RIMS का होगा कायापलट, नए निदेशक से झारखंड-बिहार के लोगों को उम्मीद, इलाज के लिए अब नहीं जाना होगा AIIMS

Padmashree Dr Kameshwar Prasad Took Oath as New Director of RIMS - Sakshi Samachar

मरीजों के लिए एम्स जैसा बनेगा रिम्स

रिम्स की खामियों को जल्द करेंगे दूर

बेहतर इलाज और सुविधाएं होंगी मुहैया

रांची: नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पहुंचने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा संख्या बिहार और झारखंड के लोगों की होती है। इसके पीछे वजह यह है कि दोनों ही राज्यों में अच्छे इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं है। लेकिन राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) अस्पताल के नए निदेशक 'पद्मश्री' डॉ. कामेश्वर प्रसाद के आने से दोनों ही राज्यों के लोगों में एक नई उम्मीद दिख रही है।

रविवार को झारखंड राज्य निर्माण दिवस के 20 साल पूरे होने और भगवान बिरसा मुंडा की 145वीं जयंती के मौके पर नई दिल्ली स्थित एम्स में वर्षों तक अपनी सेवाएं दे चुके डॉ. के. प्रसाद ने रिम्स के नए डायरेक्टर का पदभार ग्रहण कर लिया है। गौरतलब है कि पहले यह चर्चा थी कि डॉ. प्रसाद 16 नवंबर को रिम्स के नए स्थायी निदेशक के तौर पर पदभार ग्रहण करेंगे। लेकिन उन्होंने तय तिथि से एक दिन पहले 15 नवंबर रविवार को ही अपना पदभार ग्रहण कर लिया।

झारखंड के लिए बेहद अहम है 15 नवंबर का​ दिन

अपने इस फैसले का कारण बताते हुए डॉ. प्रसाद ने बताया कि झारखंड के लिए 15 नवंबर का​ दिन बेहद अहम है। इस साल तो झारखंडवासियों के लिए यह दोहरी खुशी लेकर आया था। एक तो झारखंड स्थापना दिवस को 20 साल पूरे हो गए थे। दूसरे, झारखंड के भगवान माने जाने वाले बिरसा मुंडा की इस बार 145वीं जन्म​तिथि मनाई जा रही थी। ऐसे खास मौके से अच्छा मुझे अपना नया पद ग्रहण करने के लिए और कोई नहीं दिखा। 

मैं खुद भी झारखंडी हूं

मैं खुद भी झारखंड से हूं। मेरा बचपन रांची, पतरातू, सांकुल, मांडू और हजारीबाग के आसपास ही बीता है। यही नहीं, एमबीबीएस की डिग्री मैंने रिम्स से ही ली है। ऐसे में अपना नया पद ग्रहण करने के लिए मुझे इससे अच्छा दिन कोई और महसूस ही नहीं हुआ। मुझे यकीन है कि भगवान बिरसा मुंडा के आशीर्वाद से हम सभी इस संस्थान को और ऊंचाई तक ले जाएंगे।

एम्स, नई दिल्ली की तर्ज पर बनेगा रिम्स

बता दें कि रिम्स के नए स्थायी निदेशक 'पद्मश्री' डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने रिम्स के 16वें निदेशक के रूप में अपना पदभार संभाला है। रविवार को तकरीबन दोपहर 2 बजे डॉ. प्रसाद देश की राजधानी नई दिल्ली से रांची एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट से उन्होंने सीधे रिम्स का रुख किया और पदभार ग्रहण किया। प्रभारी निदेशक डॉ. मंजू गाड़ी ने उन्हें यह पदभार सौंपा। 

रिम्स निदेशक का पदभार ग्रहण करने के बाद डॉ. प्रसाद ने पत्रकारों के सवालों का जवाब भी दिया। डॉ. प्रसाद ने कहा कि वे रिम्स को एम्स जैसा बनाएंगे। नई दिल्ली स्थित देश के सर्वोच्च चिकित्सा संस्थान एम्स में 40 से ज्यादा वर्षों तक अपनी सेवाएं दे चुके डॉ. प्रसाद ने यह भी साफ कर दिया कि इतने वर्षों तक एम्स से जुड़े रहने के बावजूद ऐसा नहीं है कि उन्हें रिम्स की ​​वास्तविक स्थिति का भान नहीं है।

डॉ. प्रसाद ने कहा कि मूल रूप से झारखंडी होने के कारण वह रिम्स की खूबियों व खामियों के बारे में जानते हैं। इसलिए कह सकते हैं कि यहां बहुत ज्यादा काम करने की जरूरत है, वह भी पूरी पारदर्शिता और सेवाभाव के साथ। जब तक स्वास्थ्यक​र्मी पूरी लगन और मेहनत के साथ अपना काम ईमानदारी से नहीं करेंगे, इस संस्थान को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। इसलिए जरूरत इस बात की है कि हम सभी मिलकर जल्द से जल्द रिम्स को एम्स की तर्ज पर सभी ​सुविधाओं से लैस बनाने के लिए काम करें।

आगे बढ़ने के लिए वह रास्ता बनाएंगे

डॉ. प्रसाद ने आगे कहा कि उनकी पूरी कोशिश होगी कि रिम्स को एम्स दिल्ली की तर्ज पर या उससे भी बेहतर चिकित्सीय संस्थान के रूप में आगे लाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि यह कुछ दिनों में संभव नहीं है। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए वह रास्ता बनाएंगे। संभवत: वह इतने लंबे कार्यकाल तक यहां अपनी सेवाएं न दे पाएं कि संस्थान पूरी तरह से एम्स, दिल्ली की तरह बन जाए। इसके बावजूद उनकी पूरी कोशिश होगी कि रिम्स देश का उत्कृष्ट चिकित्सीय संस्थान बनने की दिशा में कई कदम आगे बढ़ सके।

एम्स ही क्यों, उससे भी कहीं बेहतर चिकित्सा संस्थान

रिम्स में उनकी प्राथमिकताएं क्या होंगी, पूछने पर डॉ. के. प्रसाद ने कहा कि कोशिश रहेगी कि रिम्स देश का एक प्रतिष्ठावान संस्थान बने। देश ही नहीं, विदेशों में भी इसका नाम हो। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड के लोगों ने साल 2002 में एक सपना देखा था कि नई दिल्ली स्थित एम्स की तर्ज पर रिम्स को बनाना है। हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि रिम्स, एम्स ही क्यों, उससे भी कहीं बेहतर चिकित्सा संस्थान के रूप में विकसित हो।

रिम्स की खामियों को जल्द करेंगे दूर

डॉ. प्रसाद ने कहा कि एम्स मरीजों के लिए बेहतर चिकित्सीय सुविधा प्रदान करने वाला अस्पताल मात्र नहीं है, बल्कि चिकित्सकों के लिए बेहतर शिक्षण सुविधा देने वाला और अनुसंधान केंद्र के तौर पर भी स्थापित है। हमारी कोशिश रिम्स को भी इसी दिशा में ​पहुंचाने की होगी। इसके लिए कारगर कदम भी उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश होगी कि रिम्स में मरीजों के लिए सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं ताकि राज्य के मरीजों को एम्स जैसे अस्पतालों में रेफर करने की जरूरत ही न पड़े। डॉ. प्रसाद ने यह भी कहा कि रिम्स की खामियों को जल्द से जल्द दूर करने के लिए वह निरंतर प्रयासरत रहेंगे।

रिक्त पदों पर होगी बहाली

डॉ. प्रसाद ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि रिम्स में सभी रिक्त पदों पर जल्द ही बहालियां की जाएंगी। आने वाले समय में मरीजों को अस्पताल में ही जांच सुविधा मुहैया कराने पर भी जोर दिया जाएगा।  रिम्स के नए निदेशक से एक सवाल उनके निवास को लेकर भी किया गया। 

लालू यादव खाली करेंगे बंगला?

जब संवाददाताओं ने डॉ. प्रसाद से पूछा कि उनके बंगले में तो सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव इलाजरत हैं तो क्या अब उन्हें कहीं और रखने की व्यवस्था की जाएगी? इस सवाल के जवाब में डॉ. प्रसाद ने कहा, फिलहाल तो मैं यहां सिर्फ एक बैग के साथ आया हूं। अभी गेस्ट हाउस में रहुंगा। फिर देखा जाएगा कि आगे कहां रहना है? 

रिम्स निदेशक के खाली बंगले में लालू प्रसाद को रखे जाने के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में डॉ. प्रसाद ने कहा कि किन परिस्थितियों में उन्हें वहां रखा गया है और आगे क्या करना सही होगा, इन सभी बातों की जानकारी हासिल करने के बाद वे इस पर कोई फैसला लेंगे।

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