फिल्मों और राजनीति में अमर का नहीं था कोई सानी, राजनीति के चाणक्य और घर तोड़, हर उपाधि आई सिंह के खाते में

Remembering Amar Singh Political and Bollywood Connection - Sakshi Samachar

राज्य सभा सांसद अमर सिंह का शनिवार को सिंगापुर के एक अस्पताल में निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनका सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था।

27 जनवरी 1956 को अलीगढ़ में पैदा हुए अमर सिंह ने कोलकाता के सैंट जेवियर्स कॉलेज से क़ानून की डिग्री ली थी। वह पहली बार 1996 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे। अपने राजनीतिक करियर में अमर सिंह कई संसदीय समितियों के सदस्य भी रहे।

कभी मुलायम सिंह के दाहिने हाथ माने जाते थे अमर सिंह

एक ज़माने में अमर सिंह समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता माने जाते थे।  भारतीय राजनीति में अमर सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उत्तर प्रदेश से अपना सियासी सफर शुरू करने वाले अमर सिंह कभी मुलायम सिंह के दाहिने हाथ माने जाते थे। भले ही पिछले कुछ वर्षों में वह समाजवादियों के 'जानी दुश्मन' बन बैठे, लेकिन एक समय था ज​ब अमर सिंह को समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के क़रीबी के तौर पर देखा जाता था। अं​तिम दिनों में उनकी नजदीकियां भाजपा के साथ ज्यादा देखने को मिलीं।

कहा जाता है कि साल 1996 में एक फ्लाइट की यात्रा के दौरान अमर सिंह की मुलाकात तत्कालीन रक्षामंत्री मुलायम सिंह से हुई, जिसके बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश लिया। हालांकि, इससे पहले भी वह मुलायम सिंह से मिल चुके थे लेकिन इस मुलाकात के बाद ही मुलायम सिंह ने उन्हें पार्टी का महासचिव बनाने का फैसला किया।

समाजवादी पार्टी से राज्यसभा के सांसद चुने गए अमर सिंह को कथित रूप पर पारिवारिक विवाद के बाद समाजवादी पार्टी से निकाल दिया गया। कहा जाता है कि उनको पार्टी से निकाले जाने में आजम खान और अखिलेश यादव की प्रमुख भूमिका रही। हालांकि साल 2010 में मुलायम सिंह खुद भी अमर सिंह को पार्टी से निकाल चुके थे। इसके बाद सिंह ने राजनैतिक जीवन से कुछ समय के लिए संन्यास भी ले लिया था। लेकिन साल 2016 में इनकी फिर से समाजवादी पार्टी में वापसी हुई थी।

अमर सिंह के बारे में कहा जाता रहा कि वह राजनीति, फिल्म और बिजनेस का कॉकटेल थे। समाजवादी पार्टी में रहते हुए उन्होंने इसे सिद्ध भी किया। कई बार ऐसे मौके आए, जब पार्टी को उन्होंने अपनी राजनैतिक समझदारी की वजह से परेशानियों से उबारा। जया बच्चन को राजनीति में लाने का काम अमर सिंह ने ही किया था, लेकिन पार्टी से निष्कासन के समय बच्चन परिवार से इनकी दूरियां बढ़ गईं, जो आज भी बनी हुई हैं। कहा यह भी जाता है कि अमिताभ बच्चन के बुरे वक्त में अमर सिंह ने उनका साथ खूब निभाया था।

मुलायम परिवार को तोड़ने का लगा आरोप

साल 2016 में ही अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच पार्टी को लेकर चल रही खींचतान के बीच एक रामगोपाल ने जिस कथित 'बाहरी व्यक्ति' को बार-बार जिम्मेदार बताया, वह कोई और नहीं बल्कि अमर सिंह ही थे। हालांकि इस विवाद से मुलायम ने खुद को दूर रखा और अमर सिंह को फिर से पार्टी से निकाल दिया गया। उस समय अमर सिंह पर यह भी आरोप लगे थे कि उन्होंने मुलायम और अखिलेश को 'शाहजहां' और 'औरंगजेब' के रूप में प्रचारित कराया।

अंबानी परिवार में विभाजन

साल 2002 में धीरूभाई अंबानी का निधन हो गया। हालांकि उस समय धीरुभाई अंबानी ने 80 हजार करोड़ का टर्नओवर करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के बंटवारे को लेकर कोई वसीयत नहीं लिखी थी, जिसके बाद मुकेश और अनिल अंबानी के बीच संपत्ति को लेकर विवाद हो गया। अनिल अंबानी ने इस मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मदद की अपील की थी।

अनिल अंबानी अपने मित्र अमर सिंह के कारण तत्कालीन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के करीबी भी रहे। हालांकि इस वजह से मुकेश अंबानी अपने छोटे भाई से नाराज भी हुए थे, जिससे उनके बीच की दूरी और बढ़ गई थी। बाद में समाजवादी पार्टी ने अनिल अंबानी को राज्यसभा की सीट भी ऑफर की थी, लेकिन उन्होंने इसके लिए मना कर दिया था।

अमर सिंह ने हिन्दी फ़िल्म हमारा दिल आपके पास है... में गेस्ट रोल भी किया।

नोट फोर वोट के दौरान भी उछला नाम-

अमर सिंह का नाम यूपीए 1 के समय अमेरिका के साथ प्रस्तावित परमाणु समझौते को लेकर भाजपा द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में सांसदों को कथित रूप से घूस देने के मामले में भी आया। जब फग्गन सिंह कुलस्ते, महावीर भगौरा और एक और सांसद ने संसद में नोटों के बंडल लहराए थे हालांकि बाद में वह इन आरोपों से बरी हो गए।

पार्टी भी बनाई

अमर सिंह ने राष्ट्रीय लोकमंच नाम से पार्टी भी बनाई और प्रदेश में चुनाव भी लड़ा। लेकिन पार्टी को एक भी सीट पर सफलता नहीं मिली।

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