'दिशा' कांड के बाद कुछ यूं बदले आंध्र और तेलंगाना में नियम कानून, जानिए क्या-क्या हुआ खास

Rules changed Telangana And Andhra Pradesh after Disha Incident - Sakshi Samachar

 'दिशा कानून' के साथ एक कारगर एप बना है

पेट्रोलिंग में 900 स्कूटरों की व्यवस्था के साथ हर थाने में दिशा महिला हेल्प डेस्क

ऑनलाइन में शिकायत करने पर शी टीम तेज कार्रवाई

हैदराबाद : देश के लोगों की रोंगटें खड़ी कर देने वाली दिशा (Disha) रेप और निर्मम हत्या की घटना ने लड़कियों में सुरक्षा की भावना जगा दी है। महिलाओं व लड़कियों की आबरू पर हमला करने वालों की अब खैर नहीं है, क्योंकि ऐसे मामलों में ऐसी व्यवस्था उपलब्ध है कि पुलिस चंद मिनटों में घटनास्थल पर पहुंच सके और अपराधियों को पकड़ सके। इसके लिए आधुनिक तकनीकी का उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है। कामकाजी लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस भी चौकन्नी है।

दिशा घटना के बाद सरकार की कार्रवाई के चलते पढ़ी-लिखी महिलाओं में सुरक्षा को लेकर जो डर होता था वह कम गया है और उनके बुलंद हुए हैं। दूसरी तरफ, उनके माता-पिता के माथे पर चिंता की लकीरें मिटती जा रही हैं। लड़कियों का सिक्स्थ सेन्स (Sixth Sense) अच्छे-बुरे का पूर्वाभास करा रहा है। हैदराबाद (Hyderabad) के पुलिस आयुक्तालय क्षेत्रों की शी टीम कामकाजी लड़कियों और महिलाओं को सुरक्षा मुहैया करा रही है। महिला की अश्लील फोटो निकालकर उसे ब्लैकमेल करनेवाले, नाबालिग लड़की से छेड़कानी करने पर शी टीम आरोपी को गिरफ्तार कर रिमांड पर भेज रही है। कैब ड्राइवर किसी लड़की या महिला से छेड़कानी करता है तो ऑनलाइन में शिकायत करने पर शी टीम कार्रवाई कर रही है। 

 किसी घटना को लेकर महिला के थाने पहुंचने पर उसे इलाके का हवाला देकर वापस लौटाने की बजाय 'जीरो' एफआईआर दर्ज की जा रही है। हैदराबाद के आबिड्स थाने में मार्च में  'जीरो' एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस में दी गई शिकायत में आबिड्स की मेहयन्स मरियम नामक लड़की ने बताया था कि बंजारा हिल्स (Banjara Hills) निवासी सय्यद इमरान अहमद ने शादी का झांसा देकर उसका रेप किया था और धर्मांतरण के लिए उसपर जोर देता था। उसके गर्भवती होने पर उसने उसका गर्भपात भी करवाया था। 

दिशा घटना के बाद काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। आरोपियों को लगने लगा है कि सजा देने में कानून में देरी करता है तो कानून के  सहारे लोग या पुलिस ही उनका खातमा कर देती है। दूसरी तरफ, आरोपियों को जल्द से जल्द धरदबोचने के लिए आधुनिक तकनीकी कारगर साबित हो रही है। आरोपियों पर नकेल कसने के लिए आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) सरकार ने  'दिशा कानून' के साथ एक कारगर एप बनाया है जिसे महिलाएं किसी भी तरह की आपदा में आसानी से उपयोग कर सकती हैं। 

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी (YS Jagan Mohan Reddy) ने महिलाओं व बच्चों के साथ हो रही आपराधिक घटनाओं की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना का आदेश दिया है। इससे जुड़ी फाइल केंद्रीय गृहमंत्रालय के पास लंबित होने का जिक्र करते हुए सीएम ने  अधिकारियों को केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाने और अपराध से जुड़े कानून में संशोधन करते हुए भेजे गए बिल मंजूर करवाने को कहा। 

सीएम जगन ने दिशा एप के तहत मिलने वाली शिकायतों का निपटान करने के लिए क्वालिटी सेवाएं मुहैया कराने पर जोर दिया। आंध्र प्रदेश सरकार ने दिशा कानून के तहत मामलों की यथाशीघ्र सुनवाई के लिए 13 जिलों में 11 प्रॉसिक्यूटर्स, पोक्सो मामलों की सुनवाई के लिए 8 स्पेशल प्रॉसिक्यूटर्स नियुक्त किए हैं। सरकार ने दिशा कानून, एप और नंबरों से संबंधित जानकारी ग्राम, वार्ड सचिवालय सहित लोगों को अधिक भीड़-भाड़ वाले व सार्वजनिक क्षेत्रों में पोस्टर्स के माध्यम से प्रचार किया है। प्रदेश में फोरेंसिक लैब्स बनाने पर कार्रवाई की जा रही है। 

आंध्र प्रदेश सरकार हर पुलिस थाना क्षेत्र में दिशा पेट्रोलिंग शुरू करने जा रही है। पेट्रोलिंग में 900 स्कूटरों की व्यवस्था करने के साथ हर थाने में दिशा महिला हेल्प डेस्क की व्यवस्था की जा रही है। पुलिस थाने में अलग से कंप्यूटर और फोन नंबर मुहैया कराया जा रहा है। आंध्र प्रदेश  सरकार द्वारा जारी दिशा एप को 11 लाख लोगों ने डाउनलोड किया है। एप के जरिए अब तक 502 कॉल्स, 107 प्राथमिकी दर्ज हुए हैं। दिशा  कानून के तहत कुल 390 मामले दर्ज हुए हैं। इन मामलों में 7 दिन के भीतर चार्ज शीट दाखिल हुए थे और 74 मामलों में सजा मुकरर हुई।  इनमें 3 मौत की सजा, 5 आजीवन कारावास, 2 को 20 साल की सजा, 5 को 10 साल की सजा और बाकी लोगों को पांच साल से कम  जेल 
की सजा सुनाई गई है। 1130 मामलों में  चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद उनका केस नंबर आना अभी बाकी है। साइबर मित्र के जरिए भी 265 एफआईआर दर्ज हुए हैं।

आंध्र प्रदेश में सोशल मीडिया पर प्रताड़नाओं के नियंत्रण के लिए साइबर बुल्लिंग व्हाट्सएप नंबर उपलब्ध है। इसमें अब तक 27 हजार से  अधिक शिकायतें मिली हैं। 780 लोगों के बार-बार कानून का उल्लंघन करने पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। साइबर अपराध और साइबर कानून के प्रति लोगों में जागरूकता लाने वाले ई-रक्षा बंधन का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। आंध्र प्रदेश में दिशा वन स्टॉप सेंटर चौबीसौ घंटे काम कर रहे हैं। इन सेंटरों को 13 जिला मुख्यालयों में स्थापित किया गया हैं। पिछले जनवरी से अगस्त तक वनस्टॉप सेंटरों में कुल 2285 मामले पहुंचे हैं।

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आज की बेटियों को अपने माता-पिता यकीन दिला रहे हैं कि वह अब काफी सुरक्षित हैं। दिशा घटना ने एक बार फिर सरकार और सुरक्षा का वादा करने वाली पुलिस को चौकन्ना कर दिया। 100 नंबर का राग अलापनेवाली सरकार किसी लड़की या महिला पर दोष मढ़ने से पहले सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। पेट्रोलिंग तेज और चौकन्नी कर दी है। 

आपको बता दें कि सरकार ने आपराधिक मामलों में पीड़ितों को जल्द से कम समय में न्याय दिलाने की मुहिम तेज कर दी है। प्रमुख चौरोहों के निकट सीसीटीवी कैमरे लगाये जा रहे हैं। पुलिस समय समय पर असामाजिक गतिविधियों की ट्रैकिंग कर रही है। हमारे द्वारा उपयोग में लाये जा रहे कुछ एप में लोकेशन ट्रैक हो रहा है। किसकी लोकेशन को ढूंढना हो तो सर्वर की सहायता और आवश्यक अनुमति से आसान हो गया है। 

दिशा के माता-पिता लोगों को यकीन दिला रहे हैं कि राजनीतिक दलों के नेता, पुलिस और सरकार पर भरोसा रखना चाहिए। किसी को न्याय दिलाने में कानून भले ही देर करें, लेकिन समाज जघन्य अपराध करने वालों को सजा जरूर देता है। उन्होंने लोगों का हौसला बढ़ाया है कि 'देर है लेकिन अंधेर नहीं है'। हमेशा सत्य की जीत होती है।

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