भारत बंद : बंगाल और ओडिशा में रेलवे ट्रैक ब्लॉक, केरल में दफ्तर-दुकान बंद

Trade Unions Nationwide Strike Against New Labour Policies - Sakshi Samachar

नई दिल्ली : केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आज यानी गुरुवार को भारत बंद (Nationwide Strike) बुलाया गया है। दस केंद्रीय यूनियनों (Trade Unions) द्वारा संयुक्त रूप से देशव्यापी भारत बंद का अह्वान किया गया है। भारत बंद के दौरान ट्रांसपोर्ट, बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। आज सड़कों पर ऑटो और टैक्सी कम ही देखने को मिल सकते हैं। 

केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में अलग-अलग ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत 24 घंटे की देशव्यापी हड़ताल से गुरुवार को केरल में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। भाजपा समर्थित भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के अलावा सभी ट्रेड यूनियन इस भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं। 

केरल में राज्य सरकार ने भी इस बंद का समर्थन किया है। सभी सरकारी दफ्तर बंद हैं औरर सरकारीर गाड़ियों की सेवा भी बाधित है। बिजनेस प्रतिष्ठानों और दुकानों ने भी शटर गिरा रखा है।

बंगाल में लेफ्ट ट्रेड यूनियन के सदस्यों ने नॉर्थ 24 परगना जिले में रेलवे ट्रैक को ब्लॉक कर दिया। वहीं कोलकाता में भी प्रदर्सन हो रहा है। सरकार की नए लेबर लॉ और किसान बिलों के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन हो रहा है।

केरल में बस सेवा प्रभावित

केरल में भारत बंद की वजह से बस सेवा भी प्रभावित हुई हैं। वहीं, कोच्चि में मार्केट बंद हैं।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी प्रशासन ने सरकारी अधिकारियों के लिए आज कार्यालय में उपस्थित होना अनिवार्य कर दिया है, ताकि ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद को विफल किया जा सके।

ममता सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर कोई अधिकारी आज कार्यालय में अनुपस्थित पाया जाता है, तो उसे अकार्य दिवस (ड्यूटी से अनधिकृत अनुपस्थिति) के रूप में माना जाएगा। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने 2011 में टीएमसी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद इस तरह का रुख अपनाया है। भारत बंद का मकसद किसान विरोधी सभी कानूनों और मजदूर विरोधी श्रम संहिता को वापस लेना है और मरनेगा समेत कई योजनाओं का विस्तार है।

क्या हैं मांगें ?

सभी गैर-आयकर कर परिवारों को प्रति माह 7,500 रुपये का नकद हस्तांतरण और सभी जरूरतमंद लोगों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 10 किलोग्राम मुफ्त राशन।

मनरेगा का विस्तार, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में एक साल में 200 दिनों का काम प्रदान करने के लिए बढ़ी हुई मजदूरी और शहरी क्षेत्रों में रोजगार गारंटी का विस्तार।

किसान विरोधी सभी कानूनों और मजदूर विरोधी श्रम संहिता को वापस लेना। मांगों में सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण को रोकना भी शामिल है।

हड़ताल में कौन ले रहे हैं हिस्सा?

हड़ताल में भाग लेने वाले 10 केंद्रीय श्रमिक संगठन इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडिया ट्रेड यूनियंस (सीटू), ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी), सेल्फ-एंप्यॉलयड वीमेंस एसोसिएशंस (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) और युनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) हैं। 

एआईटीयूसी के महासचिव अमरजीत कौर ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हड़ताल शुरू हो गई है। केरल और तमिलनाडु पूरी तरह बंद हैं। ऐसी ही स्थितियां ओड़िशा, पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना और गोवा में बन रही हैं। महाराष्ट्र में भी हड़ताल को अच्छा समर्थन मिल रहा है।'' 

उन्होंने कहा कि बैंकों, एलआईसी, जीआईसी और आयकर विभाग में भी सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने हड़ताल को राजनीति प्रेरित बताते हुए इससे अलग रहने की घोषणा की है। किसान संगठनों के संयुक्त मंच अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने भी इस आम हड़ताल को अपना समर्थन देने की घोषणा की है।

समिति के सदस्य ग्रामीण इलाकों में लोगों के बीच हड़ताल के समर्थन का आह्वान करेंगे। यह हड़ताल केंद्र सरकार की कई नीतियों समेत विशेष तौर पर नये किसान और श्रम कानूनों के विरोध के लिए बुलायी गयी है। घरेलू सहायक, निर्माण श्रमिक, बीड़ी मजदूर, रेहड़ी-पटरी वालों, कृषि मजदूर, ग्रामीण और शहरी इलाकों में स्वरोजगार करने वालों ने भी ‘चक्का जाम' में शामिल होने की घोषणा की है। कई राज्यों में ऑटोरिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों ने भी हड़ताल में शामिल होने के लिए कहा है। रेलवे और रक्षा कर्मचारियों के संघों ने भी हड़ताल को अपना समर्थन जताया है।

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