'हैंड ऑफ गॉड' से गोल ऑफ द सेन्चुरी तक, जानें जीनियस और 'बदनाम' माराडोना की कहानी

Football Legend Diego Maradona Died Know About His Life - Sakshi Samachar

ब्यूनस आयर्स की झोपड़ पट्टी में रहते थे मैराडोना

बचपन से करिश्माई थे माराडोना

बड़े फुटबॉल क्लबों से रिकॉर्ड करार

हैदराबाद : अर्जेन्टीना (Argentina) के महान फुटबॉलर और कोच रह चुके डिएगो माराडोना (Diego Maradona) का 60 साल की उम्र में निधन हो गया। कार्डिएक अरेस्ट से उनका निधन हुआ। इसी महीने माराडोना की ब्रेन सर्जरी हुई थी और दो सप्ताह पहले ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। माराडोना को दुनिया के महान फुटबॉलरों में शामिल किया जाता है। 1986 में अर्जेंटीना को वर्ल्ड चैंपियन बनाने में मराडोना का बड़ा हाथ रहा था।

मैराडोना गरीब परिवार में जन्मे थे। हालांकि, जो शोहरत और मुकाम मैराडोना ने हासिल की, कोई खिलाड़ी उसकी कल्पना भी नहीं  कर सकता है। कहा जाता है कि उनके भाई ने उन्हें एक फुटबॉल गिफ्ट की थी। इससे इतना प्यार हुआ कि 6 महीने तक पास रखकर सोते थे। इसी फुटबॉल (Football) में इतनी महारत हासिल कर ली कि गोल ऑफ द सेन्चुरी किया। इसे हैंड ऑफ गॉड का नाम दिया गया और इसी की बदौलत अर्जेंटीना वर्ल्ड कप जीता। उन्हें फीफा ने प्लेयर ऑफ द सेन्चुरी भी चुना। 

ब्यूनस आयर्स की झोपड़ पट्टी में रहते थे मैराडोना

मैराडोना का जन्म ब्यूनस आयर्स के लानुस में एक गरीब परिवार में हुआ था। ये ब्यूनस आयर्स की झुग्गी-झोपड़ी वाला इलाका था। मैराडोना के पिता डॉन डिएगो और मां साल्वाडोरा फ्रेंको को 3 बेटियों के बाद पहला बेटा मिला था, मैराडोना। ये परिवार बाद में बढ़कर 8 भाई-बहनों वाला हो गया। मैराडोना जब 3 साल के थे, तो उन्हें उनके भाई ने एक फुटबॉल गिफ्ट की थी। तभी से मैराडोना को फुटबॉल से इतना प्यार हुआ कि वो 6 महीने तक उसे अपनी शर्ट के भीतर रखकर ही सोते थे।

बचपन से करिश्माई थे माराडोना

माराडोना सिर्फ दस साल की उम्र में वह स्थानीय क्लब एस्त्रोला रोसा से खेलने लगे। दो साल बाद मामूली पैसा देकर लोस कैबोलिटास ने अपने साथ जोड़ा। डिएगो में परिवार को गरीबी से निकालने की धुन सवार हो चुकी थी। असाधारण खेल से वह चर्चित हो चुके थे, पर डिएगो के लिए यह महज शुरुआत थी। 15 साल की उम्र में अर्जेंटीनोसा जूनियर्स से पेशेवर करियर का आगाज किया। 167 मैचों में 115 गोल ठोक डाले।

बड़े फुटबॉल क्लबों से रिकॉर्ड करार

नामी क्लब बोका जूनियर्स की नजर उन पर पड़ी। क्लब ने 10 लाख पाउंड की अच्छी कीमत देकर उन्हें अपने साथ जोड़ लिया। धुआंधार प्रदर्शन से माराडोना को अगले साल राष्ट्रीय टीम में चुना गया। 1982 में उन्हें पहला वर्ल्ड कप खेलने का मौका मिला पर वह पांच मैचों में दो गोल ही ठोक पाए, पर उनकी टीम सेमीफाइनल में पहुंची, माराडोना को यह यकीन हो गया था कि उनकी टीम में भी चैंपियन बनने का दम है। 

1986 के विश्व कप में अर्जेंटीना को चैंपियन बनाया

1986 का विश्व कप पूरी तरह माराडोना के नाम रहा। उन्हें टीम की कप्तानी सौंपी गई और वह अकेले दम पर अर्जेंटीना को पहली बार चैंपियन बनाकर लौटे। उन्होंने पांच गोल किए और पांच में मदद की। इससे उन्हें टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का गोल्डन बॉल अवॉर्ड भी मिला। सिर्फ उनके देश में ही नहीं, पूरी दुनिया में ‘डिएगो-डिएगो' का नाम गूंज उठा। माराडोना उस दौर में सबसे लोकप्रिय शख्स बन गए। 

चमकदार करियर पर ड्रग्स ने लगाया दाग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैराडोना ने 1982 के दशक में कोकीन लेना शुरू किया था। तब उनका करियर शबाब पर था, लेकिन उन्हें नशे की लत पड़ चुकी थी। 1984 में जब नेपोली क्लब के लिए खेलने लगे थे, तब वो इटैलियन माफिया कोमोरा के संपर्क में आ गए थे। अगले दो दशकों तक उन्होंने लगातार ड्रग्स ली और शराब पी। कोकीन के सेवन के लिए मैराडोना को उनके क्लब नेपोली ने 1991 में 15 महीने के लिए बैन कर दिया था।

'हैंड ऑफ़ गॉड' की चर्चा

1986 के वर्ल्ड कप के क्वार्टर फ़ाइनल में माराडोना ने कुछ ऐसा किया, जिसकी चर्चा हमेशा होती रहेगी। मेक्सिको में क्वार्टर फ़ाइनल का यह मैच अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच था। मैच के दौरान माराडोना विपक्षी टीम के गोलकीपर की तरफ उछले और उन्होंने अपने हाथ से फ़ुटबॉल को नेट में डाल दिया। हाथ का इस्तेमाल होने की वजह से यह गोल विवादों में आ गया। 

फ़ुटबॉल के नियमों के अनुसार हाथ का इस्तेमाल होने के कारण यह गोल फ़ाउल था और इसके लिए माराडोना को 'येलो कार्ड' दिखाया जाना चाहिए था। लेकिन उस समय वीडियो असिस्टेंस टेक्नॉलजी नहीं थी और रेफरी इस गोल को ठीक से देख नहीं पाए। इसलिए इसे गोल माना गया और इसी के साथ अर्जेंटीना 1-0 से मैच में आगे हो गया।
इसके बाद से फ़ुटबॉल के इतिहास में यह घटना हमेशा के लिए 'हैंड ऑफ़ गॉड' के नाम से दर्ज हो गई। 

फुटबॉल को कह दिया अलविदा

साल 1991 में ही उन्हें ब्यूनस आयर्स में 500 ग्राम कोकीन के साथ गिरफ्तार किया गया था। उन्हें तब 14 महीने की सजा दी गई थी। ड्रग्स ने उनके फुटबॉल करियर को ही खत्म कर दिया। 1997 में उन्होंने फुटबॉल को अलविदा कह दिया। अर्जेंटीना की ओर से खेलते हुए माराडोना ने 91 मैचों में 34 गोल किए। अर्जेंटीना की ओर से माराडोना ने चार वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया है। 2008 में लियोनल मेस्सी की टीम के कोच बने, पर क्वार्टर फाइनल में टीम हार गई। 

माराडोना ने 491 मैचों में कुल 259 गोल दागे थे। इतना ही नहीं, एक सर्वेक्षण में उन्होंने पेले को पीछे छोड़ '20वीं सदी के सबसे महान फ़ुटबॉलर' होने का गौरव अपने नाम कर लिया था। माराडोना के निधन पर अर्जेंटीना फुटबॉल असोसिएशन ने शोक जताते हुए कहा, 'हमारे लीजेंड के निधन से हम शोक में डूबे हैं, आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।' 

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