गुजरात, बिहार और तेलंगाना से शुरू हो गया सिलसिला, अब आगे तक जाएगा

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तेलंगाना में सर्वेक्षण के दौरान नर्सों पर हुए हमले

बिहार में सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाने पहुंची पुलिस पर हमला

मस्जिद में जमात में कई लोगों के शामिल होने की सूचना मिली थी

गुजरात के सूरत की तस्वीर​

नई दिल्ली : कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में जीत हासिल करने को लेकर पूरे देश में 'लॉकडाउन' का आज दसवां दिन है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की अपीलों के बावजूद जनता पूरी तरह से 'लॉकडाउन' का पालन नहीं कर रही। यही नहीं, गुजरात, बिहार और तेलंगाना में तो लोगों का गुस्सा पुलिस और नर्सों पर भी टूट पड़ा। जनता को बाहर निकलने से रोकने के लिए अपनी जिंदगी की परवाह तक न कर रात-दिन जूझ रहे 'कोरोना वॉरियर्स' पर लोगों का इस कदर पत्थर फेंककर गुस्सा जाहिर करने का यह सिलसिला जो शुरू हो चुका है, मालूम होता है अब इसे काबू कर पाना आसान नहीं होगा। 

तेलंगाना में सर्वेक्षण के दौरान नर्सों पर हुए हमले  
बता दें कि तेलंगाना के निजामाबाद में आज यानि बुधवार सुबह कोरोना वायरस की रोकथाम को लेकर शहर में किये जा रहे सर्वेक्षण में जुटी नर्स पर मालापल्ली और बरकतपुरा के लोगों ने हमला किया। स्थानीय पुलिस और कार्पोरेटर के सहयोग से नर्सों ने इन क्षेत्रों में सुबह 5 से सर्वेक्षण करने का प्रयास किया तो स्थानीय लोग जरूरी जानकारी देने की बजाय उल्टा उनसे सवाल-जवाब करने लगे। इसके बावजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने उनकी जानकारी जुटाने की कोशिश की तो लोगों ने उनके पीछे पालतु कुत्तों को हमले के लिए छोड़ दिया। इससे भयभीत नर्स और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों को वहां से मजबूरन दूर भागना पड़ा। 

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गौरतलब है कि दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में आयोजित मरकज में तेलंगाना के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग एक हजार से भी अधिक लोग शामिल हो कर वापस लौटे हैं और उनमें से कुछ लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण पॉजिटिव पाए गए हैं। ऐसे में निजामाबाद से भी कुछ लोगों के मरकज में शामिल होकर वापस लौटने की खबर है। कोरोना की रोकथाम को लेकर घर-घर सर्वेक्षण करने के सरकार के आदेश के तहत जिलाधीशों के निर्देश पर चिकित्सा विभाग के कर्मचारी यह सर्वेक्षण कर रहे हैं। 

बिहार में सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाने पहुंची पुलिस पर हमला
इससे पहले मंगलवार शाम बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर अनुमंडल के अंधराठाढ़ी प्रखंड के गीदड़गंज गांव की मस्जिद में 'सोशल डिस्टेंसिंग' का पाठ पढ़ाने गई पुलिस और प्रशासन की टीम पर लोगों ने हमला कर दिया। हमलावरों ने बवाल कर पथराव शुरू कर दिया जिससे अंचल अधिकारी सहित अन्य कर्मी जख्मी हो गए। इस दौरान ग्रामीणों की ओर से फायरिंग भी की गई।

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बवाल बढ़ता देख बीडीओ व थानाध्यक्ष किसी तरह जान बचाकर वहां से निकले। हमलावरों ने प्रशासन की एक गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर तालाब में गिरा दिया। इस दौरान अंधराठाढ़ी थाना से लेकर गीदड़गंज तक अफरा-तफरी का माहौल है। मधुबनी एसपी डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि थानाध्यक्ष को मस्जिद में भीड़ और बाहरी लोगों के होने की सूचना मिली थी। इस पर जब पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की टीम पहुंची तो ग्रामीणों के एक गुट ने अचानक हमला बोल दिया। हमलावरों पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, झंझारपुर एसडीपीओ ने ग्रामीणों द्वारा गोली चलाने की पुष्टि भी की।

मस्जिद में जमात में कई लोगों के शामिल होने की सूचना मिली थी
जानकारी के अनुसार पुलिस को मस्जिद में जमात में कई लोगों के शामिल होने की सूचना मिली थी। विदेश की यात्रा से लौटे लोगों के भी जमात में शामिल होने की सूचना थी। अंधराठाढ़ी बीडीओ राजेश्वर राम, सीओ विष्णुदेव सिंह व थानाध्यक्ष अमृत लाल वर्मण दल बल के साथ शाम करीब साढ़े छह बजे गीदड़गंज गांव स्थित मस्जिद पहुंचे। भीड़ देख पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग बनाने को कहा। आदेश मानने से इनकार करने पर जब पुलिस ने सख्ती दिखाई तो लोगों ने हमला कर दिया। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई शुरू की तो छतों से पत्थरबाजी शुरू हो गई। हालात बेकाबू हो गया। हमले में सीओ जख्मी हो गए। अन्य कर्मियों को चोटें आयीं। 

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मिथिला प्रक्षेत्र के आईजी अजिताभ कुमार के मुताबिक हमलावरों ने प्रशासन की एक जीप को क्षतिग्रस्त कर तालाब में गिरा दिया। अधिकारी अन्य कर्मी वहां से वापस लौटे। एसपी डॉ. सत्य प्रकाश ने बताया कि वहां दो गुटों में विवाद है। एक गुट के लोगों ने पुलिस प्रशासन पर हमला किया है। हमलावरों पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है। घटना में शामिल लोगों की शीघ्र गिरफ्तारी होगी। एसपी ने हमलावरों पर संक्रमण रोकने के प्रयास को विफल करने का आरोप भी बताया है। मस्जिद में कुछ लोगों के जुटे होने की सूचना पर झंझारपुर एसडीओ इस बात का सत्यापन करने गए थे कि वहां कोई बाहर का भी व्यक्ति है या नहीं। इसी दौरान पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू हो गयी। इसके बाद पुलिस पीछे हट गयी। इस घटना के तार निजामुद्दीन से जुड़े हैं कि नहीं, इसका सत्यापन किया जा रहा है।

गुजरात के सूरत की तस्वीर
इससे पहले सोमवार को गुजरात के सूरत शहर में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का कथित रूप से उल्लंघन करने के कारण पुलिस ने प्रवासी मज़दूरों पर आंसू गैस के गोले दागे थे। पुलिस का दावा है कि मज़दूर न सिर्फ तीन हफ़्तों के लिए देश में चल रहे 'लॉकडाउन' का उल्लंघन कर रहे थे, बल्कि उन्होंने पुलिस के ऊपर पत्थर भी फेंके। इसके बाद पुलिसकर्मियों पर हमले और लॉकडाउन का उल्लंघन करने के आरोप में 93 प्रवासी कामगारों को गिरफ़्तार कर लिया गया।

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पुलिस उपायुक्त विधि चौधरी के मुताबिक गणेश नगर और तिरुपति नगर इलाक़ों में रह रहे लगभग 500 प्रवासी कामगार रविवार 29 मार्च की देर रात सड़कों पर उतर आए, जिसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। वे अपने मूल निवास स्थानों पर जाने के लिए वाहन उपलब्ध कराने की मांग कर रहे थे। एक अन्य पुलिस अधिकारी ने कहा सूरत के पंडेसरा इलाके में बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग रहते हैं, यहीं पर गणेश नगर और तिरुपति नगर इलाक़े हैं। वे यहां पावरलूम और कपड़ों के कारखानों में काम करते हैं।

चौधरी ने कहा, "पुलिस जब उनसे घरों में रहने का अनुरोध कर रही थी तो उन्होंने सुरक्षाकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव में पुलिस के कई वाहनों को नुक़सान हुआ। पुलिस ने भीड़ को तितर बितर करने के लिये आंसू गैस के 30 गोले छोड़े। इस दौरान हमारी गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि कुछ उपद्रवियों को रविवार रात जबकि कुछ को सोमवार को गिरफ़्तार किया गया। हमने 500 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और 93 लोगों को गिरफ़्तार किया है। उनके खिलाफ दंगा, पुलिस पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं और पाबंदियों के उल्लंघन के लिए खिलाफ महामारी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।"
 

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