विकास दुबे एनकाउंटर जैसे मुद्दों पर कानून में सुधार की है दरकार, पुलिस नहीं, राजनीतिक नेतृत्व हों जवाबदेह: प्रकाश सिंह

Political leadership should be accountable on issues like Vikas Dubey Encounter, not Police: Prakash Singh - Sakshi Samachar

नई दिल्ली : कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मुख्य आरोपी विकास दुबे के कथित मुठभेड़ में मारे जाने के बाद एक बार फिर मुठभेड़ों और पुलिस सुधार के मुद्दे ज्वलंत हो गए हैं। इसी विषय पर उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह से किए गए पांच सवाल, जानिए उन्होंने क्या दिए उनके जवाब:

सवाल: विकास दुबे मुठभेड़ और इस तरह के कई अन्य मुठभेड़ों के मामले में प्रथम दृष्टया पुलिस की भूमिका पर सवाल क्यों खड़े हो जाते हैं?
जवाब: ऐसे मामलों में पुलिस पर सवाल खड़े किए जाते हैं। लेकिन समस्या के मूल कारण तक लोग नहीं पहुंचते हैं। आप पहले यह देखिए कि ऐसे अपराधियों को संरक्षण कैसे मिलता है। यह (विकास दुबे) अपराधी 60 अपराध कर चुका था और हो सकता है कि आगे 61वां अपराध करता। लोगों को पुलिस पर सवाल खड़े करने से पहले समस्या की जड़ में जाना चाहिए। मैं फर्जी मुठभेड़ों का समर्थन नहीं कर रहा, लेकिन यह विश्वास पैदा करना होगा कि ऐसे अपराधियों को सजा होगी। इसलिए न्यायिक व्यवस्था में सुधार करने की जरूरत है।

सवाल: क्या फर्जी मुठभेड़ के संदेह के मामलों में तत्काल न्यायिक जांच शुरू नहीं होनी चाहिए?
जवाब: इसमें कोई दिक्कत नहीं है। ऐसे मामलों की जांच मजिस्ट्रेट के स्तर से होती है। आप इसे न्यायिक मजिस्ट्रेट से करा दीजिए। जहां भी फर्जी मुठभेड़ का शक हो, वहां यह पता करने के लिए जांच बैठा देनी चाहिए कि उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन हुआ या नहीं।

सवाल: क्या राज्यों में पुलिस सुधार पर उच्चतम न्यायालय के 2006 के निर्देशों की पूरी तरह अनुपालना हो रही है?
जवाब: सिर्फ कागजों पर इनकी अनुपालना हो रही है, जो दिखावे के लिए है। इसका जमीन पर कोई असर नहीं है। ऐसे प्रावधान कर दिए गए हैं कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश कमजोर हो जाएं। यह कह सकते हैं कि किसी भी राज्य में इनका पूरी तरह अनुपालन नहीं हुआ है।

सवाल: इसका मुख्य कारण क्या है कि इन निर्देशों की सही से अनुपालना नहीं हो पा रही है?
जवाब: इसका कारण यह है कि हर राज्य का राजनीतिक वर्ग और नौकरशाही इसका विरोध कर रहे हैं। उनको लगता है कि अगर इन निर्देशों की अनुपालना हो गई तो पुलिस पर सरकार का नियंत्रण कमजोर हो जाएगा। वे नहीं चाहते कि उनका नियंत्रण कमजोर हो। वे चाहते हैं कि यही व्यवस्था बनी रहे जो अंग्रेज छोड़ गए हैं। जनता की तरफ से भी कोई आवाज नहीं उठती कि पुलिस सुधार एक मुद्दा बन जाए। जब कोई कांड होता है तो संपादकीय में पुलिस सुधार और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लेख भर हो जाता है।

सवाल: न्यायालय के निर्देशों को लेकर अवमानना की जवाबदेही राज्यों में किसकी होनी चाहिए?
जवाब: मैं चार बार उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिका दायर कर चुका हूं। मैं तो कहता हूं कि राजनीतिक नेतृत्व की जवाबदेही हो। एक बार राज्यों के गृह मंत्री के खिलाफ कार्रवाई हो जाए। इसके बाद देखिए कि जल्दी जल्दी काम शुरू हो जाएगा।
—भाषा

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