80 प्रतिशत भारतीय चाहते हैं तिब्बत हो 'स्वतंत्र', लोगों में है जानकारी का अभाव

Survey Says India needs more information on Tibbat - Sakshi Samachar

80 प्रतिशत भारतीय चाहते हैं कि तिब्बत एक स्वतंत्र देश बने

तिब्बत के नियमित चुनावों के बारे में भी नहीं है कोई जानकारी

निर्वासित तिब्बती सरकार के ठिकाने के बारे में भी नहीं जानते लोग

नई दिल्ली : जब से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद (Indo-China Border Dispute) एक बार फिर से दिखने लगा है, तभी से एक बार फिर तिब्बत सुर्खियों में आ गया है। आए दिन वहां के हालात को लेकर कोई न कोई खबर सुर्खियों में नजर आ ही जाती है। ऐसे में एक सवाल यह खड़ा होता है कि देश में आखिर तिब्बत के बारे में कितने लोग कितना जानते हैं?

शायद यही वजह रही कि आईएएनएस सीवोटर (IANS C-Voter) ने तिब्बत से जुड़ी कितनी ही बातों को लेकर कुछ लोगों से सवाल किए और जवाब चैंकाने वाले आए। कहना गलत न होगा कि तिब्बत को लेकर आज खबरों को पहले से कहीं ज्यादा गंभीरता और विस्तार के साथ लोगों के बीच बताने की जरूरत है। सर्वे में जो बातें निकलकर सामने आईं, आइए डालते हैं उनपर एक नज़र... 

80 प्रतिशत भारतीय चाहते हैं कि तिब्बत एक स्वतंत्र देश बने

इस सर्वेक्षण में तमाम तरह के कुल दस सवाल लोगों से पूछे गए और उत्तरदाताओं से उनके सटीक जवाब के लिए पांच मिनट से अधिक बातचीत की गई। उनके राय बेहद स्पष्ट थे।

  • इस सर्वेक्षण के बारे में अच्छी बात यह है कि अधिकतर भारतीय इस कारण का समर्थन और भी ज्यादा करेंगे, यदि उन्हें इस बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी उपलब्ध कराई जाए और वे इस पर सोचना शुरू करें।
  • इसके नकारात्मक पहलू की बात करें, तो लोगों को वाकई में इस पर और अधिक जानकारी देने की जरूरत है। इसके बारे में जो सबसे अधिक खराब बात है, वह ये कि वाकई में ऐसा कोई कर नहीं रहा है।

साल 2016 में भारत सरकार द्वारा अपनाई गई हालिया नीतियों के चलते तिब्बत की निर्वासित सरकार के बारे में लोगों को कम पता है। इस पर सभी को प्रयास करने की जरूरत है।

तिब्बत के नियमित चुनावों के बारे में भी नहीं है कोई जानकारी

सर्वेक्षण के दौरान लोगों से बातचीत करते वक्त पता चला कि लगभग 75 फीसदी लोगों को इस बारे में बिल्कुल भी कोई जानकारी नहीं है। भारत में लोगों ने बेलारूस और कजाकिस्तान की राजनीतिक स्थितियों और चुनावों पर चर्चा करना बंद कर दिया है, लेकिन इसी के साथ-साथ उन्हें तिब्बत के नियमित चुनावों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है, जिसके माध्यम से तिब्बतियों को निर्वासन में रहकर अपनी सरकार का चुनाव करना पड़ा।

निर्वासित तिब्बती सरकार के ठिकाने के बारे में भी नहीं जानते लोग

सर्वेक्षण में प्राप्त हुए नतीजे के मुताबिक, निर्वासित तिब्बती सरकार के ठिकाने के बारे में भी लोग को कम जानकारी है। यह वाकई में एक चौंकाने वाली बात है कि लोगों को इस बारे में कुछ भी अधिक जानकारी नहीं है। दरअसल, सोशल मीडिया पर इस पर कभी चर्चाएं सामने उठकर भी नहीं आई हैं। अधिकतर बातें यहां की खूबसूरती, मशहूर पर्यटन केंद्र, पर्यटकों के करने लायक चीजों के बारे में ही होती हैं।

पोल के अनुसार, आश्चर्यजनक रूप से 73.2 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें नहीं पता है कि वर्तमान में निर्वासित तिब्बती सरकार कहां से कार्यरत है।

हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में है तिब्बती सरकार का मुख्यालय

बता दें कि निर्वासन में तिब्बती सरकार का मुख्यालय हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में है। लेकिन करीब 74.5 फीसदी पुरुष इस तथ्य से पूरी तरह अनजान पाए गए, जबकि सिर्फ 12 फीसदी ने कहा कि वो ये बात जानते हैं। सर्वेक्षण में शामिल कुल महिला प्रतिभागियों में से 71.8 प्रतिशत ने जवाब दिया कि वे नहीं जानती हैं, जबकि 18.5 प्रतिशत ने कहा कि वे नहीं कह सकती हैं और सिर्फ 9.7 प्रतिशत ने कहा कि वे जानती हैं।

क्या कहते हैं अलग-अलग आयु वर्ग के लोग

वहीं, 18 से 24 वर्ष की आयु के 81.1 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे इस बारे में जागरूक नहीं हैं, 9.1 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे नहीं कह सकते, जबकि 8.8 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे जानते हैं।

आयु वर्ग 25-34 के 17.1 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे नहीं कह सकते, 11.9 प्रतिशत ने कहा कि वे जानते हैं, जबकि 70.9 प्रतिशत प्रतिभागी पूरी तरह से अनजान थे।

इसी तरह 35-44 आयु वर्ग के 17.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे नहीं कह सकते, 8 प्रतिशत ने कहा कि वे जानते हैं जबकि 74.4 प्रतिशत ने कहा कि वे नहीं जानते हैं।

साल 45-54 आयु वर्ग के 20.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे नहीं कह सकते हैं, 12.8 प्रतिशत ने कहा कि वे जानते हैं, जबकि 66.9 प्रतिशत ने कहा कि वे नहीं जानते थे।

वहीं 55 साल और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों में 16.7 प्रतिशत ने कहा कि वे नहीं कह सकते, 13.4 प्रतिशत ने कहा कि वे जानते हैं, जबकि 69.9 प्रतिशत ने कहा कि वे नहीं जानते थे।

शिक्षा का स्तर भी जानकारी पर डालता है प्रभाव

  • शिक्षा समूह वाले श्रेणी में निम्न शिक्षा वाले 17.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे नहीं कह सकते, 6.5 प्रतिशत ने कहा कि वे जानते हैं, जबकि 75.9 प्रतिशत ने कहा कि वे इससे पूरी तरह से अनजान हैं।
  • मध्य शिक्षा समूह में 13.7 प्रतिशत ने कहा कि वे इस बारे में टिप्पणी नहीं कर सकते, 12.5 प्रतिशत ने कहा कि वे जानते हैं, जबकि 73.8 प्रतिशत ने कहा कि वे नहीं जानते हैं।
  • अधिक आश्चर्य की बात यह है कि उच्च शिक्षा वर्ग में 63.7 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे नहीं जानते, 17.6 प्रतिशत ने कहा कि वे टिप्पणी नहीं कर सकते, जबकि 18.7 प्रतिशत ने कहा कि वे जानते हैं।

अलग-अलग आय के लोगों की इस बारे में जानकारी

सर्वेक्षण के अनुसार, निम्न आय वर्ग के 18 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे इस बारे में कुछ नहीं कह सकते, 21.8 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे जानते हैं, जबकि 60.2 प्रतिशत लोग पूरी तरह से अनजान थे।

वहीं मध्यम आय वर्ग में 15.4 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे इस बारे में टिप्पणी नहीं कर सकते, 30.8 प्रतिशत ने कहा कि वे जानते हैं, जबकि 53.8 प्रतिशत ने उत्तर दिया कि वे नहीं जानते हैं।

इसी तरह उच्च आय वर्ग में 13.5 प्रतिशत ने कहा कि वे टिप्पणी नहीं कर सकते, 39.2 प्रतिशत ने कहा कि वे जानते हैं, जबकि 47.3 प्रतिशत ने कहा कि वे नहीं जानते हैं कि निर्वासित तिब्बती सरकार कहां से कार्यरत है

तिब्बत को 'शांति क्षेत्र' के रूप में बहाल करने की है जरूरत

करीबन तीन चौथाई उत्तरदाताओं ने भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर हो रहे विवाद को रोकने के मद्देनजर तिब्बत की स्थिति को एक बफर जोन के रूप में बहाल किए जाने का समर्थन किया।

क्या आपको लगता है कि भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर हो रहे संघर्ष को रोकने के लिए एक बफर जोन या शांति क्षेत्र के रूप में तिब्बत की ऐतिहासिक स्थिति को बहाल किया जाना महत्वपूर्ण है?

73.7 फीसदी उत्तरदाताओं ने इस सवाल का जवाब 'हां' में दिया, जबकि 13.8 फीसदियों ने जवाब 'ना' में दिया और 12.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे।

महिलाओं और पुरुषों का इस बारे में विचार

लिंग के आधार पर बात करें, तो 13.4 प्रतिशत पुरुषों ने जवाब दिया कि वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं देंगे, 72.8 प्रतिशत लोगों ने सवाल के साथ अपनी सहमति दिखाई है, जबकि 13.8 फीसदी पुरुषों ने इस पर जवाब 'ना' में दिया है। अगर महिलाओं की बात करें, तो 74.7 फीसदी महिलाओं ने अपनी सहमति दिखाई है, 13.7 ने जवाब 'ना' में दिया है, जबकि 11.7 फीसदियों ने कोई टिप्पणी नहीं की है।

क्या कहते हैं अलग-अलग आयु वर्ग के लोग

इन उत्तरदाताओं में से 18 से 24 साल तक की आयु सीमा के बीच के 12.0 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इस मामले पर अपनी कोई टिप्पणी नहीं देंगे, 73.5 फीसदी का जवाब 'हां' में रहा, जबकि 14.5 फीसदी लोगों ने जवाब 'ना' में दिया। उत्तरदाताओं में से जिनकी उम्र 25 से 34 के बीच में रही, उनमें से 12.2 फीसदी लोग इस पर कुछ सटीकता से नहीं कह पाए, 72.5 फीसदी सहमत नजर आए और 15.3 फीसदी उत्तरदाताओं का जवाब 'ना' में रहा।

शिक्षा का स्तर भी जानकारी पर डालता है प्रभाव

कम शिक्षित वर्ग के लोगों से जब यही सवाल पूछा गया, तो अधिकतम 16.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे इस पर कोई बात नहीं कर सकते हैं, 67.2 फीसदियों ने सहमति दिखाई, जबकि 15.9 प्रतिशत लोगों ने 'ना' में जवाब दिया।

मध्यम शिक्षित वर्ग के 8.4 प्रतिशत लोगों ने इस पर बात नहीं की, 79.9 प्रतिशत लोगों ने 'हां' में जवाब दिया और 11.7 लोगों ने कहा कि वे इस सवाल से सहमत नहीं हैं।

उच्च शिक्षित वर्ग के 12 फीसदी लोगों ने इस पर अपनी कोई राय नहीं दी, 73.8 प्रतिशत लोगों ने 'हां' कहा, जबकि 14.2 प्रतिशत लोगों ने 'ना' में जवाब दिया।

अलग-अलग आय के लोगों की इस बारे में जानकारी

  • सर्वेक्षण के मुताबिक, निम्न आय वर्ग के 16.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं देंगे, 68.3 प्रतिशत लोगों ने जवाब 'हां' में दिया और 15.1 प्रतिशत लोगों ने 'ना' में जवाब दिया।
  • मध्यम आय वर्ग के 8.1 प्रतिशत लोगों ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, 80 फीसदियों ने सहमति दिखाई, जबकि 11.9 प्रतिशत लोगों ने जवाब 'ना' में दिया।
  • उच्च आय वर्ग के 5.3 प्रतिशत लोगों ने सवाल पर कोई बात नहीं की, 80 प्रतिशत लोगों ने 'हां' कहा और 14.7 लोगों का जवाब 'ना' में रहा।
  • भारत में चीन विरोधी भावनाएं इस वक्त अपने चरम पर है और तिब्बत को लेकर भी लोगों में सामान्य चर्चाएं जारी हैं, लेकिन सर्वेक्षण के मुताबिक, इस पर शुरू से लेकर अंत तक गहन व पूरी जानकारी भली-भांति मुहैया कराए जाने की जरूरत है। सर्वेक्षण में नमूने के तौर पर देशभर से 3,000 लोगों से बात की गई।
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