GHMC Elections 2020 : इन 5 कारणों से हैदराबाद में भाजपा झोंक रही अपनी पूरी ताकत

GHMC Elections 2020 Five Reasons Why BJP Trying To Win GHMC Polls 2020 - Sakshi Samachar

जीएचएमसी चुनाव में भाजपा ने झोंकी ताकत

अमित शाह, जेपी नड्डा और योगी की होगी रैली

अब तक प्रकाश जावडेकर, स्मृति ईरानी और देवेंद्र फडणवीस आ चुके हैं हैदराबाद

हैदराबाद : दुब्बाका विधानसभा उपचुनाव में मिली जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का विश्वास सातवें आसमान पर है। जीएचएमसी चुनाव (GHMC Elections 2020) में सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) को पटखनी देने के लिए भाजपा ने पूरा जोर लगा दिया है। अमित शाह से लेकर जेपी नड्डा और योगी आदित्यनाथ तक चुनाव प्रचार के लिए जल्द हैदराबाद (Hyderabad) आने वाले हैं। आइए जानते हैं आखिर हैदराबाद म्यूनिसिपल इलेक्शन को लेकर भाजपा इतनी गंभीर क्यों है। आखिर क्या वजह है कि भाजपा किसी भी कीमत पर इस चुनाव में जीत चाहती है।

लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए रणनीति बनाने वाले अब जीएचएमसी चुनाव के लिए पार्टी का आधार तय कर रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे स्टार प्रचारक हैदराबाद की गलियों में रोड शो करते नजर आ सकते हैं। ऐसा पहली बार होगा, जब भाजपा ने किसी स्थानीय चुनाव को इतना बड़ा बना दिया है और अपनी पूरी ताकत झोंक दिया है। स्थानीय चुनाव में भाजपा की इतनी बड़ी कोशिशों ने राजनीतिक पंडितों के मन में भी तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं।

TRS का किला ध्वस्त करना चाहती है BJP

तेलंगाना के दुब्बाका में हुए उपचुनाव में भाजपा को मिली जीत ने पार्टी को नई उम्मीद दी है। तेलंगाना में भाजपा टीआरएस का मजबूत किला ढहा कर खुद को स्थापित करना चाहती है। अलग राज्य बनने के बाद से ही तेलंगाना में टीआरएस की सरकार है और केसीआर मुख्यमंत्री हैं। भाजपा जीएचएमसी का चुनाव जीतकर टीआरएस के किले में सेंधमारी करना चाहती है।

GHMC चुनाव के सहारे दक्षिण की राजनीति पर पकड़

आज भी भाजपा की पकड़ उत्तर के मुकाबले दक्षिण भारत में न के बराबर है। दक्षिण की राजनीति में भाजपा अब तक अपना पांव नहीं जमा पाई है। कर्नाटक को छोड़ दें तो कहीं भी भाजपा की सरकार नहीं है। तमिलनाडु में एनडीए की सरकार है, जिसमें एआईडीएमके के साथ भाजपा ने गठबंधन किया है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में सूपड़ा साफ होने के बाद अब पार्टी को जीएचएमसी चुनाव से काफी उम्मीदें हैं। भाजपा जीएचएमसी चुनाव जीतकर दक्षिण की राजनीति में अपनी पकड़ बनाना चाहती है।

कमजोर कांग्रेस-टीडीपी के वोट बैंक पर नजर

राज्य में कांग्रेस और टीडीपी के नाम पर कमजोर विपक्ष है। जनता अपना वोट कांग्रेस या फिर टीडीपी को देने की जगह टीआरएस को दे रही है। भाजपा की नजर अब ऐसे ही वोट बैंक पर है। वह लोगों के सामने कांग्रेस और टीडीपी का विकल्प बनकर उभरना चाहती है, जो टीआरएस के सामने चुनौती पेश कर सके। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यह बात साबित भी किया है कि जनता अब उसके नेताओं पर भरोसा कर रहे हैं।

KCR के मंसूबे पर पानी फेरने की तैयारी

साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में यह कयास लगाए जा रहे थे कि मुख्यमंत्री केसीआर अब अपनी कुर्सी बेटे केटीआर को सौंप कर केंद्र की राजनीति में जा सकते हैं। केसीआर ने फेडरल फ्रंड के जरिए एक तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद भी शुरू की थी, हालांकि जो सफल नहीं हो सकी थी। भाजपा अब केसीआर के उसी मंसूबे पर पानी फेरना चाहती है। भाजपा नेताओं को मालूम है कि अगर जीएचएमसी चुनाव में पार्टी अच्छा प्रदर्शन करती है तो उसका असर विधानसभा और लोकसभा के चुनाव पर भी पड़ेगा। जीएचएमसी चुनाव भाजपा के लिए तेलंगाना में एक अवसर बनकर आया है, जिसे वह किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहती है।

हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण

भाजपा नेताओं के निशाने पर टीआरएस के साथ-साथ एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी हैं। भाजपा ने हैदराबाद में रोहिंग्या मुसलमानों को मुद्दा उठाया तो ओवैसी ने भी भाजपा को चुनौती दे डाली कि बिना पाकिस्तान और मुसलमान का नाम लिये चुनाव जीतकर दिखाएं। अब भाजपा हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण करना चाहती है, शायद इसीलिए इस बार के चुनावी दंगल में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की एंट्री होने जा रही है। भाजपा की नजर हैदराबाद के हिंदू मतदाताओं पर है, जिसे वह टीआरएस के खातें से खींचकर अपनी झोली में डालना चाहते हैं।

तेलंगाना में क्या है भाजपा की स्थिति

राज्य में भाजपा का प्रदर्शन अब तक निराशाजनक ही रहा है। साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को 120 सीटों में सिर्फ 2 सीटें ही मिली थी। हालांकि लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा था। भाजपा को 17 लोकसभा सीट में चार पर जीत मिली थी।

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