विकास दुबे और गुर्गों की मुठभेड़ : सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को करेगा याचिकाओं पर सुनवाई

Supreme court Hearing on Vikas Dubey and His Aids Encounter on Tuesday - Sakshi Samachar

नयी दिल्ली : कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों के नरसंहार की घटना के मुख्य आरोपी विकास दुबे के एक मुठभेड़ में मारे जाने के मामले को लेकर दायर याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय मंगलवार को सुनवाई करेगा। इनमें वह याचिका भी शामिल है जो विकास दुबे की पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने से कुछ घंटे पहले दायर की गयी थी। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा 10 जुलाई की सवेरे उज्जैन में विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद देर रात ई-मेल के जरिये न्यायालय में एक याचिका दायर कर यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था कि वह मुठभेड़ में नहीं मारा जाये।

मप्र पुलिस द्वारा उप्र पुलिस को सौंपे जाने के बाद विकास दुबे कड़ी सुरक्षा के बीच कानपुर लाया जा रहा था लेकिन रास्ते में ही भौंती गांव के निकट कथित मुठभेड़ में वह मारा गया। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ इन याचिकाओं की सुनवाई करेगी। इस याचिका में उन मुठभेड़ों की शीर्ष अदालत की निगरानी में सीबीआई से जांच कराने का अनुरोध किया गया है जिनमे विकास दुबे के कथित पांच सहयोगी मारे गये थे।

कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में विकास दुबे को गिरफ्तार करने गयी पुलिस की टुकड़ी पर तीन जुलाई को घात लगाकर हुये हमले में पुलिस उपाधीक्षक देवेन्द्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मियों की जान गयी थी। पुलिस टुकड़ी पर तीन जुलाई को आधी रात के बाद दुबे के मकान की छत से गोलियां बरसाई गयीं थीं। पुलिस ने कहा था कि विकास दुबे 10 जुलाई की सुबह उस समय पुलिस मुठभेड़ में मारा गया जब उसे उज्जैन से कानपुर ला रही पुलिस की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गयी और उसने भौंती इलाके में फरार होने की कोशिश की।

कानपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने बताया था कि इस दुर्घटना में चार पुलिसकर्मी भी जख्मी हुये। पुलिस का कहना था कि मुठभेड़ में घायल दुबे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। दुबे के मुठभेड़ में मारे जाने से पहले अलग अलग मुठभेड़ों में उसके पांच कथित सहयोगी मारे जा चुके थे। दुबे की मुठभेड़ में मौत से कुछ घंटे पहली ही याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय ने इस गैंगस्टर की सुरक्षा सुनिश्चित करने का उप्र सरकार और पुलिस को निर्देश देने का अनुरोध किया था।

उन्होंने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और न्यायालय की निगरानी में पांच आरोपियों की मुठभेड़ में हत्या की सीबीआई से जांच कराने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया था। बाद में, दिल्ली स्थित अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी और एक अन्य ने भी आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले और बाद में दस जुलाई को विकास दुबे की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले और उत्तर प्रदेश में पुलिस-अपराधियों और नेताओं की सांठगांठ की जांच में न्यायालय की निगरानी में सीबीआई या एनआईए से इसकी जांच कराने कराने तथा उन पर मुकदमा चलाने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, कानपुर में पुलिस की दबिश के बारे में महत्वपूर्ण सूचना विकास दुबे तक पहुंचाने में कथित संदिग्ध भूमिका की वजह से निलंबित पुलिस अधिकारी ने भी अपने संरक्षण के लिये न्यायालय में याचिका दायर की है।

पुलिस अधिकारी कृष्ण कुमार शर्मा ने अपनी पत्नी विनीता सिरोही के जरिये यह याचिका दायर की है। इसमें विनीता ने आशंका व्यक्त की है कि उसके पति को गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से खत्म किया जा सकता है। कानपुर के बिकरू गांव में पुलिस की दबिश के बारे में विकास दुबे तक सूचना पहुंचाने के संदेह में सब इंसपेक्टर शर्मा को तीन अन्य पुलिसकर्मियों के साथ पांच जुलाई को निलंबित कर दिया गया था।

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इस बीच, गैर सरकारी संगठन पीयूसीएल ने भी एक याचिका दायर कर विकास दुबे और उसके दो सहयोगियों की उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की जांच विशेष जांच दल से कराने के लिये अलग से याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि इन मुठभेड़ के बारे में पुलिस के कथन से कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं जिनकी जांच जरूरी है।

जनवरी, 2017 से मार्च 2018 के दौरान उप्र में पुलिस मुठभेड़ों की एसआईटी या सीबीआई से जांच के लिये पीयूसीएल ने याचिका दायर की थी। इसी मामले में पीयूसीएल ने अंतरिम आवेदन दायर किया है जिसमें इन मुठभेड़ों तथा अपराधियों एवं नेताओं के बीच सांठगांठ की जांच के लिये उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एल दल गठित करने का अनुरोध किया है। 

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