राजनीति में इन पिता-पुत्रों की जोड़ी है सबसे खास, जानिए क्या है यह दिलचस्प कनेक्शन

Father Son CM Post History - Sakshi Samachar

 पिता-पुत्र की जोड़ी जो रहे मुख्यमंत्री

ऐसे बेटे जिन्होंने संभाली पिता की विरासत

राजनीतिक विरासत का उत्तरदायित्व संभाल रहे बेटे

नई दिल्ली : राजनीति और वंशवाद का बहुत पुराना संयोग है। परिवारवाद का इतिहास हर पार्टी से जुड़ा हुआ है। ज्यादातर नेता अपनी राजनीतिक विरासत का उत्तरदायित्व भी अपने घर के उत्तराधिकारी को सौंपते हैं। हम आपको ऐसे ही कुछ पिता-पुत्र की जोड़ी के बारे में बता रहे हैं, जिनके हाथ राज्य की बागडोर रही है।

इस जोड़ी में कई ऐसे नेताओं के पुत्र शामिल हैं, जिन्होंने विरासत को सिर्फ हासिल नहीं किया, बल्कि उसे अपनाया भी। उन्होंने जनता के बीच, क्षेत्रों में जाकर उतना ही पसीना बहाया, जितने उनके पिता ने पार्टी को खड़ी करने और मुख्यमंत्री बनने में बहाया था। तो दूसरी तरफ ऐसे भी चेहरे हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी अपने पिता से तोहफे के तौर पर मिली है।

  
वाईएस राजशेखर रेड्डी-जगन मोहन रेड्डी

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की लोकप्रियता किसी से छुपी नहीं है। वह संयुक्त आंध्र प्रदेश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री के तौर पर आज भी जाने जाते हैं। उनका कार्यकाल वर्ष 2004 से 2009 तक रहा था। वाईएस राजशेखर रेड्डी का निधन 2 सितंबर 2009 को एक हवाई दुर्घटना में हुआ था। राजशेखर रेड्डी की तरह उनके बेटे और आंध्र प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की लोकप्रियता है। साल 2019 के विधानसभा चुनाव में जगन मोहन रेड्डी ने प्रचंड जीत दर्ज की थी। महज एक साल के अंदर ही उन्होंने वह तमाम वादे पूरे कर दिए, जो चुनाव के दौरान जनता से किए थे। वाईएस जगन ने पिता की विरासत को अपने पसीने से सींचा और मुख्यमंत्री बनने के लिए दिनरात जनता के बीच गुजारा। जगन मोहन की पदयात्रा की चर्चा पूरे देश में रही थी।

मुलायम सिंह यादव-अखिलेश यादव 

समाजवादी पार्टी के संरक्षक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को राजनीतिक का 'पहलवान' कहा जाता है। मुलायम सिंह यादव बेहद साधारण परिवार से निकलकर राजनीति में खास पहचान बनाई। मुलायम सिंह ने साल 1992 में समाजवादी पार्टी बनाई। वे तीन बार क्रमशः 5 दिसम्बर 1989 से 24 जनवरी 1991 तक, 5 दिसम्बर 1993 से 3 जून 1996 तक और 29 अगस्त 2003 से 11 मई 2007 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद उनकी सत्ता की विरासत पुत्र अखिलेश यादव ने संभाली। अखिलेश यादव ने भी जनता के बीच पार्टी को मजबूत बनाने के लिए काफी काम किया। अखिलेश यादव 15 मार्च 2012 से 19 मार्च 2017 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।

फारुख अब्दुल्ला-उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अब्दुल्ला परिवार हमेशा से एक बड़ा नाम रहा है। पिता के बाद उनके बच्चों के मुख्यमंत्री बनने के मामले में भी अब्दुल्ला परिवार सबसे आगे रहा।अब्दुल्ला परिवार की तीन पीढ़ियों ने मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य हासिल किया। शेख अब्दुल्ला 2 बार मुख्यमंत्री रहे और 1982 में उनके हटने के तुरंत बाद उनके बेटे फारुख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बन गए। वह तीन बार सीएम बने, इनके बाद फारुख के बेटे उमर अब्दुल्ला भी मुख्यमंत्री बने।

बीजू पटनायक-नवीन पटनायक

ओडिशा में भी पिता के बाद बेटे ने राज्य की सत्ता पर अपना अधिकार जमाए रखा। राज्य में नवीन पटनायक इस समय मुख्यमंत्री हैं और उनसे पहले उनके पिता बीजू पटनायक भी मुख्यमंत्री रहे। बीजू पटनायक साल 1961 से 1963 तक और फिर साल 1990 से 1995 तक मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए राज्य की सेवा की। बीजू पटनायक के बेटे नवीन पटनायक भी ओडिशा के लोकप्रिय नेता बने और पिछले 19 साल से राज्य में मुख्यमंत्री हैं। वह ओडिशा के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का कीर्तिमान बनाया है।

शिबू सोरेन-हेमंत सोरेन

झारखंड में इस वक्त झारखंड मुक्ति मोर्चा की अगुवाई में गठबंधन की सरकार है और हेमंत सोरेन के हाथ सत्ता की कमान है। हेमंत सोरेन राज्य के 7वें मुख्यमंत्री हैं और साल 2019 में उन्होंने शपथ ली थी। हेमंत के पिता शिबू सोरेन भी सीएम रह चुके हैं। साल 2005 में झारखंड विधानसभा चुनावों के बाद वे विवादस्पद तरीके से झारखंड के मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित न कर सकने के कारण कुछ दिनो के बाद ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

देवी लाल-ओम प्रकाश चौटाला

चौधरी देवी लाल उन कुछ चुनिंदा राजनीतिज्ञों में से हैं जो आजादी के बाद तथा आजादी के पहले दोनों ही समय में भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। देश की आजादी के बाद जब पहली बार चुनाव हुए तब हरियाणा पंजाब राज्य का हिस्सा था और वहां हुए विधानसभा चुनावों में चौधरी देवीलाल पहली बार सन 1952 में ही विधायक बने। वे दो बार 21 जून 1977 से 28 जून 1979, तथा 17 जुलाई 1987 से 2 दिसम्बर 1989 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। देवी लाल के बाद उनके बड़े बेटे ओम प्रकाश चौटाला भी राज्य के मुख्यमंत्री बने। विधायक न होते हुए भी ओमप्रकाश चौटाला सीएम बन गए थे। 17 महीने में वे 3 बार सीएम बने और 3 बार इस्तीफा दिया। वे कभी 6 दिन, कभी 16 दिन तो कभी 172 दिन सीएम रहे।

हेमवती नंदन बहुगुणा-विजय बहुगुणा

हेमवती नंदन बहुगुणा कांग्रेस के ऐसे नेता रहे, जिन पर इंदिरा गांधी को बहुत विश्वास था। मूल रूप से गढ़वाल क्षेत्र के रहने वाले बहुगुणा को राजनीतिक पहचान इलाहाबाद से मिली। 8 नवंबर 1973 को वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। हालांकि उनका कार्यकाल बहुत लंबा नहीं रहा और 4 मार्च 1974 को वह इस पद से हट गए। हेमवती नंदन बहुगुणा के बेटे विजय बहुगुणा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। साल 2012 से 2014 तक वह उत्तराखण्ड राज्य के सातवें मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद उन्हें भी इस पद से हटना पड़ा था।

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