ऐसी थी शेख अब्दुल्ला के 'शेर-ए-कश्मीर' बनने की कहानी, कभी लगा था देशद्रोह का आरोप

Who in Sheikh Abdullah Know About his Political Journey - Sakshi Samachar

विवादों से रहा है शेख अब्दुल्ला का नाता

पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला पर लगे थे गंभीर आरोप

देशद्रोह के आरोप में 10 की काटी थी जेल, उसके बाद बने थे सीएम

नई दिल्ली : 'शेर-ए-कश्मीर' के नाम से मशहूर शेख अब्दुल्ला का जीवन काफी चर्चा में रहा है। उनकी किताब ‘आतिशे चिनार’ में कई ऐसी घटनाओं का जिक्र किया गया है, जो बेहद चौंकाने वाली हैं। शेख अब्दुल्ला पर भारत के खिलाफ विद्रोह का आरोप, कश्मीर को भारत से अलग मुस्लिम राष्ट्र बनाने की कोशिश जैसी घटनाएं शामिल हैं। आइए जानते हैं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला की जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।

शेख अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला के पिता और उमर अब्दुल्ला के दादा थे। घाटी की राजनीति में अब्दुल्ला परिवार का हमेशा से वर्चस्व रहा है और इसमें सबसे अहम किरदार शेख अब्दुल्ला का था। साल 1975 में शेख अब्दुल्ला पहली बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने थे। 

जेल में काटे थे 10 साल

शेख अब्दुल्ला को जिन्ना का करीबी बताया जाता था। वह जवाहर लाल नेहरू के भी काफी करीबी बताए जाते थे। बावजूद इसके नेहरू ने शेख अब्दुल्ला को देशद्रोह के आरोप में 10 साल के लिए जेल में बंद करवा दिया था। शेख अब्दुल्ला ने अपनी पुस्तक आतिशे चिनार में पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया था।

पाकिस्तान के साथ मिलकर देशद्रोह की कोशिश

गुलमर्ग में शेख अबदुल्ला को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर दस साल के लिए जेल भेज दिया गया था। उन पर एक पाकिस्तानी अधिकारी से मिलकर भारत के खिलाफ विद्रोह की योजना बनाने का आरोप था। इसके पीछे ब्रिटेन का भी हाथ बताया जाता है। इधर दिल्ली में शेख के जो पत्र गुप्तचर एजेंसियों ने बरामद किए थे उससे नेहरू के भी होश उड़ गए थे। शेख अब्दुल्ला ने आतिशे चिनार किताब में इस वाकये का जिक्र किया है। हालांकि उन्होंने बताया है कि जिस षड्यंत्र के तहत मुझे फंसाया गया था वह सरासर झूठी थी।

अब्दुल्ला ने माना था, उनके पूर्वज हिंदू थे

शेख अब्दुल्ला ने स्वीकार किया था कि कश्मीरी मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे। उनके पूर्वज कश्मीरी पंडित थे और परदादा का नाम बालमुकुंद कौल था। किताब में उन्होंने लिखा है कि उनके पूर्वज मूलत: सप्रू गोत्र के कश्मीरी ब्राह्मण थे। अफगानों के शासनकाल में उनके एक पूर्वज रघूराम ने एक सूफी के हाथों इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था।

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