ओडिशा हाई कोर्ट ने दिया सुझाव- भारतीयों को भी मिले राइट टू बी फॉरगॉटन

Orissa High Court bats for Right To be Forgotten over Online women crimes - Sakshi Samachar

नई दिल्ली: आए दिन आपको खबरें पढ़ने और सुनने को मिलती होंगी कि फलां जगह पर एक लड़के ने लड़की के मुंह पर ऐसिड डाला या किसी ने अपनी गर्लफ्रेंड(Girlfriend) की पर्सनल फोटो इंटरनेट में अपलोड की। जब कोई अपने पार्टनर से बदला लेने के लिए किसी भी हद तक चला जाए, इसी को ही कहते हैं रिवेंज क्राइम(Revenge Crime)। इन दिनों बदला लेने की ये प्रवृति बेहद कॉमन होती जा रही है। 

आजकल बदले के तौर पर आपत्तिजनक फोटो, वीडियो का इस्तेमाल करने के मामले देखे जा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान ये समस्या काफी बढ़ी, जो एक चिंता का विषय है। अब इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए ओडिशा (Odisha) हाई कोर्ट ने एक सुझाव दिया है, जिसके तहत अगर कोई आपत्तिजनक वीडियो या तस्वीर इंटरनेट पर अपलोड की गई हो, तो पीड़ित के पास राइट टु बी फॉरगॉटन(Right to be forgotten) का प्रावधान होना चाहिए।

ओडिशा हाई कोर्ट जज का सुझाव

यूरोपीय देशों में नागरिकों को राइट टु बी फॉरगॉटन का अधिकार है। ओडिशा हाई कोर्ट भारत की पहली ऐसी संवैधानिक कोर्ट है जिसने भारतीय नागरिकों को ये अधिकार देने के लिए अवाज उठाई है। जस्टिस एसके पाणीग्रही ने इस पर तर्क देते हुए कहा कि पीड़ित के पास अपने खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री परोसे जाने पर राइट टु फॉरगॉटन को इस्तेमाल करने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले 'निजता का अधिकार' का ही अंग बनाना जा सकता है। 

यूरोपीय देशों में है अधिकार 
भारत इस मामले में यूरोप के अनुभवों से सीख सकता है। यूरोपियन डेटा प्राइवेसी लॉ, द जीडीपीआर, नागरिकों को फेसबुक, यूट्यूब समेत किसी भी संस्था से बोलकर या लिखकर संबंधित कंटेंट हटाने का आग्रह करने का अधिकार देता है। इस आग्रह पर ऑनलाइन प्लैटफॉर्म विचार करेगा कि क्या वो कंटेंट हटाने को बाध्य है या नहीं। हालांकि, ऐसे कानून की कड़ी निगरानी की भी दरकार होगी। उदाहरण के तौर पर गूगल ने फ्रांस की डेटा अथॉरिटी सीएनआईएल के खिलाफ दायर याचिका पर कहा कि राइट टु बी फॉरगॉटन का अबाधित इस्तेमाल सूचना प्राप्त करने के नागरिकों के अधिकार का हनन कर सकता है।

क्या है रिवेंज क्राइम
ये एक तरह का ऑनलाइन शोषण है, जिसमें सोशल साइट्स पर लोग अपने एक्स पार्टनर की निजी तस्वीरें या विडियो सबके सामने ले आते हैं। अपने एक्स पार्टनर से बदला लेने के लिए अगर व्यक्ति कोई घिनौना और घटिया रास्ता अपनाता है, तो उसे कहा जाता है रिवेंज क्राइम या रिवेंज पॉर्न। इसमें बदला लेने का जूनून व्यक्ति में इस कदर हावी रहता है कि वो उस हद तक चला जाता है कि जितना घटिया चीज वो अपने पार्टनर के लिए कर सकता है, करता है। इसमें उसका मकसद उसे अधिक से अधिक दुख पहुंचाना होता है। किसी की भी निजी जिंदगी अगर पब्लिक प्लैटफॉर्म पर ला दी जाए, तो वो इंसान सिवाय शर्मिंदगी के कुछ नहीं महसूस कर पाता है।

बनता है डिप्रेशन की वजह 
कई बार रिवेंज पॉर्न डिप्रेशन और आतमहत्या की वजह भी बन जाता है। रिवेंज पॉर्न का असर शर्मिंदगी और आघात से ज्यादा होता है, जो लोग इसे बर्दाश्त नहीं कर पाते वो अक्सर डिप्रेशन, सामाजिक अलगाव के शिकार होते हैं और आत्महत्या का प्रयास भी करते हैं। रिवेंज पॉर्न की पीड़ित सबसे ज्यादा महिलाएं होती हैं। पीड़ितों में करीब 93% पीड़ितों का कहना है कि इसका शिकार होने के बाद वो भावनात्मक रूप से पूरी तरह टूट चुकी हैं।

कानूनी मदद लेने में है भलाई
भारत में इस तरह के क्राइम को लेकर आईटी ऐक्ट 2008 के अंतर्गत कार्रवाई की जाती है। सेक्शन 67ए के तहत सेक्सुअल मैटीरियल को प्रसारित करने पर 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।

किसी भी व्यक्ति की गोपनीयता के उल्लंघन करने (जानबूझकर किसी की तस्वीर बिना आज्ञा के प्रसारित करना, जिससे व्यक्ति की निजिता खत्म होती हो ) पर सजा दिलवाने के लिए आईटी ऐक्ट 2008 के सेक्शन 66 ई का इस्तेमाल किया जा सकता है। सेक्शन 354 सी और 66 ई के तहत तीन साल की सजा या दो लाख का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 504, 506 और सेक्शन 500(मानहानि) के तहत भी शिकायत दर्ज की जा सकती है, सेक्शन 354-सी केवल महिलाओं के लिए है, जबकि बाकी पुरुषों पर भी लागू होते हैं। क्योंकि रिवेंज पॉर्न के पीड़ित केवल महिलाएं नहीं, पुरुष भी हैं। सोशल मीडिया साइट्स की खास बात ये भी है कि यहां आप खुद भी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। फेसबुक पर 'रिपोर्ट' फीचर इसी काम आता है।

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