रबी फसलों की MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी, कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने दी मंजूरी

Narendra Modi Cabinet approves increase in MSP of Rabi Crops - Sakshi Samachar

नई दिल्ली : कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों को मानते हुए मोदी सरकार ने रबी की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि करने का फैसला कर लिया है।  कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने मंजूरी दी।  मोदी सरकार ने कृषक उत्पादों की बिक्री के लिए राज्यों के कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) कानून के तहत संचालित मंडियों के अलावा एक वैकल्पिक चैनल मुहैया करने के लिए नया कानून बनाया है। नये कानून में गेहूं, चावल या अन्य मोटा अनाज, दालें, तिलहन, खाद्य तेल, शाक-सब्जी, फल, मेवा, मसाले, गन्ना और कुक्कुट, सूअर, बकरी, मछली और डेरी उत्पाद सहित ऐसे खाद्य पदार्थ, जिनका नैसर्गिक या प्रसंस्कृत रूप में मानव उपभोग करता है, उनको कृषक उत्पाद कहा गया है।

क्या है एमएसपी
किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था लागू है। अगर कभी फसलों की कीमत बाजार के हिसाब से गिर भी जाती है, तब भी केंद्र सरकार तय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही किसानों से फसल खरीदती है ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके। किसी फसल की एमएसपी पूरे देश में एक ही होती है और इसके तहत अभी 23 फसलों की खरीद की जा रही है। कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कृषि लागत और मूल्य आयोग ( कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेस CACP) की अनुशंसाओं के आधार पर एमएसपी तय की जाती है।

कैसे तय की जाती है एमएसपी
कृष‍ि लागत और मूल्य आयोग न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की सिफारिश करता है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखकर दाम को तय किया जाता है।
- उत्पाद की लागत क्या है।
- फसल में लगने वाली चीजों के दाम में कितना बदलाव आया है।
- बाजार में मौजूदा कीमतों का रुख।
- मांग और आपूर्ति की स्थ‍िति।
 

केंद्रीय मंत्री ने कही यह बात
केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बार-बार दोहराया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद पहले की तरह जारी रहेगी। मोदी सरकार का दावा है कि कोरोना काल में लाए गए कृषि से जुड़े तीन अहम अध्यादेश किसानों के हित में है। इन तीनों अध्यादेशों की जगह संसद के चालू मानसून सत्र में लाए गए तीन विधेयकों में से दो को संसद की मंजूरी मिल चुकी है और तीसरे विधेयक को लोकसभा में पारित होने के बाद राज्यसभा की मुहर में मंजूरी मिल गई।

उन्होंने राज्यसभा में दोनों विधेयकों पर चर्चा के दौरान रविवार को बताया कि वर्ष 2009-14 की तुलना में, पिछले पांच साल में दलहनी फसलों के लिए किसानों को एमएसपी भुगतान 75 गुना बढ़ा है। गत 5 साल में, 645 करोड़ रुपये के मुकाबले, 49,000 करोड़ रुपये एमएसपी का भुगतान किया गया है। इसी तरह वर्ष 2009-14 की तुलना में, पिछले पांच वर्षों के दौरान तिलहनों व कोपरा के किसानों के लिए एमएसपी भुगतान 10 गुना बढ़ा है। पिछले 5 साल में, 2460 करोड़ रुपये के मुकाबले 25,000 करोड़ रुपये एमएसपी भुगतान किया गया।

तोमर ने बताया कि इस साल रबी-2020 में गेहूं, धान, दलहन और तिलहन को मिलाकर किसानों को एक लाख 13 हजार करोड़ रुपये एमएसपी के रूप में भुगतान किया गया। यह राशि पिछले साल की तुलना में 31 फीसदी ज्यादा है।

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