दाल में काला है या पूरी दाल काली है, स्वास्थ्य बजट बढ़ने के बावजूद क्यों आत्महत्या को मजबूर हैं लोग

 Is there black in the pulses or is the whole pulse black, why are people forced to commit suicide despite increasing health budget - Sakshi Samachar

नेशनल हेल्थ प्रोफाइल के मुताबिक, 2009-10 में केंद्र हर व्यक्ति की हेल्थ पर सालभर में 621 रुपये करता था खर्च

2009-18 के बीच 13.28 लाख लोगों ने सुसाइड किया, इनमें से 2.48 लाख लोगों ने बीमारी से परेशान होकर दे दी जान

हेल्थ बजट भी बढ़ा, हेल्थ पर खर्चा भी बढ़ा, फिर भी 10 साल में 2.5 लाख आत्महत्याएं

नई दिल्ली : कोरोना वायरस न सिर्फ हमारे देश, बल्कि पूरी दुनिया के हेल्थ सिस्टम के लिए चुनौती बन गया है। चुनौती इसलिए क्योंकि इससे अब तक अकेले हमारे देश में ही 1.20 लाख लोग संक्रमित हुए और साढ़े 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि, दुनिया भर में इस वायरस से 52 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। 3.3 लाख से ज्यादा ने जान गंवाई है।

2019-20 में हेल्थ के लिए सरकार ने 64 हजार 609 करोड़ रुपये रखे जबकि 2020-21 में 67 हजार 112 करोड़ रुपये

हमारे देश में कोरोना वायरस का पहला मरीज 30 जनवरी को मिला था। उसके दो दिन बाद ही हमारा बजट आया। इस बार हेल्थ बजट पिछले साल के मुकाबले 4 प्रतिशत ज्यादा था। 2019-20 में हेल्थ के लिए सरकार ने 64 हजार 609 करोड़ रुपये रखे थे। जबकि, 2020-21 में 67 हजार 112 करोड़ रुपये रखे गए।

नेशनल हेल्थ प्रोफाइल के मुताबिक, 2009-10 में केंद्र हर व्यक्ति की हेल्थ पर सालभर में 621 रुपये करता था खर्च

पिछले 10 साल में हमारे हेल्थ बजट में 175 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फिर भी हमारे यहां हेल्थ पर कुल जीडीपी का 2 प्रतिशत से भी कम खर्च होता है। जबकि, चीन में कुल जीडीपी का 3.2 प्रतिशत, अमेरिका में 8.5 प्रतिशत और जर्मनी में 9.4 प्रतिशत हेल्थ पर खर्च होता है। हर व्यक्ति की हेल्थ पर सरकार सालाना 1657 रुपये ही खर्च करती है।

2009-18 के बीच 13.28 लाख लोगों ने सुसाइड किया, इनमें से 2.48 लाख लोगों ने बीमारी से परेशान होकर दे दी जान

नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2019 के मुताबिक, 2017-18 में केंद्र सरकार ने लोगों की हेल्थ पर जीडीपी का 1.2% ही खर्च किया। 2009-10 में सरकार ने हर व्यक्ति की हेल्थ पर सालभर में सिर्फ 621 रुपये खर्च किए थे। जबकि, 2017-18 में यह खर्च 166 प्रतिशत बढ़कर 1657 रुपये हो गया। अगर इस हिसाब से देखें तो सरकार हर व्यक्ति की हेल्थ पर रोज सिर्फ 4.5 रुपये ही खर्च करती है। 

सालभर में खुद अपनी जेब से 3 लाख 40 हजार 196 करोड़ रुपये हेल्थ पर खर्च किए

वहीं, नेशनल हेल्थ अकाउंट्स के मुताबिक 2016-17 में केंद्र-राज्य सरकार के अलावा लोगों ने सालभर में खुद अपनी जेब से 3 लाख 40 हजार 196 करोड़ रुपये हेल्थ पर खर्च किए थे। इस हिसाब से हर व्यक्ति ने अपनी जेब से हेल्थ पर 2,570 रुपये खर्च किया था। लोगों की हेल्थ पर 2017-18 में 37 प्रतिशत केंद्र और 67 प्रतिशत राज्य सरकार ने खर्च किया था।

हेल्थ बजट भी बढ़ा, हेल्थ पर खर्चा भी बढ़ा, फिर भी 10 साल में 2.5 लाख आत्महत्याएं
पिछले 10 साल में सरकार ने हेल्थ बजट में करीब ढाई गुना की बढ़ोतरी की। जबकि, हर व्यक्ति की हेल्थ पर होने वाला खर्च भी डेढ़ गुना से ज्यादा बढ़ाया। उसके बाद भी 10 साल में 2.48 लाख लोगों ने सिर्फ बीमारी से तंग आकर आत्महत्या कर ली।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानि एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि 2009 से 2018 के बीच इन 10 सालों में 2.48 लाख से ज्यादा लोगों ने सिर्फ इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि वे अपनी बीमारी से परेशान हो चुके थे।

  • 2011-12 में हमारा हेल्थ बजट 24,355 करोड़ रुपए था
  • 2020-21 में बढ़कर 67,112 करोड़ रुपए हो गया
  • 2017-18 में 1657 रुपये ही खर्च किए
     

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