पुलिस और नागरिकों के बीच विश्वास बहाली सबसे बड़ी चुनौती : एसीपी श्रीपर्णा

 Rebuilding trust between police and citizens is the biggest challenge - Sakshi Samachar

पुलिस और पब्लिक के बीच की खाई को पाटने की कोशिश

मजबूत बनाकर चुनौतियों से दो-दो हाथ करना सिखाती है पुलिस

एजुकेशन, इंफोर्समेंट और इंजीनियरिंग के फार्मूले पर चले पुलिस

नोएडा, 8 मार्च। गौतमबुद्ध नगर जिले में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद पहली महिला एडिशनल पुलिस कमिश्नर बनीं श्रीपर्णा गांगुली के मुताबिक बतौर एडिशनल पुलिस कमिश्नर, नोएडा-ग्रेटर नोएडा इस वक़्त उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है, पब्लिक और पुलिस को करीब लाना। गौतमबुद्ध नगर जिले की पुलिस कमिश्नरी में तैनाती के दौरान गांगुली ने पुलिस और पब्लिक के बीच एक बार फिर से विश्वास बहाल करने के बाद अपनी दूसरी प्राथमिकता ट्रैफिक समस्या का समाधान करना बताया।'

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि जब तक पुलिस और पब्लिक मन और विचारों से घुलेंगे-मिलेंगे नहीं, तब तक परेशानियां दोनों के सामने मुंह बाए खड़ी रहेंगी। यहां मौजूद पुलिस और पब्लिक के बीच की खाई को विश्वास से ही पाटा जा सकता है।"

गौरतलब है कि श्रीपर्णा गांगुली उत्तर प्रदेश कैडर की 2004 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। उप्र के फतेहपुर जिले की पहली महिला पुलिस अधीक्षक बनने का सेहरा भी श्रीपर्णा के ही सिर बंधा था। दक्षिणी ध्रुव के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर पर तिरंगा फहराने का श्रेय भी हिंदुस्तान में सबसे पहले अगर किसी महिला आईपीएस अधिकारी को जाता है, तो वो भी श्रीपर्णा गांगुली ही हैं। जब भारतीय पुलिस सेवा से श्रीपर्णा का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था, 1990 के दशक में तब करीब डेढ़ साल तक वह सैम पित्रोदा के नेतृत्व में बतौर डॉक्यूमेंटेशन एग्जीक्यूटिव के पद पर 'सीडॉट' में नौकरी कर चुकी हैं।

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पुलिस की नौकरी में आकर क्या कुछ खोया-पाया? पूछे जाने पर श्रीपर्णा ने कहा, "पुलिस खोने-पाने का घर नहीं है। इंसान को पुलिस ही मजबूत बनाकर चुनौतियों से दो-दो हाथ करना सिखाती है। हो सकता है पुलिस को लेकर और लोगों की राय अलग-अलग हो। मगर मेरा निजी अनुभव यही है। पुलिस ने हमेशा मेरा मनोबल बढ़ाया है। मेरी दिली इच्छा है कि पुलिस और पब्लिक के बीच मौजूद अविश्वास की खाई केवल कम न करूं, बल्कि इसे पूरी तरह खत्म कर सकूं।"

नोएडा पुलिस और यहां की पब्लिक में हमेशा तनातनी रहती है। इसे किस रूप में स्वीकार करती हैं? पूछे जाने पर नोएडा की पहली महिला एडिश्नल पुलिस कमिश्नर ने कहा, "जानती हूं। जो आप बता रहे हैं, वह सच है। नोएडा की नई कमिश्नरी में तैनाती के दौरान यहां की पब्लिक और पुलिस के बीच मौजूद अविश्वास की खाई को खत्म करना मेरी पहली चुनौती है। दूसरी चुनौती गौतमबुद्ध नगर में ट्रैफिक सिस्टम को कारगर और सरल बनाना है। यहां तैनाती के बाद के चंद दिनों में ही मैं समझ गई कि मेरी सबसे पहली जिम्मेदारी, पुलिस को पब्लिक के काबिल बनाना होगा। इसके लिए विशेष पुलिस को एक विशेष प्रशिक्षण देने के लिए मैं तत्पर हूं। वहीं पब्लिक को समझना होगा कि पुलिस या पुलिस में हर कर्मचारी और अफसर एक सा नहीं है। अच्छे-बुरे लोग समाज में हर जगह मौजूद हैं। आपसी सामंजस्य बिठाकर और  एक दूसरे को समझकर दोनों को करीब आने की जरूरत है। नोएडा कमिश्नरी में मेरा पहला एडिश्नल पुलिस कमिश्नर (महिला आईपीएस) बनना उतना मायने नहीं रखता, जितना मेरे लिए यहां मौजूद चुनौतियों से पार पाना।"

आप से पहले भी नोएडा-ग्रेटर नोएडा में तमाम आला-पुलिस अफसरान की लाख कोशिशों के बावजूद पुलिस की छवि जस की तस बनी रही। परिणाम ढाक के तीन पात रहे। आईएएनएस के सवाल को बीच में ही काटते हुए श्रीपर्णा गांगुली बोलीं, "मैं आपके तर्क या सवाल से सहमत नहीं हूं। भले ही हर आईपीएस की ट्रेनिंग समान क्यों न हो, मगर सोचने का नजरिया हर इंसान का अलग और निजी होता है। मुझसे पहले किसने क्या किया? परिणाम क्या निकले? मैं इस सब में नहीं पड़ती। मैं नोएडा की पब्लिक और पुलिस के लिए क्या कर पाऊंगी? मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है।"

उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि एजुकेशन, इंफोर्समेंट और इंजीनियरिंग के फार्मूले पर पुलिस चले। समस्याएं खुद ब खुद खत्म होती जाएंगी। आने वाली पुलिस का सेंसिटिव, अलर्ट और प्रो-एक्टिव होना बेहद जरूरी है। मेरे लिए दूसरा चैलेंज ट्रैफिक प्रणाली को सुचारु और सरल बनाना है। इसके लिए अभी तक हमारे जिले में ट्रैफिक पुलिस पर सिर्फ 50 बॉडी कैमरे थे। सबसे पहले मेरी कोशिश है कि इन कैमरों की भी संख्या में इजाफा किया जाए।"

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर सम्मानित होने वाली तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहस पुरस्कार 2016 से सम्मानित व 2015 और 2016 में क्रमश: उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार व यश भारती पुरस्कार से सम्मानित हो चुकीं श्रीपर्णा गांगुली के अल्फाजों में, "पुलिस की नौकरी अगर चुनौतीपूर्ण न होती तो मैं, चुनौतियों का सामना करके खुद के अंदर हर दम जीतने की भावना को भी शायद कभी न पाल-पोस पाती।"

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