'तेलंगाना का तिरुपति' कहलाता है यादाद्रि का 'श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर', Rs780Cr. खर्च कर हुआ पुनर्निर्माण

Sri Lakhsmi Narasimha Swami Mandir called Telangana Tirupati  - Sakshi Samachar

दुनिया भर के श्रद्धालुओं को मंदिर खुलने का इंतजार

मंदिर पुनर्निर्माण को दिया जा रहा अंतिम टच

780 करोड़ रुपये खर्च कर किया गया पुनर्निर्माण

यादाद्रि : सभ्यता और संस्कृति के लिहाज से भारत (Bharat) विविधताओं का देश माना जाता है। यहां एक ओर खजुराहो (khajuraho Mandir) की मनमोहक कलाकृतियां दूरदराज के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं तो दूसरी ओर अजंता-एलोरा (Ajanta-Ellora) की गुफाओं की खूबसूरती।

एक ओर आगरा (Agra) का ताजमहल (Taj Mahal) है, तो दूसरी ओर दिल्ली (Delhi) का लाल किला (Red Fort)। वास्तुकला के ऐसे कितने ही नमूने भारत की खूबसूरती में चार-चांद लगाते हैं। हैदराबाद भी इस मामले में पीछे नहीं है। यहां कितने ही आकर्षक और खूबसूरत मंदिर पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते दिखते हैं। ऐसे ही मंदिरों में से एक है लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर।

तेलंगाना का तिरुपति

हैदराबाद से 70 किलोमीटर दूर यादगिरिगुट्टा (Yadagirigutta) स्थित श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर को 'तेलंगाना का तिरुपति' भी कहा जाता है। सिर्फ चार साल की अ​वधि में यादगिरिगुट्टा के श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर (Sri Lakshmi Narsimhaswami Temple) का पूरी तरह से कायापलट हो चुका है। विशाल शिखर, लुभावनी मूर्तियां और मंडप के साथ मंदिर में एक व्यापक परिवर्तन भी किया गया है, जिससे यादगिरिगुट्टा मंदिर अब आधुनिक वास्तुशिल्प चमत्कार में ​बदल दिया है।

मंदिर का पुनर्निर्माण कुछ इस कदर किया जा रहा है कि अब यह अन्य प्रसिद्ध भारतीय मंदिरों को भी टक्कर देने को तैयार है। मंदिर परिसर में तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखकर यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सभी जरूरी सुविधाओं का ध्यान रखते हुए ​बुनियादी ढांचे निर्मित किए जा रहे हैं।

अंतिम टच दिया जा रहा

मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव ने यादगिरिगुट्टा मंदिर विकास प्राधिकरण (YTDA) को मंदिर कार्य शुरू करने का निर्देश दिया था। 21 अप्रैल 2016 को शुरू हुआ मंदिर का यह निर्माण कार्य अब लगभग पूरा हो चुका है। मंदिर के इस पुनर्निर्माण को अब अंतिम टच दिया जा रहा है। मंदिर निर्माण में कार्यरत कर्मचारी सजावटी कार्यों को पूरा करने के काम में लगे हैं। सीएम केसीआर ने जिलों के पुनर्गठन के दौरान यादगिरिगुट्टा का नाम बदल कर यादाद्रि घोषित किया था।

पहले महज 2,500 वर्ग गज क्षेत्र के अंतर्गत बना यादगिरिगुट्टा मंदिर परिसर, अब बाहरी और भीतरी प्रकारम के साथ 3.5 एकड़ से अधिक तक विस्तारित किया गया है, जो शिखर, क्यू और प्रसाद वितरण परिसर समेत भक्तों के लिए अन्य सुविधाओं से युक्त है। विकसित बुनियादी ढांचे के साथ मंदिर परिसर में अब एक घंटे में 40,000 तीर्थ यात्रियों के लिए दर्शन की सुविधा उपलब्ध होगी।

780 करोड़ रुपये हो चुके खर्च

यहां 500 से अधिक मूर्तिकार काम कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना समेत अन्य स्थानों के कारीगर भी शामिल हैं। 2016 के बाद से वाईटीडीए ने लगभग 780 करोड़ रुपये यहां खर्च किए जा चुके हैं।

मंदिर के निर्माण के लिए 280 करोड़ रुपये का खर्च किया गया है। ​इसमें भूमि अधिग्रहण, यादगिरिगुट्टा का विकास, पर्याप्त पार्किंग और अन्य सुविधाओं के  लिए शेष राशि शामिल किया गया है। इस साल की शुरुआत में लॉकडाउन के दौरान भी निर्माण कार्य पूरी सुरक्षा के साथ जारी था।

YTDA ने पूरे किए अधिकांश कार्य

फ्लोरिंग, ब्रह्मोत्सव मंडप, मुख मंडप में चांदी के उभरे हुए पैनल की स्थापना समेत लगभग सभी मंदिर कार्य पूर्ण हैं। वर्तमान के अन्य पैच कार्य भी प्रगति पर हैं। मुख्य मंदिर से सं​बंधित अधिकांश कार्य YTDA ने पूरे किए हैं। आमतौर पर ऐसी सुविधाओं, शानदार वास्तुकला और पर्याप्त खुली जगहों के साथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 15 से 20 साल लगते हैं, लेकिन YTDA ने इन सभी कार्यों को सिर्फ चार वर्षों में ही पूरा कर लिया है।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव ने अधिकारियों को प्रतिष्ठित याद्रादि स्थित इस मंदिर के निर्माण में तेजी लाने और इसे अगले कुछ ही महीनों में जनता के लिए खोलने का निर्देश दिया है। वह चाहते हैं कि मंदिर का परिवेश इस तरह विकसित हो, जो भक्ति और शांति का प्रतीक हो।

दुनिया भर के श्रद्धालुओं को मंदिर खुलने का इंतजार

पिछले सप्ताह प्रगति भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि यादगिरिगुट्टा मंदिर को देश के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक के रूप में विकसित किया जा रहा है। दुनिया भर के श्रद्धालु इसके खुलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

CM ने बस मार्गों के विकास की भी समीक्षा की

चंद्रशेखर राव ने याद्रादि मंदिर परिसर के अलावा मंदिर शहर, कॉटेज और बस स्टैंड जैसी विभिन्न संरचनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की। उन्होंने पुलिस चौकी, अन्न प्रसादम परिसर, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और अन्य निर्माण कार्यों के अलावा हिलटॉप, वीआईपी कार पार्किंग, कल्याणकट्टा, पुष्करिणी घाट, ब्रह्मोत्सव और कल्याण मं​डप के लिए बस मार्गों के विकास की भी समीक्षा की।

साथ ही संबंधित अधिकारियों से कहा कि वे मंदिर निर्माण के लिए केवल अनुभवी मूर्तिकारों को ही तैनात करें। खासकर वैसे का​रीगर, जो अयोध्या और अक्षरधाम जैसे मंदिरों में काम कर चुके हैं। उसमें क्यू कांप्लेक्स का निर्माण भी शामिल था।

भगवान नरसिम्हा स्वामी मंदिर

श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर का यह नया भव्य प्रारूप भगवान न​रसिम्हा के प्राचीन मंदिर के पास ही तैयार किया जा रहा है। बता दें कि श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर को पंच नरसिम्हा टेम्पल भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह भगवान नरसिम्हा का एक विशेष गुफा वाला मंदिर है, जो यादगिरिगुट्टा की ऊंची पहाड़ी के शिखर पर स्थित है।

भगवान नरसिम्हा के पांच स्वरूप

इस मंदिर में भगवान नरसिम्हा के पांच स्वरूपों को दिखाया गया है। मंदिर का गर्भगृह गुफा के अंदर स्थित है और मुख्य मंदिर इसी गुफा के इर्द-गिर्द बनाया गया है। गुफा की दीवार पर भगवान नरसिम्हा की देवी लक्ष्मी को गोद में बिठाई हुई मूर्ति बनी हुई है। बीच में पूजा अर्चना के लिए उत्सव मूर्ति रखी हुई है। भगवान नरसिम्हा की मां लक्ष्मी के साथ की यह मूरत देखना श्रद्धालुओं को अभिभूत कर देती है। उन्हें ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि उन्होंने भगवान नरसिम्हा और देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त हो गया है।

क्या है इस मंदिर की कहानी

पुराणों में इस बात का वर्णन है कि श्री यदा महर्षि इसी गुफा में थाप करते थे और भगवान नरसिम्हा ने उन्हें यह आशीर्वाद दिया था कि वे उन्हें पांच रूपों में दर्शन देंगे। ये पांच रूप इस प्रकार हैं- श्री ज्वाला नरसिम्हा (Sri Jwala Narasimha), श्री योगनंदा नरसिम्हा (Sri Yogananda Narasimha), श्री उग्र नरसिम्हा (Sri Ugra Narasimha), श्री गंडाबेरूंडा नरसिम्हा (Sri Gandaberunda Narasimha) और श्री लक्ष्मी नरसिम्हा (Sri Lakshmi Narasimha)। यही वजह है कि यह मंदिर पंच नरसिम्हा मंदिर के नाम से जाना जाता है।

भगवान नरसिम्हा हर बीमारी कर देते हैं छू-मंतर

इस मंदिर में आज भी भगवान नरसिम्हा के इन पांचों रूपों की पूजा की जाती है। भगवान नरसिम्हा  यादगिरि के नाम से भी जाने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान यहां वैद्य के रूप में विराजमान हैं और श्रद्धालुओं को भगवान नरसिम्हा उनकी हर बीमारी से मुक्त कर देते हैं।

जल्दी दर्शन के लिए लगते हैं पेड क्यूज

यह मंदिर दूर दराज के इलाकों में भी इतना ज्यादा पॉपुलर है कि सामान्यत: यहां दर्शन के लिए बेहद लंबी लाइन लग जाती है। यहां दर्शन के लिए 25 रुपये और 100 रुपये के पेड क्यू भी लगे होते हैं। इस क्यू के जरिये भगवान नरसिम्हा के दर्शन जल्दी किए जा सकते हैं।

महज 600 रुपये में कर सकते हैं पूजा-अर्चना-दर्शन

पूजा के दौरान आप चाहें तो 600 रुपये का भुगतान करके पुष्प अर्चना भी कर सकते हैं। इसके तहत आपको 15 से 20 मिनट तक भगवान नरसिम्हा के ठीक सामने बैठने का मौका ​भी दिया जाता है। इस दौरान पंडित आपके पूरे परिवार के लिए अर्चना भी करते हैं। इसके साथ ही आपको सिंदूर, पुष्प, तुलसी, हल्दी लगा चावल का प्रसाद, एक अंगवस्त्र, एक ब्लाउज का पीस और एक लड्डू प्रसाद के रूप में दिया जाता है। इसके लिए टिकट मंदिर के अंदर स्थित आफिस में उपलब्ध होता है। मात्र 600 रुपये देकर आप दर्शन के लिए लगी लंबी लाइन से भी बच सकते हैं।

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