी बहन ने अपनी गहने बेचकर उन्हें छुड़ाया।

►मिल्का सिंह भारतीय सेना में भर्ती होना चाहते थे, लेकिन वह लगातार तीन बार रिजेक्ट किए गए।  उन्होंने अपनी हिम्मत नहीं हारी और चौथी बार सेलेक्ट हुए। 

►साल 1951 में वे सिकंदराबाद स्थित ईएमआई सेंटर में भर्ती हुए, जहां उन्होंने एक एथलीट के रूप में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

►अपनी थकावट के समय में उन्होंने ट्रेन के मीटर गेज खिलाफ रेसिंग करके खुद को प्रशिक्षित किया। मिल्खा सिंह इतनी प्रैक्टिस किया करते थे कि उनके मुंह और पेशाब में खून निकलता था और कभी-कभी प्रैक्टिस के दौरान बेहोश तक हो जाते थे। यही नहीं, वास्तव में ऐसा वक्त भी आया जब उन्हें ऑक्सीजन की आपूर्ति करनी पड़ती थी। 

► मिल्खा सिंह की पहली कॉंपीटेटिव रेस एक क्रॉस कंट्री रेस थी, जिसमें वह 500 धावकों में छठे स्थान पर रहे।
 
►1958 के एशियाई खेलों के दौरान उन्होंने 200 और 400 मीटर की दौड़ में 21.6 सेकेंड और 47 सेकेंड की टाइमिंग के साथ दो गोल्ड मेडल जीते।

►उसके बाद उसी साल हुए कार्डिफ राष्ट्र मंडल खेलों में उन्होंने 46.16 सेकेंड में 400 मीटर की दौड़ पूरी कर गोल्ड मेडल जीता। इसके साथ ही आजाद भारत की तरफ से राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले एथलीट बने।

►1958 में टोक्यों में हुए एशियाई खेलों में अपराजेय सफलता के बाद सेना में उन्हें पदोन्नत कर सिपाही से जूनियर कमिशन्ड ऑफिसर बनाया गया।
 
► साल 1960 में हुए रोम ओलंपिक्स में फाइनल दौड़ से पहले हुई 400 मीटर की प्री फाइनल दौड़ में वह दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन फाइनल में दुर्भाग्यवश उन्हें 0.1 सेकेंड पीछे रहने के कारण उन्हें कांस्य पदक से हाथ धोना पड़ा।

►मिल्खा सिंह 1960 के रोम ओलंपिक्सके दौरान काफी मशहूर हुए। इसकी मुख्य वजह उनकी लंबी दाड़ी और बाल रहे। मिल्खा सिंह से पहले रोम के लोगों ने इस तरह की पगड़ी और दाड़ी वाले एथलीट को नहीं देखा था। इससे रोम के लोग पगड़ी वाले मिल्खा सिंह को देखकर उन्हें एक ऋषि-मुनि समझ बैठे और वे कहते थे कि एक मुनि ऋषि इतनी तेज कैसे दौड़ सकता है।
 
 ►मिल्खा सिंह ने पाकिस्तान के सबसे तेज धावक अब्दुल खालिक को हराया और उसके बाद ही पाकिस्तानी जनरल अयूब खान ने उन्हें फ्लाइंग सिख की उपाधि दी।

►मिल्खा सिंह ने सन 1999 में हवालदार बिक्रम सिंह के सात साल के बेटे को अपना लिया था, जो कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल्स में गोलीबारी के दौरान शहीद हुए थे।

► मिल्खा सिंह ने फिल्म भाग मिल्खा भाग के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर मेहरा को सिर्फ एक रुपए में अपनी जीवनी  बेची।
 
►. मिल्खा सिंह ने 2001 में प्रतिष्टित खेल पुरस्कार'अर्जुन अवार्ड' यह कहते हुए लेने से इनकार कर दिया था कि पुरस्कार मिलने में उन्हें 40 साल की देरी हुई। 
 
►मिल्खा सिंह का आखिरी सपना  देश का एक लड़का हो या लड़की को ओलंपिक्स में गोल्ड मेडल जीतते देखना है।

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