Madhavrao Scindia : जीवित रहते तो प्रधानमंत्री बन सकते थे माधवराव सिंधिया

Madhavrao Scindia Political Journey - Sakshi Samachar

माधवराव सिंधिया का निधन 30 सितंबर 2001 को हुआ था

सिंधिया ने जनसंघ से शुरू किया सफर और बाद में कांग्रेस हो गए थे शामिल

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को ग्वालियर से हराया था चुनाव

नई दिल्ली : राजनीति में कई ऐसी शख्सियत होती हैं, जो पार्टी से ऊपर मानी जाती हैं। उन्हीं में  से एक थे माधवराव सिंधिया। जिन्होंने जनसंघ में रहकर अपना पहला चुनाव जीता, उसके बाद कांग्रेस में शामिल होकर अपने सभी चुनाव जीते और यहां तक कांग्रेस से अलग होकर निर्दलीय भी रिकॉर्ड मत से विजयी हुए। माधवराव सिंधिया का व्यक्तित्व ऐसा था कि उन्हें हर कोई पसंद करता था। 30 सितंबर को माधवरा सिंधिया का निधन हुआ था। उनकी पुण्यतिथि पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।

माधवराव सिंधिया देश के उन करिश्माई नेताओं में शुमार थे, जिन्हें जनता बेहद पसंद करती थी। क्रिकेट, गोल्फ, घुड़सवारी का शौक रखने वाले सिंधिया आम जनता के लिए बड़ी आसानी से उपलब्ध रहते थे। उन्होंने सरकार में रहते हुए कई ऐसे फैसले लिए जो आज भी याद किए जाते हैं। देश में पहली बार बुलेट ट्रेन का कॉन्सेप्ट माधवराव सिंधिया का ही था। माधवराव सिंधिया का निधन 30 सितंबर 2001 को यूपी के मैनपुरी में एक विमान दुर्घटना में हुआ था।

माधवराव सिंधिया का जीवन

माधवराव सिंधिया का जन्म 10 मार्च, 1945 को ग्वालियर के सिंधिया परिवार में हुआ था। माधवराव सिंधिया ग्वालियर राजघराने की राजमाता विजयाराजे सिंधिया और जीवाजी राव सिंधिया के पुत्र थे। माधवराव सिंधिया ने अपनी शिक्षा सिंधिया स्कूल से की थी। सिंधिया स्कूल का निर्माण इनके परिवार द्वारा ग्वालियर में कराया गया था। उसके बाद माधवराव सिंधिया ने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से अपनी शिक्षा प्राप्त की। माधवराव सिंधिया का विवाह माधवीराजे सिंधिया से हुआ था। माधवराव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य व पुत्री चित्रांगदा राजे हैं। 

सिंधिया का राजनीतिक सफर

आजादी के बाद से ही सिंधिया घराना भारत की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। साल 1971 में विजयाराजे सिंधिया के पुत्र माधवराव सिंधिया ने अपनी मां की छत्रछाया में राजनीतिक सफर शुरू किया। सिंधिया ने अपना पहला चुनाव जनसंघ से लड़ा। उन्होंने कांग्रेस के डीके जाधव को एक लाख 41 हजार 90 मतों से पराजित किया। इस तरह माधवराव सिंधिया की राजनीतिक पारी बेहद चर्चित तरीके शुरू हुई।

राजीव गांधी के बने सबसे खास

माधवराव कुछ ही वषों में इंदिरा गांधी और संजय गांधी के करीबी हो गए। 1980 में राजमाता के इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली से चुनाव मैदान में उतरने से माधवराव बेहद खिन्न हुए। हालांकि राजमाता हार गईं, लेकिन माधवराव गुना से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत गए। इसके बाद वह राजीव गांधी और पीवी नरसिंह राव की सरकार में मंत्री बने। 

अटल बिहारी वाजपेयी को चुनाव में हराया

सिंधिया परिवार भले ही जनसंघ से जुड़ा रहा था, लेकिन माधवराव सिंधिया ने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए जनसंघ का साथ छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। छह साल बाद ही 1977 में वे राजमाता की इच्छा के खिलाफ जाते हुए कांग्रेस में शामिल हो गए। साल 1984 में माधवराव सिंधिया ने वो कमाल कर दिखाया, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी। उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को हराया था। 

निर्दलीय चुनाव भी जीता

माधवराव सिंधिया ने 1984 के बाद 1998 तक सभी चुनाव ग्वालियर से ही लड़े और जीते। 1996 में तो कांग्रेस से अलग होकर भी वह भारी बहुमत से जीते थे। जबकि राजमाता गुना से लगातार बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर जीतती रही। राजमाता की मौत के बाद माधवराव ने ग्वालियर छोड़कर गुना से चुनाव लड़ा था। 

तो पीएम बन सकते थे माधवराव सिंधिया

मनमोहन सिंह सरकार में विदेश मंत्री रहे नटवर सिंह ने माधवराव सिंधिया को याद करते हुए कहा, 'यदि वह जीवित होते तो पीएम बन सकते थे।' माधवराव राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव सरकार में मंत्री थे। और उनकी गिनती देश के दिग्गज नेताओं में थी। वह पीएम उम्मीदवार के तौर पर भी देखे जाते थे। 

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