हर साल 14 जनवरी को ही क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति, जानिए राशि चक्र का पूरा 'समीकरण'

Reason for Makar Sankranti celebrated every year on 14 January - Sakshi Samachar

सूर्य पंचांग में 365.25 दिन होते हैं

चंद्र पंचांग में 354 दिन होते हैं

सूर्य और चंद्र पंचांगों में 11.25 दिनों का फर्क होता है

हैदराबाद : हिंदू पंचांग ( Hindu Panchang) के अनुसार मकर संक्रांति (Makar Sankranti) माघ (Magh) महीने में मनाई जाती है। इस दिन भगवान सूर्य (Sun) की उपासना की जाती है। ग्रह की स्थिति के मुताबिक सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही ठंड का मौसम (Winter) का असर कम होने लगता है। रात (Night)की समायवधि  कम होने लगती जाती है और दिन (Day) की समयावधि बढ़ने लगती है। 

मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को मनाई जाती है। अन्य भारतीय त्यौहार चंद्र की परिक्रमा पर आधारित होते हैं। चंद्र की परिक्रमा अमावस्या से लेकर पूर्णिमा तक की होती है। इसके लिए 29.5 का समय लगता है। सालभर में 12 पूर्णिमा और 354 दिन होते हैं। चंद्र पंचांग के मुताबिक एक साल 354 दिनों का बनता है, जबकि सूर्य एक साल बाद इस दिन मकर राशि में प्रवेश करता है और इसके लिए 365.25 दिनों का समय लगता है। ग्रहों में सूर्य और चंद्रमा की स्थिति पर आधारित कैलेंडर में 11.25 दिनों का फर्क होता है। हर 2.5 साल के बाद अधिक मास को जोड़ा जाता है। 

यह बहुत ही महत्वपूर्ण या निर्णायक होता है कि मौसम में होने वाले बदलाव सूर्य पंचांग पर आधारित होता ना कि चंद्र के ग्रहों में मौजूदा स्थिति यानी चंद्र पंचांग पर। मुहूर्त को सही बताने के लिए कैलकुलेशन चंद्र पंचांग से सूर्य पंचाग पर ही निर्भर होता है। चंद्र की स्थिति सूर्य की स्थिति से थोड़ा अलग होती है। जहां चंद्र की परिक्रमा 27 नक्षत्रों में विभाजित की  जाती है वहीं सूर्य की स्थिति को 12 राशियों में विभाजित किया जाता है। 

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सूर्य पंचांग चंद्र पंचांग के मुकाबले काफी सटीक माना जाता है। इस पंचांग में 365 दिन में सिर्फ 0.25 दिन का अंतर होता है। सही मायने में यह 365.26 दिन होता है। इसलिए लीप वर्ष के फरवरी में 29 दिन होते हैं। आपको बता दें कि जो साल 00 से समाप्त होता हो वह साल लीप वर्ष नहीं होता है। इसीलिए सूर्य पंचांग सही माना जाता है। 

आपको बता दें कि एक दिन की खामी को पूरा करने के लिए सूर्य को अलग-अलग राशि चक्रों में देखा जा सकता है। भारतीय पंचांग के मुताबिक इस खामी को पूरा करते हुए लीप वर्ष में एक दिन मिलाया जाता है। सूर्य की स्थिति को एक साल में 12 राशि चक्रों में विभाजित किया गया है। इससे राशि चक्र का काफी महत्व है। 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता  है और इसीलिए 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाती है।

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