एयरटाइट ग्लास से निकलकर नाइट्रोजन चैंबर पहुंची मिस्र की यह Mummy

Egyptian Mummy arrived in the Nitrogen Chamber from Airtight Glass - Sakshi Samachar

राजकुमारी की ममी ज्यादा सुरक्षित

फिलहाल बेहतर हालत में है ममी

जर्मनी से मंगाए गए शीशे

हैदराबादः तेलंगाना राज्य (Telangana State) के विधानसभा परिसर में मौजूद है तेलंगाना राज्य संग्रहालय (Telangana State Museum), जो पहले आंध्र प्रदेश राज्य संग्रहालय (Andhra Pradesh State Museum) के नाम से जाना जाता था। वर्षों से इस संग्रहालय की पहचान बनी है मिस्र से लाई गई वह ममी (Egyptian Mummy), जो हैदराबाद (Hyderabad) के अंतिम निजाम (Last Nizam) को भेंट की गई थी। वर्षों से इस ममी (Mummy) को पूरी तरह से सुरक्षित रखने की कोशिश लगातार जारी है।

एक एयरटाइट ग्लास (Air Tight Glass) से मिस्र की यह ममी अब नाइट्रोजन चैंबर (Nitrogen chamber) में पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर हैदराबाद में मौजूद मिस्र की इस ममी को अब और भी ज्यादा समय तक संभालकर रखा जा सकेगा।

बता दें कि 300 बीसी से 100 बीसी के बीच मिस्र में राज करने वाले टाॅलेमी वंश (Ptolemaic Period) की राजकुमारी निशुशु (Princess Nishuhu’s Mummy) की यह ममी तेलंगाना राज्य के पुरातत्व संग्रहालय सार्वजनिक पार्क (Telangana State Archaeology Museum at the Public Gardens) में एक नाइट्रोजन चैंबर में आज भी सुरक्षित रखा गया है।

टाॅलेमी वंश

बता दें कि टाॅलेमी वंश मिस्र में सिकंदर की मृत्यु के बाद क्लियोपत्रा के समय तक राज्य करने वाल उस काल का प्रसिद्ध गणित-ज्योतिषी था।

म्यूजियम के सह निर्देशक गंगा देवी और ममी के चीफ इंचार्ज ने कहा, "जब से यह ममी हैदराबाद लाया गया था, तभी से इसे एक वुडन बाॅक्स में सहेज कर रखा गया था। जबकि इस दौरान ममी के कपड़े को सिर के चारों ओर से अलग कर दिया और समग्र रूप से उसे ढक दिया।"

कला और विरासत संरक्षण

वहीं, कुछ साल पहले जाने माने कला और विरासत संरक्षण विशेषज्ञ अनुपम साह (Renowned Art and Heritage conservation Expert Anupam Sah) ने इस ममी को रीस्टोर करने में हमारी मदद की। फिलहाल अब इस ममी को ऑक्सीकरण मुक्त वातावरण (oxidation-free environment) में रखा गया है।

जर्मनी से मंगाए गए शीशे

जिस शोकेस में अब हमने इस ममी को रखा है, नीचे की ओर से उसे नाइट्रोजन बाॅक्स के साथ जोड़ दिया गया है, जो ममी को 24x7 घंटे नाइट्रोजन भेजता है और ऑक्सीजन बाहर फेंकता है। यह ममी को नुकसान पहुंचने या उसकी उम्र कम करने से इसे बचाता है। ममी को रखने के लिए जर्मनी से मंगाए गए शीशे का प्रयोग किया गया है।

नाइट्रोजन बाॅक्स के अलावा ममी के कवर को नुकसान से बचाने के लिए एक सुरक्षित लेयर को इस पर लगा दिया गया था। इस दौरान विशेषज्ञों ने इस बात का पूरा पूरा ख्याल रखा कि इसका रंग ममी से मेल खाता हुआ हो।

अस्पताल में स्कैनिंग

गंगा देवी ने ममी की स्थिति पर बातचीत करते हुए कहा, ममी को सुरक्षित ढंग से संजोकर रखने के लिए मुंबई से जब विशेषज्ञ यहां पहुंचे तो हम उन्हें नामपल्ली के एक अस्पताल में स्कैनिंग के लिए ले गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, ममी की पसलियां (Skull) डैमेज हो चुकी थीं और स्पाइन और एंकल (Spine and Ankle) भी अपनी जगह से डिस्लोकेट हो गई थीं। जबकि खोपड़ी समेत अन्य हिस्से सही सलामत थे। सीटी स्कैन (CT Scan) में यह बात सामने आई कि उसके मस्तिष्क का कुछ हिस्सा भी सही सलामत था।

सामान्यतः ममीकरण (Mummification) के दौरान, मस्तिष्क को नाक के मार्ग से निकाला जाता है।

फिलहाल बेहतर हालत में है ममी

गंगा देवी ने आगे कहा कि फिलहाल ममी बेहतर हालत में है और अगले कुछ दशक तक इसे फिर से रीस्टोर करने की जरूरत नहीं होगी। पहले इसके पैर की अंगुली और खोपड़ी बाहर आ गई थी और ममी बाहरी हवा के सीधे संपर्क में आ गई थी, जिसकी वजह से इसकी स्थिति खराब होती जा रही थी।

जबकि विशेषज्ञों की देखरेख में अब हमने ममी को सावधानी पूर्वक पूरी तरह से ढक दिया है। अब यह कम से कम अगले दो दशकों तक सुरक्षित रहेगा, लेकिन मैं मानती हूं कि 20 से 25 सालों बाद भी यह बेहतर स्थिति में होगी।

राजकुमारी की ममी ज्यादा सुरक्षित

मैं इतना जरूर कह सकती हूं कि मिस्र से देश में पहुंचे अन्य छह ममियों की तुलना में राजकुमारी निशुशु की यह ममी कहीं ज्यादा बेहतर ढंग से और सुरक्षित रखा गया है। इसी बीच पिछले आठ महीनों से कोरोना महामारी की वजह से संग्रहालय पहुंचने वाले लोगों की संख्या में लाॅकडाउन के बाद अब इजाफा हो रहा है।

म्यूजियम के सह निदेशक मल्लु नायक (Mallu Naik, Assistant Director of the museum) कहते हैं, पहले लगभग 200 से 300 विजिटर्स प्रतिदिन हमारे यहां पहुंचते थे, जबकि रविवार के दिन इनकी संख्या 400 तक होती थी।

विजिटर्स की संख्या

कोरोना महामारी और लाॅकडाउन के बाद शुरुआत में जब हमने म्यूजियम रीओपन किया था, हमारे यहां एक भी विजिटर नहीं पहुंच रहे थे, लेकिन अब यहां पहुंचने वालों की संख्या 50 से 60 तक हो गई है। हमें उम्मीद है कि ममी की सुरक्षा को लेकर उसमें किए गए बदलाव के बाद अब यहां पहुँचने वाले विजिटर्स की संख्या में पहले से कहीं ज्यादा इजाफा होगा।

बता दें कि यह ममी हैदराबाद के अंतिम निजाम को गिफ्ट की गई थी।

ममी के बदले में दिए 1000 ब्रिटिश पाउंड

कहते हैं कि तकरीबन 2100 से 2400 साल पहले साल 1920 में राजकुमारी निशुशु की यह ममी नजीर नवाज जंग ने हैदराबाद के अंतिम निजाम ओसमान अली खान (Nizam Osman Ali Khan by Nazeer Nawaz Jung) को भेंट की थी। नवाब ने इस ममी के बदले में उन्हें 1000 ब्रिटिश पाउंड दिए थे।

हैदराबाद के निज़ाम मीर महबूब अली खान के दामाद नज़ीर नवाज़ जंग ने राजकुमारी की ममी को मिस्र में खरीदा था। हालांकि उन्होंने इसे किसी निजी कलेक्टर से ख़रीदा था या म्यूज़ियम से, ये साफ़ नहीं है। माना जाता है कि इस ममी को खरीदने के लिए उन्होंने एक हज़ार ब्रिटिश पाउंड से ज्यादा खर्च किए थे।

मुंबई के 'प्रिंस ऑफ वेल्स संग्रहालय' को कर दिया दान

नज़ीर नवाज़ जंग ने इस ममी को अगले निज़ाम मीर ओस्मान अली खान को तोहफ़े में दिया, जिन्होंने इसे मुंबई के 'प्रिंस ऑफ वेल्स संग्रहालय' को दान कर दिया। तब से यह ममी कांच के ताबूत में रखी हुई थी।  भारत में मौजूद छह प्रामाणिक मिस्र की ममियों में से नाएशू अकेली ऐसी ममी है, जो दक्षिण भारत में मौजूद है।

पहले यह माना जाता था कि निशुशु की मौत 18 साल की उम्र में हुई थी जब वो गर्भवती थीं। लेकिन बाद में संग्रहालय की ओर से किए गए मेडिकल और दूसरे टेस्ट में पता चला कि उनकी उम्र करीब 25 साल थी। साह के मुताबिक मिस्र की ज़्यादातर ममियों में मस्तिष्क का कोई हिस्सा नहीं होता है लेकिन इस ममी में दिमाग के कुछ हिस्से सही सलामत थे।

ममी को ठीक करने की प्रक्रिया जटिल होती चली गई

उन दिनों विशेषज्ञों की टीम नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाले उपकरण और प्रक्रियाओं से ममी की मरम्मत नहीं कर सकते थे और यही इसे पेचीदा बना रही थी। साह के मुताबिक ममी को ठीक करने की प्रक्रिया जटिल होती चली गई क्योंकि जांच की सामान्य प्रक्रिया, ट्रीटमेंट का तरीका, इंफ्रा-रेड और अल्ट्रा वायलेट किरणों और रंग का विश्लेषण करने के लिए स्पेक्ट्रोमीटर के तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता था।

उन दिनों साह ने बताया था, "हमें ममी को रूई की परतों में लपेटकर जांच केंद्र ले जाना पड़ा। वहां हमने इसकी हड्डियों का एक्स-रे और सीटी स्कैन करवाया। इस काम में बेहद सावधानी बरतनी पड़ी। धूप कड़ी होने से पहले हम इसे वापस भी ले आए। स्कैन और एक्स-रे रिपोर्ट ने वैसे तो ममी को 'फिट' बताया लेकिन अभी भी ममी को कुछ कॉस्मेटिक सुरक्षा की ज़रूरत थी।"

टॉलेमी VI फिलोम की बेटी रही होंगी निशुशु

यह अनुमान लगाया जाता है कि निशुशु टॉलेमी VI फिलोम की बेटी रही होंगी। वह लगभग 25 साल की थीं, जब उनकी मौत हो गई थी।

बुरी ताकतों से बचाने वाला धातु का टुकड़ा

ममी के स्कैन से यह भी खुलासा हुआ कि ममी को सुरक्षित रखने के लिए मिस्र की परंपरा के अनुसार उसमें एक धातु का टुकड़ा डाला गया था। मिस्र की मान्यता के अनुसार बुरी अलौकिक ताकतों से सुरक्षा के लिए ममियों के साथ धातु का यह टुकड़ा रखा गया था। ममी की स्कैनिंग के बाद एक ताबीज भी सामने आया, उसे भी बुरी ताकतों से बचाव के लिए ही मुंय क साथ जोड़ा गया था। हालांकि इन सब के बीच स्कैनिंग से भी अधिकारियों को पूरी तरह से यह पता नहीं चल पाया कि राजकुमारी की मौत के पीछे वजह क्या थी?

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