कोरोना वायरस में म्यूटेशन, जानिए क्या इससे और भी खतरनाक हुआ कोरोना ?

research says mutation continues in corona virus does it make more dangerous - Sakshi Samachar

कोरोना वायरस पर जारी है शोध

कोरोना पर शोध में हुआ खुलासा

कोरोना में हो रहा लगातार म्यूटेशन

नई दिल्ली : दुनिया भर में तबाही मचा रहे कोरोना महामारी को लेकर एक तरफ जहां इसकी वैक्सीन बनाने के प्रयास जारी हैं, तो वहीं कोरोना पर भी शोध जारी हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक दुनिया भर में जिस वायरस ने तबाही मचाई है, ये वो वायरस नहीं है जो चीन से निकला था।

दरअसल ये वायरस लगातार म्यूटेट हो रहा है। म्यूटेट का मतलब होता है वायरस में जेनेटिक बदलाव, वैज्ञानिकों की माने तो उन्होंने कोरोना वायरस में हजारों म्यूटेशन देखे हैं । हांलाकि सिर्फ एक म्यूटेशन ऐसा है जिससे इस वायरस के व्यवहार में बदलाव के संकेत मिले हैं। 

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या म्यूटेशन वायरस को और भी खतरनाक बना रहा है ? जिन वैक्सीन का हम इंतजार कर रहे हैं, उनकी सफलता को भी क्या इससे खतरा हो सकता है। मिली जानकारी के मुताबिक अन्य फ्लू वायरस की तुलना में यह काफी धीमी रफ्तार से बदल रहा है।  

वैज्ञानिकों ने कोरोना में D614G नाम का म्यूटेशन पाया है जो वायरस की स्पाइक में मौजूद होता है। जिसकी वजह से वायरस हमारी कोशिकाओं में प्रवेश कर जाता है। चीन के वुहान शहर में तबाही मचाने के बाद अनुमान जताया जा रहा है कि वायरस में म्यूटेशन इटली में पाया गया था। यही म्यूटेशन दुनिया के 97 प्रतिशत जांच सैंपल में पाया जा रहा है। 

फ्लोरिडा के स्क्रिप्स विश्वविद्यालय में जब इस वायरस पर शोध किया गया, तो जानकारी मिली कि म्यूटेड वायरस इंसानों की कोशिकाओं में ज्यादा तेजी से प्रवेश कर रहा है। इसके स्पाइक प्रोटीन में बदलाव इसे कोशिकाओं से ज्यादा तेजी से चिपकने में मदद करते हैं। तो वहीं न्यूयार्क विश्वविद्यालय में हुए शोध में भी कुछ ऐसे ही परिणाम मिले हैं। 

फिलहाल कोरोना वायरस के म्यूटेशन पर शोध लगातार जारी है, वैज्ञानिक अभी तक इस म्यूटेशन को लेकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। लेकिन इस म्यूटेशन पर लगातार ध्यान देने और शोध की जरूरत है।
 

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