मोदी ने इस्तेमाल किया अपना सबसे बड़ा हथियार, 2 घंटे की बातचीत में गलवान से पीछे हटी चीनी सेना

NSA Ajit Doval and Chinese State Councillor Wang Yi Meeting Over India-China border Issue - Sakshi Samachar

चीन की सेना गलवान घाटी के कुछ हिस्सों से हटी पीछे

चीनी सेना गश्त बिंदु 14 पर लगाए गए तंबू एवं अन्य ढांचे हटाते दिखे

दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के तहत चीनी सैनिकों ने पीछे हटना शुरू किया

नई दिल्ली : भारत-चीन सीमा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बातचीत के बावजूद लद्दाख में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरकार अपने सबसे बड़े कूटनीतिक हथियार का प्रयोग किया। प्रधानमंत्री की यह कोशिश रंग भी लाई और चीन को झुकना पड़ा। रविवार को हुई दोनों पक्षों की बातचीत के बाद चीनी सैनिक एलएसी से पीछे हट गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक व्यक्ति का दिमाग बताया जा रहा है, जिसने दो घंटे बातचीत के जरिए 'ड्रैगन' को झुकने पर मजबूर कर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में लद्दाख दौरे पर गए थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से करीब 30 मिनट की मुलाकात की। इसके बाद ही केंद्र सरकार ने चीन के खिलाफ मोर्चे पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को लगा दिया। पिछले दिनों घटे पूरे घटनाक्रम के दौरान अजीत डोभाल सामने नहीं आए थे।

अजीत डोभाल ने संभाला मोर्चा

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रविवार को चीनी समकक्ष वांग यी के साथ करीब दो घंटे तक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक की थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस बातचीत के बाद चीन के पास पीछे हटने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था। बातचीत में गलवान घाटी में तनाव कम करने पर सहमति बनी।

सीमा पर शांति बनाए रखने पर सहमति

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों ही देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने बातचीत की। भारत के आक्रामक रुख और चारों तरफ से खुद को घिरता देख चीन के पास और कोई रास्ता नहीं बचा था। दोनों पक्षों की बातचीत एक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। दोनों ही पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि भविष्य में गलवान घाटी जैसी स्थिति न दोहराई जाए और सीमा पर तनाव कम किया जाए।

सीमा से पीछे हटे चीनी सैनिक

सरकारी सूत्रों ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि चीन की सेना गलवान घाटी के कुछ हिस्सों से तंबू हटाते और पीछे हटती दिखी है। क्षेत्र में सैनिकों के पीछे हटने का यह पहला संकेत है। सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के तहत चीनी सैनिकों ने पीछे हटना शुरू किया है। उन्होंने कहा कि चीनी सेना गश्त बिंदु 14 पर लगाए गए तंबू एवं अन्य ढांचे हटाते हुए देखी गई है।

सूत्रों ने कहा कि गोगरा हॉट स्प्रिंग इलाके में भी चीनी सैनिकों के वाहनों की इसी तरह की गतिविधि देखी गई है। भारतीय और चीनी सेना के बीच पिछले सात हफ्तों से पूर्वी लद्दाख के कई इलाकों में गतिरोध जारी है। गलवान घाटी में 15 जून को हुई हिंसक झड़प के बाद तनाव कई गुणा बढ़ गया था, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। चीन के सैनिक भी इस झड़प में हताहत हुए थे, लेकिन उसने अब तक इसके ब्योरे उपलब्ध नहीं कराए हैं। 

भारत के आक्रामक रुख के आगे चीन बेबस

गलवान घाटी में बढ़े विवाद के बाद भारत का आक्रामक रुख देखकर चीन पीछे हटने को मजबूर हो गया है। सामरिक, आर्थिक और कूटनीतिक तीनों मोर्चो पर विफल रहने के बाद चीन के पास और कोई रास्ता भी नहीं बचा था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने चीन के खिलाफ भारत का साथ देने का फैसला किया है।

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