GHMC Election 2020: गोमाता के गले में NOTA पर बटन दबाने की अपील वाली तख्ती क्यों?

Hyderabad Yuga Tulasi Foundation appeal for NOTA in GHMC Elections 2020 save Cow - Sakshi Samachar

गोहत्या के खिलाफ हैदराबाद में अनूठा विरोध

GHMC चुनाव में नोटा का बटन दबाने पर जोर

हैदराबाद: महानगर में GHMC चुनावों  (GHMC Elections) के बीच गाय के गले में 'नोटा' (NOTA) की तख्ती लगी फोटो खूब शेयर की जा रही है। साथ ही ये संदेश भी दिया जा रहा है कि तेलंगाना में गोहत्या पर पूरी तरह पाबंदी लगाई जाय। साथ ही सवाल खड़े किये जा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की तर्ज पर इस बार राजनीतिक पार्टियां गोहत्या (Cow slaughter) को मुद्दा क्यों नहीं बना रही है? इस अभियान को हैदराबाद  (Hyderabad) की धार्मिक स्वयंसेवी संस्था 'युग तुलसी फाउंडेशन' (Yuga Tulasi Foundation) का पूरा सपोर्ट मिल रहा है। फाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष कोलिशेट्टी शिवकुमार ने बताया की उनकी मुहिम गोमाता की रक्षा को लेकर है। जबकि उनका किसी भी पार्टी से न कोई लेना देना है, और न ही विरोध है। के. शिवकुमार लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि गो हत्या पर पाबंदी और गौ माता की रक्षा को लेकर अगर कोई सियासी पार्टी अपना रुख स्पष्ट नहीं करती हैं तो नोटा (NOTA) को ही वोट दें। शिवकुमार की मुहिम का असर भी बड़ी संख्या में लोगों पर होने लगा है। 

युग तुलसी फाउंडेशन के कार्यकारी सदस्य चंद्रास्वामी राजगोपाल जोर देकर मांग करते हैं कि GHMC चुनाव में गौ रक्षा बकायदा मुद्दा बने, और राजनीतिक पार्टियां इस बारे में अपना रुख स्पष्ट करें। अगर ऐसा नहीं होता है तो GHMC चुनाव में उनकी NOTA की मुहिम जारी रहेगी। हालांकि फाउंडेशन की तरफ से स्पष्ट तौर पर किसी भी पार्टी का नाम नहीं लिया गया। गौर करने वाली बात है कि गौ रक्षा का दम भरने वाली बीजेपी भी इस मुद्दे पर खामोश है। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि इस संवेदनशील मुद्दे को छेड़ने पर बीजेपी को हैदराबाद निकाय चुनाव में नुकसान हो सकता है। हालांकि आने वाले वर्षों में विधानसभा या फिर लोकसभा चुनावों में पार्टी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर सकती है।


कोलिशेट्टी शिवकुमार, अध्यक्ष, युग तुलसी फाउंडेशन

गोहत्या को लेकर तेलंगाना में क्या है कानून?

गोहत्या को लेकर तेलंगाना में प्रोहिबिशन ऑफ काउ स्लॉटर एंड एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट 1977 लागू है। एकीकृत आंध्र प्रदेश के जमाने से ही ये कानून प्रभावी है, जिसके तहत गायों की हत्या को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। बावजूद इसके बैल या फिर बछड़े को काटने पर सख्त पाबंदी नहीं है। हैदराबाद के पुराने शहर के कई इलाकों में चोरी छिपे गोमांस बेचे और खरीदे जाते हैं। वजह ये कि राज्य में गोहत्या के दोषियों के खिलाफ काफी कम सजा का प्रावधान है। तेलंगाना में कानून के मुताबिक अगर सरकारी अथॉरिटी ये सर्टिफिकेट दे दे कि जानवर अब आर्थिक तौर पर या फिर प्रजनन के लिए उपयोगी नहीं है, तो उसे काटा जा सकता है। कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए महज छह महीने की जेल या फिर 1 हजार रुपए का जुर्माना निर्धारित किया गया है। तेलंगाना में गोरक्षा की मुहिम से जुड़े लोग बताते हैं कि यहां गायों के वध को लेकर पुराना कानून लागू है और उसे और दुरुस्त करने की जरूरत है। तेलंगाना की ही तरह यही कानून आंध्र प्रदेश में भी लागू है। 

गोरक्षा के लिए 25 नबंबर से 31 दिसंबर तक कार्यक्रम 

गोरक्षा के काम में जुटे युग तुलसी फाउंडेशन के प्रमुख कोलिशेट्टी शिवकुमार ने बड़े कार्यक्रम का एलान किया है। जिसके तहत आगामी 25 नवंबर से 31 दिसंबर के बीच संस्था के लोग और गोरक्षा के हिमायती बड़ी संख्या में श्रद्धालु आंध्र और तेलंगाना के प्रमुख मंदिरों का दौरा करेंगे और गौमाता की तरफ से भगवान को रक्षा के लिए विनति पत्र सौंपी जाएगी। इनमें शामिल सरस्वती मंदिर बासरा, श्री अंजनेय स्वामी मंदिर कोडागट्टू, राज राजेश्वर स्वामी मंदिर वेमुलवाडा, भद्रकाली मंदिर वारंगल, हजार स्तंभ मंदिर, रामप्पा मंदिर, श्रीसीताराम मंदिर भद्राचलम, सोमेश्वर मंदिर पालगन, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम जैसे प्रमुख धर्मस्थलों तक यात्रा की जाएगी। इस दौरान मंदिर के प्रमुख पुजारी के हाथों भगवान को गौ माता की तरफ से रक्षा के लिए विनति पत्र सौंपी जाएगी। कार्यक्रम का समापन आगामी 31 दिसंबर को प्रसिद्ध तिरुमला-तिरुपति बालाजी मंदिर में होगा। 


कोलिशेट्टी शिवकुमार, अध्यक्ष, युग तुलसी फाउंडेशन

गुजरात में गोवंश की हत्या पर बेहद सख्त कानून?

पीएम नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में गोवंश की हत्या पर सख्त पाबंदी है। गुजरात में पशु संरक्षण संशोधन विधेयक 2017 लागू होने के बाद गोहत्‍या के दोषियों को उम्रक़ैद तक की सजा का प्रावधान है। इस तरह के मामले में दोषी को कम से कम 10 साल की जेल हो सकती है। यहां तक कि किसी के पास गोमांस मिलता है, तो उसे भी 7 से 10 साल तक की सजा हो सकती है। अगर कोई शख्स गाय के मांस के साथ पकड़ा जाता है तो उसे गैरजमानती अपराध माना जाएगा। अगर गोमांस का परिवहन करते हुए कोई गाड़ी पकड़ में आती है तो उसे हमेशा के लिए सरकार जब्त कर सकती है। 

गोहत्या के खिलाफ यूपी में योगी सरकार का कदम 

यूपी की योगी सरकार ने Uttar Pradesh Prohibition of Cow Slaughter Act, 1955 को और सख्त करने का मन बनाया है। उत्तर प्रदेश गोवध निवारण क़ानून, 1955 में संशोधन का प्रस्ताव देते हुए सरकार ने दोषी के लिए 10 साल तक की सजा के अध्यादेश को मंजूरी दी है। ऑर्डिनेंस के कानूनी रूप लेने के बाद उत्तर प्रदेश में गौ हत्या के दोषियों को 10 साल की सजा के अलावा तीन से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं गोवंश के अंग-भंग करने की स्थिति में सात साल की जेल और तीन लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है। अगर किसी भी शख्स पर दोबारा गोकशी का आरोप साबित हो जाय तो उसकी सजा दोगुनी हो सकती है। सरकार ने सख्ती दिखाते हुए मामले में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और संपत्ति जब्ती का भी प्रावधान रखा है। 


कोलिशेट्टी शिवकुमार, अध्यक्ष, युग तुलसी फाउंडेशन

किन राज्यों में गो हत्या को लेकर है पाबंदी?  

उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली, ओडिशा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पुडुचेरी में गोहत्या पर पाबंदी लागू है। जबकि असम और पश्चिम बंगाल में कानून के तहत उन पशुओं को काटा जा सकता है, जिन्हें ‘फिट फॉर स्लॉटर सर्टिफिकेट’ जारी किया गया हो। अमूमन 14 साल की उम्र पार कर चुके पशुओं को इस तरह के सर्टिफिकेट जारी कर दिये जाते हैं। अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में गोवंश की हत्या को लेकर कोई कानून है ही नहीं। वहीं मणिपुर में गोवंश की हत्या पर आंशिक तौर पर पाबंदी है। देश के बड़े हिस्से से गायों को राष्ट्रीय पशु घोषित कर इनके वध को देशव्यापी प्रतिबंधित करने की मांग उठने लगी है। 
 

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