अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे खास सिपाही रहे जसवंत सिंह कैसे बने भाजपा के बागी, ये थी वजह

Jaswant Singh Political Journey - Sakshi Samachar

पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का निधन

2014 से ही कोमा में थे जसवंत सिंह

साल 2014 में पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर हो गए थे अलग

नई दिल्ली : पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का लंबी बीमारी के बाद रविवार को निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे और लंबे समय से कोमा में थे। जसवंत सिंह भाजपा के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक थे। बताया जाता है कि एक बार वह मीटिंग में किसी बात से नाराज हो गए और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सामने ही कागज फेंककर कमरे से बाहर चले गए थे।

जसवंत सिंह राजस्थान के बाड़मेर जिले से ताल्लुक रखते थे। राजस्थान की राजनीति में जसवंत सिंह की अहम भूमिका थी। भाजपा में अटल, आडवाणी और जोशी के बाद जसवंत सिंह का नाम आता था, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब पार्टी ने उन्हें टिकट तक देना मुनासिब नहीं समझा और वो बागी हो गए। 

टिकट नहीं मिलने पर छोड़ी थी पार्टी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्‍व वाली एनडीए सरकार में जसवंत सिंह ने 1996 से 2004 के बीच रक्षा, विदेश और वित्‍त जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्होंने टिकट नहीं दिया, इसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी। उसी साल उन्‍हें सिर में गंभीर चोटें आई, तब से वह कोमा में थे।

दरअसल जसवंत सिंह का गांव जासोल बाड़मेर जिले में आता है। उनके पुत्र मानवेन्द्र सिंह वहां से दो बार चुनाव लड़ चुके हैं। जसवंत सिंह चाहते थे कि 2014 में वह अपना आखिरी चुनाव अपने इलाके से लड़ें, लेकिन पार्टी ने ऐसा नहीं किया था। इस बात से वह बेहद नाराज हुए थे। उस वक्त उनके निर्दलीय चुनाव लड़ने के कयास शुरू हो गए थे।

जसवंत सिंह का राजनीतिक सफर

जसवंत सिंह 1960 में सेना में मेजर के पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक के मैदान में उतरे थे। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में वह अपने कैरियर के शीर्ष पर थे। 1998 से 2004 तक राजग के शासनकाल में जसवंत ने वित्त, रक्षा और विदेश मंत्रालयों का नेतृत्व किया। भाजपा की स्‍थापना करने वाले नेताओं में शामिल जसवंत ने राज्‍यसभा और लोकसभा, दोनों सदनों में बीजेपी का प्रतिनिधित्‍व किया। बतौर वित्‍त मंत्री जसवंत सिंह ने स्‍टेट वैल्‍यू ऐडेड टैक्‍स (VAT) की शुरुआत की जिससे राज्‍यों को ज्‍यादा राजस्‍व मिलना शुरू हुआ। उन्‍होंने कस्‍टम ड्यूटी भी घटा दी थी।

जसवंत का राजनीतिक कैरियर कई उतार चढाव से गुजरा और इस दौरान विवादों से उनका चोली दामन का साथ रहा। 1999 में एयर इंडिया के अपहृत विमान के यात्रियों को छुड़ाने के लिए आंतकवादियों रिपीट आंतकवादियों के साथ कंधार जाने के मामले में उनकी काफी आलोचना हुई। 

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