साक्षी समाचार पोल: सोशल मीडिया की असली ताकत मदद करना है या फिर दूसरों को दिन भर ट्रोल करना?

Sakshi Samachar poll on Social Media Effect

हैदराबाद: हमने इस बार आम लोगों से सोशल मीडिया के मिजाज के बारे में सवाल किया। पूछा गया कि सोशल मीडिया का मकसद नकारात्मक चीजों को लेकर ट्रोल करना है या फिर दूसरों की मदद करना। अधिसंख्य लोगों ने माना कि सोशल मीडिया के जरिए प्रभावी तरीके से किसी की मदद की जा सकती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण दिल्ली के बाबा का ढाबा मामला है।

क्या है बाबा का ढाबा मामला

दरअसल दिल्ली के एक हिस्से में अस्सी वर्षीय बुजुर्ग अपनी पत्नी के साथ तीस सालों से बाबा का ढाबा चलाते थे। कोरोना संक्रमण के इस काल ने इनके बिजनेस को भी प्रभावित किया। एक शख्स जब इनकी दुकान पर पहुंचा तो ये फफक पड़े। 80 वर्षीय बुजुर्ग ने रोते हुए कहा कि बीते चार घंटे से महज पचास रुपए का बिजनेस हुआ है। अब तो मेहनत के बावजूद पेट पालना भी मुश्किल है। शख्स ने बाबा का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। फिर क्या था बड़ी बड़ी हस्तियों ने सांत्वना देते हुए मदद का भरोसा दिलाया। एक्ट्रेस रवीना टंडन ने तो कहा कि जो भी आज बाबा के ढाबे पर जाकर खाना खाएगा और तस्वीर पोस्ट करेगा उसको वे प्यारा सा मैसेज पोस्ट करेंगी।

 

बाबा का ढाबा सोशल मीडिया के दम पर चल निकला और भीड़ लग गई। रोते हुए बाबा के चेहरे पर मुस्कुराहट तैर गई।  बाबा की हंसी ने लोगों को सोचने पर मजबूर किया कि सोशल मीडिया पर लफ्फाजी और ट्रोल के सिवा और भी कुछ किया जा सकता है। 

सोशल मीडिया आज हमारे जीवन में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। एक बटन दबाने पर ही हमारे पास अत्यंत विस्तृत संबंधित सकारात्मक और नकारात्मक किसी भी प्रकार की जानकारी पहुंच जा रही है। सोशल मीडिया एक बहुत ही सशक्त माध्यम है और इसका प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति पर पड़ता है। सोशल मीडिया के बिना हमारे जीवन की कल्पना करना मुश्किल है, परन्तु इसके अत्यधिक उपयोग के वजह से हमे इसकी  कीमत भी चुकानी पड़ती हैं। समाज पर सोशल मीडिया के प्रभावों के बारे में बहुत सारे तर्क-वितर्क प्रस्तुत किये गये है, कुछ लोगों का मानना है कि यह एक वरदान है। जबकि अन्य महसूस करते हैं कि यह एक अभिशाप है।

सोशल मीडिया के जरिए क्रांतिकारी परिवर्तन 

सोशल मीडिया की ताकत को राजनीतिक दल भी समझने लगे हैं। लिहाजा हर पार्टी ने अलग से सोशल मीडिया सेल बना रखा है। जिसके जरिए राजनीतिक कार्यकर्ता अपना उल्लू सीधा करने में जुटे होते हैं। आम लोगों को इससे बचने और इनकी मंशा को समझने की जरूरत है। इसके अलावा सोशल मीडिया के जरिए प्रोडक्ट और सर्विसेस की मार्केटिंक का भी चलन है। वक्त के साथ हमें समझना होगा कि कोई अन्य शख्स हमें सोशल मीडिया के जरिए इस्तेमाल कर रहा है। 

सोशल मीडिया के फायदे

आसानी से सोशल मीडिया के जरिए जानकारी और समाचार हासिल किये जा सकते हैं। सेंसरशिप की कोई खास चिंता नहीं होती है। सामाजिक जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग अच्छा माध्यम है। इच्छुक नौकरी तलाशने वालों को भी इसकी मदद से कई बार काम मिल जाता है। व्यक्तियों को बिना किसी हिचकिचाहट के दुनिया के साथ सामाजिक विकास और बातचीत करने में मदद मिलती है। यहां तक कि आप दूसरे मुल्कों के लोगों के साथ सीधे तौर पर जुड़ पाते हैं। 

सोशल मीडिया के नकारात्मक असर

निगेटिव असर की बात करते तो सोशल मीडिया कई मायनों में घातक भी है। धोखाधड़ी के कई किस्से सोशल मीडिया से जुड़े आये दिन सुने जाते हैं। सोशल मीडिया पर कई बार लोग निगेटिव बोलते बोलते आपस में झगड़ पड़ते हैं। बच्चों में खराब मानसिक विकास भी सोशल मीडिया के चलते हो सकता है। लिहाजा बच्चों को इससे दूर ही रखें। सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल करने से नींद पर असर पड़ता है लोग अवसाद के शिकार हो सकते हैं। साइबर बुलिंग, छवि खराब करना और कई बाकी तरीकों से सोशल मीडिया का गैरवाजिब इस्तेमाल होताह है। 
 

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