पी. चिदंबरम : केंद्रीय मंत्री से तिहाड़ जेल तक का ऐसा रहा सफर

P Chidambaram Birthday Know About Chidambaram Political Journey - Sakshi Samachar

चिदंबरम का जन्म 16 सितम्बर 1945 को तमिलनाडु में हुआ था

यूपीए सरकार में वित्त मंत्री और गृह मंत्री के तौर पर निभाई थी जिम्मेदारी

भ्रष्टाचार के मामले में 21 अगस्त 2019 को सीबीआई ने घर से किया था गिरफ्तार

नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम अपनी राजनीतिक सूझबूझ और समझ से पार्टी पर आए संकट पर कई बार 'संकटमोचक' की भूमिका निभा चुके हैं। पी. चिदंबरम बुधवार को अपना 75वां जन्मदिन मनाएंगे। उनका जन्म 16 सितम्बर 1945 को तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में हुआ था। चिदंबरम ने राजनीति करियर में काफी उतार-चढ़ाव देखे। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से तिहाड़ जेल तक का सफर भी देखा है। आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें।

चिदंबरम का पूरा नाम पलानीअप्पन चिदंबरम है। कांग्रेस में चिदंबरम की छवि एक मंझे हुए राजनेता एवं कुशल रणनीतिकार की है, जिन्होंने मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए-1 और यूपीए-2 में अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाई।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से ली डिग्री

पी. चिदंबरम ने आरंभिक शिक्षा मद्रास क्रिश्चियन सेकेंडरी स्कूल, चेन्नई से पूरी करने के बाद प्रेसिडेंसी कॉलेज, चेन्नई से विज्ञान में सांख्यिकी विषय के साथ ग्रेजुएशन किया। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, बोस्टन में दाखिला लिया। यहां से पी. चिदंबरम ने व्यवसाय प्रबंधन में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

वकालत के तौर पर चुना करियर

पी. चिदंबरम ने अपने करियर की शुरुआत चेन्नई हाईकोर्ट में वकालत से की। वर्ष 1984 में वह वरिष्ठ वकील के तौर पर नामित हुए। दिल्ली और चेन्नई के हाईकोर्ट में पी. चिदंबरम के चैंबर भी हैं। चिदंबरम सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस कर चुके हैं और कई अहम मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने के लिए हाजिर भी होते हैं। चिदंबरम के कानूनी ज्ञान का लोहा दूसरी पार्टी के नेता भी मानते हैं।

चिदंबरम का राजनीतिक सफर

पी. चिदंबरम ने अपना राजनीतिक सफर साल 1972 में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की सदस्यता ग्रहण करने के साथ की। स्थानीय तौर पर चिदंबरम ने बहुत जल्दी अपनी पहचान बना ली। इस वजह से उन्हें 1973 में तमिलनाडु में युवा कांग्रेस अध्यक्ष और तमिलनाडु कांग्रेस प्रदेश समिति के महासचिव का पद संभालने का मौका मिला था।

चिदंबरम ने अपना पहला लोकसभा चुनाव साल 1984 में तमिलनाडु के शिवगंगा निर्वाचन क्षेत्र से लड़ा और जीता। वह लगातार 6 बार इस सीट से सांसद रहे। चिदंबरम का कद समय के साथ पार्टी में बढ़ता गया। उन्होंने राजीव गांधी सरकार में कार्मिक मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय में उप-मंत्री के तौर पर कार्य किया। वर्ष 1991 में पी. चिदंबरम को राज्य मंत्री के पद पर वाणिज्य मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभारी बनाया गया। वर्ष 1995 में वह दोबारा इस पद पर आसीन हुए।

साल 2004 में जब कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई तो मनमोहन सरकार में पी. चिदंबरम को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली। हालांकि साल 2008 में दिल्ली में हुए आतंकवादी हमले के बाद तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल के इस्तीफा दिए जाने के बाद पी. चिदंबरम को गृह मंत्री बनाया गया।  चिदंबरम अब तक लोकसभा में 7 बजट प्रस्तुत कर चुके हैं, जिसमें संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन में वित्त मंत्री के नाते उन्होंने 5 बजट प्रस्तुत किए हैं।

आईएनएक्स मीडिया मामले में गए जेल

चिदंबरम यूपीए-1 के दौरान वित्त मंत्री थे, तब आईएनएक्स नाम की एक मीडिया कंपनी को 305 करोड़ रुपये के विदेशी निवेश की अनुमति की आवश्यकता थी। तब फॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड को यह अनुमति देनी पड़ी.।कथित तौर पर कंपनी ने अनुमति के बगैर ही निवेश किया। आईएनएक्स कंपनी के मालिक थे इंद्राणी और पीटर मुखर्जी।

बेटी शीना बोरा की हत्या के मामले में जेल में बंद इंद्राणी मुखर्जी ने इस बात को स्वीकार किया कि कानूनी दांवपेच से बचने के लिए उन्होंने पी. चिदंबरम को रिश्वत दी थी। चिदंबरम के खिलाफ 2006 के एयरसेल मैक्सिस सौदे में भी घोटाले के आरोप थे। सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में 21 अगस्त 2019 को उनके घर से गिरफ्तार किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 22 अक्टूबर को चिदंबरम को जमानत दे दी थी मगर उसी दौरान ईडी ने उन्‍हें 16 अक्टूबर को अपनी हिरासत में ले लिया था। 

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