वो दिग्गज क्रिकेटर जिन्होंने अंपायरिंग में भी मनवाया लोहा, लिस्ट में दो भारतीय भी शामिल

Know About Legendary Cricketer Who Became Umpire - Sakshi Samachar

क्रिकेट में गेंद और बल्ले की जितनी अहम भूमिका होती है उतनी ही खिलाड़ियों की भी होती है। लेकिन क्रिकेट के खेल में जितनी अहमियत इन तीनों की है उतना ही महत्व अंपायरों का भी है। अंपायर जहां क्रिकेट के इस खेल को अच्छी तरह से चलाने के लिए मैदान पर मौजूद रहते हैं। वहीं वो खिलाड़ियों के विवादों का भी सुलझाता है और खेल को सुचारू रुप से चलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। आज हम आप को ऐसे अंपायर के बारे में बताएंगे जो खिलाड़ी से अंपायर बने और खूब वाहवाही लूटी .........

 मार्क बेन्सन :

मार्क बेन्सन अंपायर बनने से पहले क्रिकेटर भी रहे है। इंग्लैंड की डॉमेस्टिक टीम केन्ट के लिए मार्क 15 सीजन तक खेले। जिसमें उन्होंने 292 मैचों में 18387 रन बनाए। साल 1986 में उन्होंने इंडिया के खिलाफ डेब्यू किया। जिसमें उन्होंने 30 और 21 रनों की पारी खेली। इंग्लैंड के लिए उनके नाम ये इकलौता टेस्ट मैच रहा।  साल 1995 में क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने भी अंपायरिंग की दुनिया में कदम रख लिया। वो आईसीसी के एलीट पैनल में भी रहे। साथ ही 27 टेस्ट, 72 वनडे और 19 टी20 मैचों में अंपायरिंग भी की। 

 इयान गोल्ड :

इयान गोल्ड को क्रिकेट का प्रतिष्ठित अंपायर माना जाता है। साल 2018 में जिस वक्त मैदान पर सेंडपेपर कांड हुआ तब भी इयान गोल्ड ही अंपायर थे। क्रिकेट के मैदान पर अपनी अंपायरिंग की कला दिखाने से पहले इयान एक शानदार विकेटकीपर बल्लेबाज़ भी रहे हैं। गोल्ड ने इंग्लैंड के लिए लगभग दो दशकों तक फर्स्ट-क्लास और लिस्ट ए क्रिकेट खेला। उन्होंने इंग्लैंड के लिए कुल 18 वनडे मुकाबले खेले। जिसमें से कुछ तो साल 1983 क्रिकेट विश्वकप में ही रहे।  

गोल्ड लाजवाब विकेटकीपर थे। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में उनके नाम 603 डिस्मिसल्स हैं। जबकि लिस्ट ए में उन्होंने 279 शिकार किए हैं। बल्ले से भी इयान ने खूब रन बनाए। फर्स्ट-क्लास में उन्होंने 8756, जबकि लिस्ट ए में 4377 रन बनाए। क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने कुल 65 टेस्ट, 125 वनडे और 37 टी20 मैचों में अंपायरिंग की है। 

अशोका डि सिल्वा:

2003 क्रिकेट विश्वकप हो या फिर 2007 ना जाने कितने ही मौकों पर हमने अशोका डीसिल्वा को अंपायरिंग करते देखा है। लेकिन क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ियों को आउट देने से पहले उन्होंने खुद भी खिलाड़ियों को आउट किया। वो श्रीलंकाई टीम के खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने श्रीलंका के लिए 1985 से 1992 के बीच कुल 10 टेस्ट और 28 वनडे मैच खेले। बतौर लोअर ऑर्डर बैट्समैन और लेग स्पिनर उन्होंने 25 विकेट लिये और 323 रन बनाए। लेकिन क्रिकेट में कुछ खास सफलता नहीं मिल पाने की वजह से 1999 से वो अंपायरिंग की दुनिया में आ गए। साल 2012 तक वो आईसीसी के अंपायरिंग पैनल का हिस्सा रहे। उन्होंने 49 टेस्ट, 122 वनडे और 11 टी20 मैचों में अंपायरिंग की। 

 कुमार धर्मसेना :

साल 1993 से 2004 तक स्पिनर कुमार धर्मसेना श्रीलंकन टीम का हिस्सा रहे। धर्मसेना ने श्रीलंका के लिए कुल 31 टेस्ट और 144 वनडे मुकाबले खेले। लेकिन मुरलीधरन वाले दौर में टीम का हिस्सा रहे धर्मसेना को  प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बनने का मौका कम ही मिला। उन्होंने अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी से 69 टेस्ट और 138 वनडे विकेट लिए। साथ ही साथ उन्होंने बल्ले से भी 2000 से ज्यादा इंटरनेशनल रन बनाए। लेकिन फिर भी क्रिकेट के मैदान पर वो बात बनती नहीं दिख रही थी। 

साल 2006 में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेकर उन्होंने अंपायरिंग का रुख कर लिया। क्रिकेट के मैदान पर गेंद से ज्यादा कामयाबी उन्हें अंपायरिंग में मिली। वो साल 2011, 2015 और 2019 विश्वकप में अहम अंपायर रहे। साल 2015 और 2019 विश्वकप के फाइनल का जिम्मा भी धर्मसेना पर ही था। इतना ही नहीं वो इकलौते ऐसे क्रिकेट से अंपायर बने खिलाड़ी हैं, जिन्हें अंपायरों की लिए सम्मानित आईसीसी डेविड शेफर्ड ट्रॉफी से सम्मानित किया गया।

श्रीनिवास वेंकटराघवन

वेंकटराघवन को क्रिकेट जगत की तरह ही अंपारिंग में भी खूब सम्मान मिला। उन्होंने साल 1965 में 20 साल से भी कम उम्र में इंडियन टीम के लिए अपना डेब्यू कर लिया। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ सीरीज में उन्हें मौका मिला। पहली सीरीज़ में ही उन्होंने वर्ल्ड-क्लास स्पिनर होने का तमगा हासिल कर लिया। उन्होंने टेस्ट में 156 और वनडे में सिर्फ पांच विकेट चटकाए। साल 1983 आते-आते वेंकट ने टेस्ट और वनडे दोनों क्रिकेट को अलविदा कहकर अपने लिए एक नया रास्ता चुन लिया। 

उन्होंने आईसीसी के लिए पहली बार 1993 में टेस्ट मैच में अंपायरिंग की। मैच इंडिया और इंग्लैंड के बीच जयपुर में खेला गया था। साल 1994 में जब इंटरनेशनल अंपायरों का पैनल बना तो वैंकट को उसमें भी जगह मिली। वेंकट ने इसके बाद अपनी अंपायरिंग से इतना प्रभावित किया कि उन्हें आईसीसी बड़े मैचों में अंपायरिंग का जिम्मा सौंपने लगा। वो साल 1996, 1999 और 2003 क्रिकेट विश्वकप में बड़े अंपायर थे।  

अलीम डार : 

पाकिस्तान के अलीम डार ऐसे इकलौते अंपायर  हैं जो आईसीसी एलीट पैनल में शामिल हैं और दो बार आईसीसी के साल के सर्वश्रेष्ठ अंपायर का पुरस्कार हासिल कर चुके हैं। अलीम डार की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि इन्होनें कभी भी अपने फैसलों में भेदभाव को जगह नहीं दी। यही एक कारण रहा है कि विश्व की सभी टीमें इनका आदर करती आयी हैं। 6 जून 1968 को जन्मे अलीम डार पाकिस्तान के लिए प्रथम श्रेणी के खिलाड़ी भी रहे हैं। अलीम डार 94 टेस्ट मैच, 175 एकदिवसीय और 35 ट्वेंटी- ट्वेंटी मैचों में, अपनी सेवाएं चुके हैं। 

पॉल रिफेल

क्रिकेटर से अंपायर बने 53 वर्षीय पॉल रिफेल ने अपने प्रथम श्रेणी अंपायरिंग करियर की शुरूआत वर्ष 2002 में की थी, जबकि वर्ष 2008 में उन्हें आईसीसी के अंतरराष्ट्रीय अंपायर पैनल में शामिल किया गया था। अब तक पॉल रिफेल ने 43 टेस्ट, 61 वनडे और 16 टी20 मैचों में मैदानी अंपायर की भूमिका निभाई है। 

नितिन मेनन 

नितिन ने बतौर बल्लेबाज करियर शुरू किया था। वे मध्यप्रदेश के लिए अंडर-16, अंडर-19, अंडर-22, अंडर-25 और दो लिस्ट-ए (वनडे) मैच खेल चुके हैं। नितिन मेनन को  इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने अपने अंपायरों के एलीट पैनल में जगह दी है। वह 2007-08 सत्र से घरेलू मैचों में अंपायरिंग कर रहे हैं । वह 57 प्रथम श्रेणी मैचों के अलावा 22 वनडे, नौ टी20 और 40 आईपीएल मैचों में अंपायर रह चुके हैं।

रॉड टकर 

क्रिकेटर से अंपायर बने 54 वर्षीय रॉड टकर ने अब तक 67 टेस्ट, 79 वनडे और 35 टी20 मैचों में मैदानी अंपायर की भूमिका निभाई है। रॉड टकर ने अपने अंतरराष्ट्रीय अंपायरिंग करियर की शुरूआत 2008 में आईसीसी के अंतरराष्ट्रीय पैनल के अंपायर के रूप में की थी तथा 2010 में उन्हें आईसीसी के एलीट अंपायर पैनल में शामिल कर लिया गया था। 
 

मु०. जहांगीर आलम, उपसंपादक

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