नवाज शरीफ की पत्नी के नाना थे गामा पहलवान, इन्हें नहीं हरा पाया दुनिया का कोई रेसलर

Know About Unbeatable Indian Wrestler Gama Pehalwan - Sakshi Samachar

नई दिल्ली : गामा पहलवान को ग्रेट गामा या रुस्तम ए हिंद के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि अपने 52 साल के पहलवानी के करियर में वे एक भी मुकाबला नहीं हारे। गामा पहलवान पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पत्नी कलसूम के नाना थे। गामा का जन्म अमृतसर में हुआ था, लेकिन विभाजन के बाद वे पाकिस्तान चले गए थे।

कौन थे गामा पहलवान ?
 पंजाब के अमृतसर में पैदा हुए गामा पहलवान के पिता मुहम्मद अजीज बक्श भी पहलवान थे। उनकी मौत के बाद दतिया के महाराज ने गामा को पेशेवर पहलवान बनाने के लिए अपने पास रख लिया। गामा ने महज 10 साल की उम्र में ही पहलवानी के गुर सीखते हुए कई पहलवानों को मात दी।

उनकी जीत का सिलसिला शुरू होते ही धीरे-धीरे उनका नाम आसपास के राज्यों में फैलने लगा।1895 में गामा का मुकाबला देश के सबसे बड़े पहलवान रहीम बक्श सुल्तानीवाला से हुआ। रहीम की हाइट 6 फीट 9 इंच थी, वहीं गामा केवल 5 फीट 7 इंच के थे। इस मुकाबले में गामा और रहीम के बीच बराबरी की टक्कर हुई और आखिरकार मैच ड्रॉ हो गया और देखते ही देखते गामा पूरे देश में चर्चित हो गए।
 

कैसे बने वर्ल्ड चैंपियन
 1910 तक गामा ने सभी बड़े भारतीय रेसलर्स को हराकर अपने लिए विदेशी पहलवानों से लड़ने के लिए रास्ते खोल लिए थे। देश में अजेय होने के बाद गामा ब्रिटेन की ओर रुख किया वहां उन्होंने विदेशी पहलवानों को धूल चटाने का मन बनाया। लेकिन लंबाई कम होने की वजह से उन्हें पश्चिमी फाइटिंग में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद, गामा ने वहां के कई रेसलर्स को खुली चुनौती दी, लेकिन लोगों ने तवज्जो नहीं दी।

आखिरकार उन्होंने वहां के सबसे बड़े पहलवानों स्टैनिसलॉस जैविस्को और फ्रेंक गॉच को ललकारा और उन्हें 9 मिनट 30 सेकंड में हराने की खुली चुनौती दे डाली। रेसलर स्टैनिसलॉस ने चैलेंज स्वीकार किया और 10 सितंबर 1910 को दोनों के बीच मुकाबला हुआ।

गामा ने पहले ही मिनट में जैविस्को को पटखनी दे दिया। 2 घंटे 35 मिनट तक हुए मुकाबले को ड्रॉ करार दे दिया गया।19 सितंबर को दोबारा मुकाबला शुरू हुआ लेकिन जैविश्को अखाड़े में आने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाया।

खामोशी से इस खेल को कहा अलविदा
 गामा का सामना 1911 में एक बार फिर रहीम बक्श से हुआ। इस बार गामा ने रहीम को मुकाबले में शिकस्त दे दी। उन्होंने 1927 में आखिरी फाइट लड़ी।  उन्होंने स्वीडन के पहलवान जेस पीटरसन को हराकर खामोशी से इस खेल को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। गामा ने अपने जीवन में देश के साथ विदेशों के 50 नामी पहलवानों से कुश्ती लड़ी और सभी जीतीं। पूरी दुनिया में गामा को कोई हरा नहीं सका। इसीलिए उन्हें वर्ल्ड चैम्पियन का खिताब मिला था। 

गामा से इंस्पायर थे ब्रूस ली
गामा पहलवान की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोरिया के महान एथलीट ब्रूस ली भी उनसे प्रेरणा लिया करते थे। ब्रूस ली उनकी ट्रेंनिग रूटीन के कायल थे। ली ने गामा से एक ऐसी तकनीक सीखी थी जिसे पुश अप्स की नई तकनीक बताया गया था जो योगा पर । इसके अलावा ली ने ग्रेट गामा से और भी कई चीजों में प्रेरणा पाते थे।

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