मायावती के पिता प्रभु दयाल का निधन, कभी राजनीति में आने पर बेटी से तोड़ लिया था नाता

Mayawati father Prabhu Dayal father passed away  - Sakshi Samachar

लखनऊ: BSP सुप्रीमो मायावती के पिता प्रभु दयाल का 95  साल की उम्र में निधन हो गया है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री का पिता के प्रति गहरा लगाव रहा है। ये अलग बात है कि जब मायावती ने टीचर की नौकरी छोड़कर कांशीराम के साथ राजनीति में कदम रखा था, तब प्रभुदयाल बेहद नाराज हुए थे। यहां तक कि उन्होंने बेटी से बातचीत भी बंद कर दिया था। आखिरकार जब बेटी ने उत्तर  प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान थामी, तब प्रभुदयाल ने मिठाई खिलाकर उन्हें शुभकामनाएं दी थी। 

प्रभुदयाल ने दिल्ली में सरकारी कर्मचारी के तौर पर अपनी सेवाएं दी थीं। दूरसंचार विभाग में क्लर्क की नौकरी करते हुए उन्होंने 10 सदस्यों वाले कुनबे का पालन पोषण किया। प्रभुदयाल की शादी रामरती देवी से हुई थी। दिल्ली में रहते हुए ही बेटी मायावती सहित बाकी बच्चों का का जन्म सरकारी अस्पताल में हुआ था। मायावती की मां रामरती पढ़ी लिखी नहीं थीं। परिवार में आर्थिक अभाव के बावजूद माता-पिता ने बेटी की पढ़ाई लिखाई में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इसी दम पर कभी मायावती ने आईएएस बनने का सपना देखा था। छह भाई और दो बहनों के बीच मायावती सामाजिक विचारधारा के प्रति काफी सजग रहती थीं। 

बसपा मीडिया सेल ने निधन की आधिकारिक जानकारी दी

BSP के मीडिया सेल ने पत्र जारी कर मायावती के पिता के निधन का समाचार दिया है। बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा की ओर से जारी पत्र में प्रभु दयाल के निधन पर गहरे शोक का इजहार किया गया। यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के पिता के निधन पर पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं की ओर से दुख व्यक्त किया है। पत्र में लिखा गया है, ''अत्यंत खेद के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के पिता प्रभु दयाल दी का आज, 19 नवंबर को स्वर्गवास हो गया है. बहुजन समाज पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की ओर से यही प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति और शोक संतृप्त परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें.''


परिवार और पिता के साथ मायावती की फोटो (लाल घेरे में)

प्रभुदयाल का गांव से शहर तक का सफर 

मायावती के पिता यूपी के गौतमबुद्ध नगर जिले के बादलपुर से दिल्ली नौकरी करने आए थे। आठ बच्चों के परिवार को क्लर्क की नौकरी करते हुए संभालना काफी मुश्किल था। इसके लिए प्रभुदयाल ने कड़ी मेहनत की और बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई। हालांकि राजनीति के प्रति प्रभुदयाल का कभी झुकाव नहीं रहा। बीएड करने के बाद जब मायावती ने दिल्ली के एक स्कूल में टीचर की नौकरी शुरू की थी। तब पिता प्रभुदयाल काफी खुश हुए थे। बाद में मायावती की सामाजिक गतिविधियों को लेकर उनकी नाराजगी सार्वजनिक हुई थी। यहां तक कि कई सालों तक उन्होंने बेटी से बातचीत करनी भी बंद कर दी थी। 

उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती की बचपन से ही समाजसेवा को लेकर रुझान रहा है। जब वे आठवीं क्लास में थीं तब एक बार उन्होंने पिता प्रभुदयाल से सवाल किया था कि अगर वे बाबा साहेब अंबेडकर की तरह काम करेंगी तो क्या उनकी पुण्यतिथि मनाई जाएगी। पिता ने उस वक्त मासूम की बात पर तवज्जो नहीं दिया था। मायावती जैसे जैसे राजनीति में स्थापित होती गईं, वैसे वैसे पिता को पक्का विश्वास होता चला गया कि उनकी बेटी समाज के दबे कुचलों के लिए मुकम्मल आवाज हैं। वो दिन दूर नहीं जब बाबा साहेब अम्बेडकर के साथ मायावती के प्रति भी लोग श्रद्धाभाव रखेंगे। मायावती के आजीवन अविवाहित रहने के फैसले को लेकर शुरुआत में प्रभुदयाल सहमत नहीं थे। वक्त के साथ उन्होंने बेटी के जुनून को सराहा। अंत समय तक प्रभुदयाल को बेटी से कोई नाराजगी नहीं थी। 

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