आंदोलनकारी कार्यकर्ता से ऐसे एक माहिर राजनीतिक खिलाड़ी बन गये अरविंद केजरीवाल

Know Unknown Facts About Arvid Kejriwal Birthday  - Sakshi Samachar

कई राजनेता हुए नाराज 

ऐसे बदली केजरीवाल की जिंदगी

आईएस ट्रेनिंग के दौरान मिली जीवनसंगिनी

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का जन्मदिन देश के आजादी के ठीक एक दिन बाद है। यानी वह 16 अगस्त को अपना 52वां जन्मदिन मनाएंगे। एक साधारण परिवार से आने वाले अरविंद केजरीवाल की पहचान अन्ना आंदोलन से मिली। और अपना सियासी पार्टी बनाकर दिल्ली विधानसभा के चुनाव लड़े और धमाकेदार जीत मिली।  साल 2014 में दिल्ली विधानसभा चुनावों में 70 में से 67 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी ने सभी राजनीतिक पार्टियों को दिन में तारे दिखा दिए थे और इस बात के संकेत दे दिए थे कि वह सत्ता पर किसी ऐसे शख्स को बैठाना चाहती है जो उनकी समस्य़ाओं को न सिर्फ सुने बल्कि महसूस भी करें।  

मिशनरीज स्कूल में की पढ़ाई

अरविंद केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त 1968 को हरियाणा के हिसार में हुआ था। उनके पिता गोविंद राम जिंदल स्ट्रिप्स में बतौर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर कार्य किया करते थे। एक साधारण परिवार के मुखिया गोविंद राम के तीन बेटे और बेटियां हैं। अरविंद केजरीवाल ने अपनी प्राथमिक शिक्षा मिशनरीज स्कूल में पूरी की है। मिशनरीज स्कूल में पढ़ाई के कारण बचपन से ही उनका चर्च में प्रार्थना करने के प्रति काफी लगाव रहा है। चर्च के अलावा घर में हिंदू रीति रिवाज से पूजा देखने के कारण उनका धार्मिक लगाव काफी ज्यादा है।  

आईआईटी में की नौकरी

साधारण परिवार से आने के कारण अरविंद केजरीवाल ने 1985 में आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई पूरी की और जैसा की एक साधारण व्यक्ति करता है कोर्स खत्म होने के बाद उन्होंने 1989 में टाटा स्टील जमशेदपुर में नौकरी की। हालांकि केजरीवाल ने यह नौकरी तीन साल तक की। इसके बाद उन्होंने सिविल एक्जाम की तरफ ध्यान लगाने के लिए 1992 में नौकरी छोड़ दी। 

नौकरी छोड़ने के बाद केजरीवाल ने कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी का रुख किया। यहां वे मदर टेरेसा से मिले। अलग-अलग ब्योरों में केजरीवल बताते हैं कि इसका उनके जीवन पर गहरा असर हुआ। केजरीवाल ने मिशनरीज़ ऑफ चेरिटी, रामकृष्ण मिशन में बतौर वॉलेंटियर अपनी सेवाएं दी। वे नेहरू युवा केंद्र से भी जुड़े रहे।  

आईएस ट्रेनिंग के दौरान मिली जीवनसंगिनी

नौकरी छोड़ने के बाद केजरीवाल ने दोबारा से पढ़ाई शुरू की और आईआरएस एग्जाम दिए। अब इसे मेहनत कह लीजिए या फिर किस्मत का खेल केजरीवाल ने महज एक कोशिश में एग्जाम पास कर गया और आईआरएस अधिकारी बने। इसके बाद उन्होंने आईएस बनने के लिए एग्जाम दिए। 1993 में मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान उनकी मुलाकात अपनी साथी आइआरएस अधिकारी सुनीता से हुई। फिर दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ता गया। फिर ट्रेनिंग पूरी होने के बाद केजरीवाल की पोस्टिंग दिल्ली में हुई और उन्होंने इसी दौरान सुनीता से शादी की।   

'परिवर्तन'' नामक एनजीओ का गठन किया

 केजरीवाल ने अगले पांच साल तक दिल्ली में अलग-अलग पदों पर नौकरी की। नौकरी में ही रहते हुए उन्होंने मनीष सिसोदिया के साथ ''परिवर्तन'' एनजीओ का गठन किया। यह एनजीओ दिल्ली के सुंदर नगर इलाके में काम करता था। परिवर्तन लोगों की टैक्स फाइलिंग, पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम से जुड़ी दिक्कतों में मदद करता था और भ्रष्टाचार के खिलाफ कैंपेन में भूमिका निभा रहा था। इसे बनाने के कुछ समय बाद केजरीवाल ने दो साल के लिए पढ़ाई करने के लिए नौकरी से छुट्टी ले ली। उन्हें इस शर्त पर छुट्टी दी गई कि वे लौटकर कम से कम तीन साल तक सरकारी सेवा करेंगे या फिर इस बीच मिली हुई सैलरी लौटाएंगे।  दो साल बाद, नवंबर 2002 में केजरीवाल ने दोबारा सर्विस ज्वाइन कर ली। केजरीवाल का कहना है कि अगले 18 महीने तक उन्हें कोई पद ही नहीं दिया गया। बस वे कहने को नौकरी में थे।  

ऐसे बदली केजरीवाल की जिंदगी

अरविंद केजरीवाल शुरुआत से ही किस्मत के धनी रहे अगर ऐसा कहा जाए तो गलत नहीं होगा। दरअसल, 2006 में केजरीवाल को आरटीआई एक्ट के लिए रमन मैगसेसेय अवार्ड से सम्मानित किया गया। 2005 में केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया और अभिनंदन शेखरी के साथ मिलकर पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन का गठन किया। उन्होंने मैग्सेसे पुरस्कार में मिले पैसे को इस संगठन का आधार बनाया। इस फाउंडेशन के ट्रस्टी के तौर पर प्रशांत भूषण और किरण बेदी भी शामिल थे। फिर समाजसेवी अन्ना हजारे के संपर्क में आए। इसके बाद उन्होंने लोकपाल बिल के लिए जंग शुरू की।  

2012 में किया आम आदमी पार्टी का गठन

दिल्ली के रामलीला मैदान में लोकपाल बिल के लिए जंग छेड़ने के बाद केजरीवाल ने 2012 में राजनीतिक पार्टी की शुरुआत की और आम आदमी पार्टी का गठन किया। हालांकि आम आदमी पार्टी के गठन से किरण बेदी और अन्ना हजारे जैसे लोग केजरीवाल से नाराज हो गए। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते रहे। आम आदमी पार्टी ने 2013 में दिल्ली चुनाव में हिस्सा लिया। चुनाव में पार्टी ने 28 सीटें जीतीं । खुद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को 25,864 वोटों से हराया। आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के आठ सदस्यों, जनला दल के एक सदस्य और एक निर्दलीय सदस्य की मदद से अल्पमत की सरकार बनाई। लेकिन यह सरकार ज्यादा दिन तक नहीं चली।

कई राजनेता हुए नाराज 

2014 में हुए लोकसभा चुनाव में केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव भी लड़ा। लेकिन वे तीन लाख सत्तर हजार के बड़े मार्जिन से बुरे तरीके से हार गए। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी के चार प्रत्याशी चुनाव जीतने में कामयाब रहे। आखिरकार 2015 में दिल्ली में विधानसभा चुनावों में केजरीवाल ने जबरदस्त जीत दर्ज की। कांग्रेस पार्टी का चुनावों में पूरी तरह खात्मा हो गया। भाजपा महज तीन सीटों तक सिमटकर रह गई। आम आदमी पार्टी को 70 में से 67 सीटों पर जीत मिली।  

अगले पांच सालों में से शुरूआती तीन साल दिल्ली सरकार के लिए बहुत उथल-पुथल भरे रहे। कभी केंद्र सरकार, तो कभी एलजी से टकराव की खबरें आम थीं। केजरीवाल अकसर केंद्र सरकार पर काम न करने देने का आरोप लगाते।  इतना ही नहीं उनके कई पूराने साथी उनका साथ छोड़ दीये, कुछ भाजपा में भी शामिल हो गए। लेकिन केजरीवाल को कोई डिगा नहीं पाया। इस दौरान उनकी ''मुफ्त बिजली और पानी'' की सुविधाएं काफी लोकप्रिय हुईं। दिल्ली के स्कूलों में इनोवेशन और मोहल्ला क्लीनिक के उनके कामों की भी लोगों ने तारीफ कीं। 

साल  2020 में इन्हीं मुद्दों पर उन्होंने चुनाव लड़ा और भाजपा जैसी भारी-भरकम चुनावी मशीनरी को दिल्ली में बुरे तरीके से पस्त कर दिया।  

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