जन्मदिन विशेष : 'अटल-आडवाणी' के बाद राजनाथ सिंह के नाम दर्ज है यह खास रिकॉर्ड

Rajnath Singh Birthday Know About Political Journey of Rajnath Singh - Sakshi Samachar

राजनाथ सिंह का जन्म 10 जुलाई 1951 को हुआ था

संघ के 'दुलारे' और पार्टी के कद्दावार नेताओं में शुमार हैं राजनाथ

13 साल की उम्र से ही संघ से जुड़े और लगातार करते रहे पार्टी की सेवा

नई दिल्ली : केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सत्ता का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। भारतीय जनता पार्टी में जब 'अटल-आडवाणी' की जोड़ी थी, उस वक्त भी उनका रसूख था और आज जब मोदी-शाह की जोड़ी केंद्र में है तो अभी भी उनका कद काफी बड़ा है। राजनीतिक गलियारे में यह बात प्रचलित है कि राजनाथ सिंह पार्टी में एक ऐसे पुल की भूमिका निभा रहे हैं, जो पुराने जनसंघी को आज की भाजपा से जोड़े हुए हैं। राजनाथ सिंह का आज जन्मदिन है। आइए जानते हैं उनके राजनीतिक सफर के दिलचस्प किस्सों के बारे में।

भाजपा के कद्दावर नेता और संघ के 'दुलारे' कहे जाने वाले राजनाथ सिंह का जन्म 10 जुलाई 1951 को वाराणसी (वर्तमान में चंदौली जिला) के भाभोरा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम राम बदन सिंह था। वह साधारण किसान परिवार से आते हैं। राजनाथ सिंह पढ़ने में काफी होशियार थे। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से भौतिक शास्त्र में डिग्री ली और मिर्जापुर जिले में फिजिक्स के लेक्चरर बन गए।

13 साल की उम्र से संघ से जुड़े

राजनाथ सिंह ने महज 13 साल की उम्र में आरएसएस ज्वाइन कर ली थी। नौकरी करते हुए भी वह लगातार संघ से जुड़े रहे। 1974 में उन्हें भारतीय जनसंघ का सचिव नियुक्त किया गया। वह भारतीय जनता पार्टी के युवा संघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 

भाजपा अध्यक्ष बनने का दिलचस्प किस्सा

आज भी पुराने राजनीतिक पंडित राजनाथ सिंह के पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का किस्सा काफी मजे से सुनाते हैं। दरअसल, भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी अपनी पाकिस्तान दौरे के दौरान जिन्ना के मजार पर गये और उस वक्त उन्होंने उन्हें धर्म निरपेक्ष बता दिया था। उसके बाद भारत में उनके इस बयान की काफी आलोचना हुई। उसी वक्त यह तय हो गया था कि अब लालकृष्ण आडवाणी को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है।

लालकृष्ण आडवाणी जब भारत वापस लौटे तो हुआ भी ऐसा। संघ के भारी दबाव के बाद उन्हें इस्तीफा सौंपना पड़ा। इसके बाद फिर भाजपा अध्यक्ष बनाने की बारी आई, तो संघ और भाजपा में राजनाथ सिंह की अच्छी पहुंच को देखते हुए उन्हें भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। इस तरह राजनाथ सिंह पहली बार 31 दिसंबर, 2005 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। 'अटल-आडवाणी' की जोड़ी में पहली बार इस तरह राजनाथ सिंह की एंट्री हुई।

अटल-आडवाणी के बाद राजनाथ के नाम दर्ज है खास रिकॉर्ड

राजनाथ सिंह दो बार पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं। इससे पहले यह उप‍लब्धि केवल अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्‍ण आडवाणी के पास ही थी। राजनाथ सिंह पहली बार 31 दिसंबर, 2005 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। दूसरी बार जनवरी 23, 2013 से जुलाई 09, 2014 तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।

राजनाथ सिंह का सियासी सफर

राजनाथ सिंह की पकड़ क्षेत्रीय स्तर पर काफी थी। उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रमुख चेहरों में हमेशा गिने जाते रहे हैं। 1991 में जब उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तब राजनाथ सिंह को शिक्षा मंत्री बनाया गया। उनका नकल के खिलाफ छेड़ा गया अभियान आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। साल 2000 से 2002 तक वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे।

वह तीन बार विधायक भी रह चुके हैं। राजनाथ सिंह 1994 से 1999 के दौरान राज्यसभा सांसद के रूप में चुने गये थे। 1999 से 2000 में वह केंद्रीय मंत्री भी रहे। फिर 2003 से 2008 तक दूसरे टर्म के लिए राज्य सभा सदस्य के रूप में दोबारा चुने गये। इसके बाद राजनाथ सिंह 2009 से अभी तक लगातार सांसद हैं। वह मोदी सरकार के पहले पांच साल केंद्रीय गृह मंत्री रहे। 2019 के लोकसभा चुनाव में लखनऊ से सांसद बनने के बाद उन्हें रक्षा मंत्री का पदभार सौंपा गया है।

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