अर्नब गोस्वामी को SC ने दी जमानत, महाराष्ट्र सरकार को लगाई फटकार

Justice Chandrachud comment on Arnab Goswami's bail plea - Sakshi Samachar

अर्नब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

सोशल मीडिया पर अर्नब के पक्ष में सपोर्ट 

महाराष्ट्र सरकार की हुई किरकिरी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी और बाकी आरोपियों की अंतरिम ज़मानत मंजूर करते हुए रिहा करने का आदेश दिया है। जस्टिस चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की बेंच ने इस मामले पर महाराष्ट्र सरकार के रवैये को लेकर टिप्पणियां भी की। 

बता दें कि अर्नब गोस्वामी को 2018 में इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां की आत्महत्या से संबंधित मामले में चार नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। अर्नब गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में बॉम्बे हाई कोर्ट के नौ नवंबर के आदेश को चुनौती दी थी। जिसमें उन्हें और दो अन्य आरोपियों- फिरोज शेख और नीतीश सारदा- को अंतरिम जमानत देने से इंकार करते हुये कहा गया था कि इसमें हमारे असाधारण अधिकार का इस्तेमाल करने के लिये कोई मामला नहीं बनता है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। खुदकुशी के लिए उकसाने के मामले में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने सुनवाई की। जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस दौरान महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि ये मामला गंभीर है कोर्ट का दखल देना वाजिब है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, 'आप विचारधारा में भिन्न हो सकते हैं लेकिन संवैधानिक अदालतों को इस तरह की स्वतंत्रता की रक्षा करनी होगी वरना तब हम विनाश के रास्ते पर चल रहे हैं। अगर हम एक संवैधानिक अदालत के रूप में कानून नहीं बनाते और स्वतंत्रता की रक्षा नहीं करते हैं तो कौन करेगा?'

जस्टिस चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की, 'हो सकता है कि आप उनकी (अर्नब) विचारधारा को पसंद नहीं करते। मुझ पर छोड़ें, मैं उनका चैनल नहीं देखता लेकिन अगर हाईकोर्ट जमानत नहीं देती है तो नागरिक को जेल भेज दिया जाता है। हमें एक मजबूत संदेश भेजना होगा। पीड़ित निष्पक्ष जांच का हकदार है। जांच को चलने दें, लेकिन अगर राज्य सरकारें इस आधार पर व्यक्तियों को लक्षित करती हैं तो एक मजबूत संदेश को बाहर जाने दें।'

इस मामले में महाराष्ट्र सरकार का पक्ष जाने माने वकील कपिल सिब्बल ले रहे हैं। सिब्बल ने कोर्ट में सवाल उठाया तो उन्हें टिप्पणी के तौर पर काफी कुछ सुनना पड़ा, 'एक ने आत्महत्या की है और दूसरे के मौत का कारण अज्ञात है। गोस्वामी के खिलाफ आरोप है कि मृतक के कुल 6.45 करोड़ बकाया थे और गोस्वामी को 88 लाख का भुगतान करना था। एफआईआर का कहना है कि मृतक 'मानसिक तड़पन' या मानसिक तनाव से पीड़ित था? साथ ही 306 के लिए वास्तविक उकसावे की जरूरत है। क्या एक को पैसा दूसरे को देना है और वे आत्महत्या कर लेता है तो ये उकसावा हुआ? क्या किसी को इसके लिए जमानत से वंचित करना न्याय का मखौल नहीं होगा?

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि 'हमारा लोकतंत्र असाधारण रूप से लचीला है। पॉइंट है कि सरकारों को उन्हें (टीवी पर ताना मारने को) अनदेखा करना चाहिए. आप (महाराष्ट्र) सोचते हैं कि वे जो कहते हैं, उससे चुनाव में कोई फर्क पड़ता है?'

उद्धव सरकार पर बदले की कार्रवाई का आरोप 

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार पर बदले की कार्रवाई के तहत रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार करवाने का आरोप लगाया जा रहा है। इस मामले में बुद्धिजीवियों के साथ ही आम जनता भी सोशल मीडिया पर गोलबंद होती नजर आ रही है। जिस तरह से कोर्ट ने टिप्पणियां की हैं उससे साफ लगता है कि अर्नब की जमानत अब दूर नहीं। साथ ही महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार को भी इस मामले में जवाब देना होगा। 

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