मुझे कोई मलाल नहीं, मेरा कैरियर संतोषजनक रहा- जन्मदिन पर बोले वेंगसरकर

Cricketer Dilip Vengsarkar does not regret on his cricket celebrates his 64 birthday - Sakshi Samachar

जन्मदिन पर बोले दिलीप वेंगसरकर

कहा, शौहरत नहीं मिलने का कोई मलाल नहीं

अस्सी के दशक के प्रमुख बल्लेबाज ने मनाया 64वां जन्मदिन 

नई दिल्ली :  सुनील गावस्कर और गुंडप्पा विश्वनाथ जैसे दिग्गजों की मौजूदगी में उन्हें भले ही वैसी शोहरत नहीं मिली हो लेकिन दिलीप वेंगसरकर को कोई मलाल नहीं है और वह अपने कैरियर से काफी खुश हैं । सोमवार को अपना 64वां जन्मदिन मना रहे वेंगसरकर अस्सी के दशक में भारत के प्रमुख बल्लेबाजों में से थे । 

भारत के लिये 16 साल तक खेलने वाले ‘कर्नल' ने  कहा ,‘‘ जब मैं पीछे देखता हूं तो काफी अच्छा और संतोषजनक सफर रहा । भारत के लिये 116 टेस्ट खेलना सबसे बड़ा संतोष है ।इसके अलावा 129 वनडे, विश्व कप जीतना और विश्व चैम्पियनशिप जीतना । इसके साथ भारत की कप्तानी । यह शानदार सफर रहा ।'' 

लाडर्स पर तीन शतक लगाने वाले इंग्लैंड से इतर एकमात्र अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और सत्तर-अस्सी के दशक के खतरनाक कैरेबियाई आक्रमण के सामने छह शतक जमाने वाले वेंगसरकर को क्या महसूस होता है कि उन्हें वह श्रेय नहीं मिला जिसके वह हकदार थे , यह पूछने पर उन्होंने कहा ,‘‘ यह भाग्य की बात है । आपको कड़ी मेहनत करके ईमानदारी से खेलकर टीम के लिये मैच जीतने होते हैं । यह हर क्रिकेटर का लक्ष्य होना चाहिये ।'' उन्होंने कहा ,‘‘ इस तरह से जो भी उपलब्धियां या पहचान मिलती है , आपको श्रेय मिलता है या नहीं , यह सब भाग्य की बात है ।''

(फोटो सौजन्य सोशल मीडिया)

दिलीप वेंगसरकर के लिये यादगार पल

आपको बता दें कि दिलीप वेंगसरकर अपने क्रिकेट के लिये ज्यादा चर्चित नहीं रहे, लेकिन अपने खेल के दौरान कई बार शानदार पारियां खेलीं है। उन्होने 1979 में उन्होने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट में शानदार पारी खेली थी ।

                             (फोटो सौजन्य सोशल मीडिया)

फिरोजशाह कोटला में खेले गये इस मैच में उन्होने 390 रनों का पीछा करते हुए भारत को टारगेट के नजदीक पहुंचाने में सफल रहे थे। इस मैच में भारत शानदार जीत से सिर्फ 26 रन पीछे रह गया था। उन्होंने बिना आउट हुए 146 रनों का योगदान दिया था  ।

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साल 1978 में उन्होने वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की ओर से खलते हुए सुनील गावस्कर के साथ शानदार पार्टनरशिप की और अपना शतक भी बनाया । 
 
साल 1983 में दिलीप वेंगसरकर वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल थे। 

साल 1985 से 1987 के बीच दिलीप वेंगसरकर ने अच्छी खासी पारी खेली और ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, इंग्लैंड, श्रीलंका और वेस्टइंडीज के खिलाफ शतक जमाए थे ।

साल 1986 में लॉर्ड्स के मैदान पर शानदार शतक लगाया था , उन्हें भारत की जीत में उनकी अहम भूमिका को देखते हुए उन्हे मैन ऑफ दी सीरीज का अवार्ड प्रदान किया गया।

साल 1981 में उन्हे उनके अच्छे खेल के लिये अर्जुन पुरस्कार भी दिया गया। वहीं उनके सराहनीय योगदान के लिये भारत सरकार ने पद्मश्री अवॉर्ड दिया गया। 

दिलीप वेंगसरकर को सी के नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट की ओर से दिया गया।
 

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