साक्षी समाचार पोल: यूपी-राजस्थान में पुजारियों पर हुए हमले के पीछे क्या राजनीतिक वजह है?

Priest murder in Uttar Pradesh and Rajasthan inside story - Sakshi Samachar

मंदिरों में पुजारियों की हत्या से सनसनी

हत्याओं के पीछे पक रही सियासी खिचड़ी

अपराधी अब भी सलाखों के बाहर

नई दिल्ली: हाल के दिनों में देशभर में कई पुजारियों और संतों की हत्या की गई। सबसे पहला चर्चित मामला महाराष्ट्र के पालघर से शुरू हुआ। जहां पीट पीटकर संतों की हत्या की गई थी। वीडियो वायरल होने के बाद देश में कई दिनों तक उबाल में था। कार्रवाई के नाम पर लंबी एनक्वायरी हुई लेकिन अभी भी नतीजा सिफर है। ये जरूर हुआ कि पालघर की घटना के बाद देश के कई हिस्सों से पुजारियों और धर्म से जुड़े महानुभावों की हत्याओं की खबरें जोर पकड़ने लगी। मीडिया ने इन खबरों को तवज्जो दिया और इस पर राजनीति भी शुरू हो गई। 

पुजारियों पर हमले के पीछे राजनीति? 

आज साक्षी समाचार पोल में पाठकों से हमने सवाल किया कि क्या यूपी राजस्थान में पुजारियों पर हुए हमले के पीछे राजनीतिक वजहें हो सकती हैं? करीब 70 फीसदी पाठकों ने सहमति जताई। माजरा साफ है, पुजारियों की हत्या या हमले के पीछे तात्कालिक कारण तो मठ मंदिरों की संपत्ति हड़पने की मंशा नजर आती है। जबकि इस मुद्दे पर विपक्षी नेता अपना उल्लू सीधा करने में लगे होते हैं। खासकर गैर बीजेपी शासित राज्यों में इस तरह के हमले को लेकर बीजेपी के कार्यकर्ता खूब माहौल बनाते हैं, और इसे धर्म पर आघात के रूप में प्रोजेक्ट किया जाता है। इन हत्याओं को लेकर सोशल  मीडिया पर भी लंबी चौड़ी बहस होती है, और एक आपराधिक मामले को हिंदू धर्म पर हमले के तौर पर प्रदर्शित किया जाता है। 

राजस्थान में पुजारी की हत्या पर ऐसे हुई राजनीति

राजस्थान के करौली के बूकना गांव में कथित तौर पर जमीन विवाद में पांच लोगों ने पुजारी को जिंदा जलाकर मार डाला। पुलिस अपनी जांच में जुटी है। जबकि बीजेपी के हजारों कार्यकर्ताओं ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया। मजे की बात ये कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के बजाय सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने भी राजनीति शुरू कर दी। शगूफा उड़ाया गया कि मंदिर के पुजारी ने प्रधानमंत्री मोदी की आवास योजना में लाभ नहीं मिलने से निराश होकर आत्मदाह किया है। इस एंगल के आने के बाद तो कांग्रेसी कार्यकर्ता भी मोर्चा पर निकल पड़े। राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच मामले को लेकर बहस जारी है जबकि पुजारियों के परिवारों को असली गुनहगारों के पकड़े जाने का अभी भी इंतजार है। 

यूपी के औरैया में भी दो पुजारियों की हत्या

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में बिधूना कोतवाली इलाके के कुदरकोट गांव में बाबा के मंदिर में सो रहे दो पुजारियों की हत्या की गई थी। पुजारियों को चारपाई में बांधकर धारदार हथियार से काट डाला गया था। घटना में एक अन्य पुजारी बुरी तरह घायल हुए थे। घटना के पीछे दबी जुबान में लोग पशु तस्करों का हाथ बता रहे थे। इस मामले में भी पुलिस के हाथ खाली रहे। राज्य में बीजेपी की सरकार है, लिहाजा धर्म गुरुओं ने पुजारियों की सुरक्षा को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा। घटना को लेकर कांग्रेस पार्टी ने भी खूब राजनीति की। 

कर्नाटक में भी हुई थी 3 पुजारियों की हत्या

कर्नाटक के चर्चित अर्केश्वर मंदिर में भी तीन पुजारियों की हत्याएं की गई थी। इसी साल सितंबर महीने में हुई इन हत्याओं के बारे में कहा गया कि लूटपाट के इरादे से घटना को अंजाम दिया गया है। सरकार ने भी सख्ती दिखाते हुए एलान किया था कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हैरान करने वाली बात ये कि कर्नाटक के इस मामले में भी अपराधी सलाखों के बाहर हैं। 

मठ और मंदिरों की संपत्ति को लेकर हत्याएं

बहुत कम राज्यों में मठ और मंदिरों की संपत्ति को लेकर राज्य स्तर पर प्रबंधन सुनिश्चित हो पाया है। मंदिरों की अकूत संपत्ति पर कई जगह पुजारियों का ही कब्जा है। अयोध्या जैसी धर्मनगरी में तो आए दिन मठों के महंत आपस में अपराधियों की तरह हिंसक होते रहे हैं। वर्चस्व और संपत्ति के लिए पुजारियों का गला काटने से भी अपराधी गुरेज नहीं कर रहे हैं। जबकि मूल समस्या को सुलझाने के बजाय राजनीतिक पार्टियां सियासी गप्पबाजी में ही जुटी होती है। 

ट्रस्ट बनाकर हो मंदिरों की संपत्ति का प्रबंधन 

अब इस बारे में उत्तर भारत के राज्यों को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों से सीख लेनी होगी। जहां मंदिरों की आय और संपत्ति पर पूरी तरह राज्य का नियंत्रण होता है। ऐसी संस्थाएं आंध्र-तेलंगाना राज्य सरकारों ने बनाई है कि संपत्ति या आमदनी पर कोई पुजारी कुंडली मारकर नहीं बैठ सकता। पुजारियों को उनके काम के लिए बकायदा सैलरी मिलती है। साथ ही साफ सुथरे तरीके से पुजारियों की नियुक्ति भी होती है। किसी को भी भगवा पहनकर मंदिर का घंटा बजाने की इजाजत नहीं होती, बल्कि इसके लिए बकायदा परीक्षा पास करनी होती है। 

- विजय कुमार 
 

Advertisement
Back to Top