Jayalalithaa : जब जयललिता ने कहा, पत्नी तो नहीं बन सकी पर 'अम्मा' बनकर जरूर मरुंगी

Jayalalithaa Birthday : Know About Her Political Journey - Sakshi Samachar

24 फरवरी 1948 को हुआ था जयललिता का जन्म

जयललिता ने करीब 300 फिल्मों में किया था काम

साल 1982 में राजनीति में आने के बाद बनीं 5 बार सीएम

हैदराबाद : तमिलनाडु (Tamil Nadu) की राजनीति में 'अम्मा' के नाम से राज करने वालीं जयललिता (Jayalalithaa) का आज जन्मदिन है। पांच बार मुख्यमंत्री बनने वालीं जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 को हुआ था। जयललिता की शख्सियत ऐसी थी कि न सिर्फ तमिलनाडु में बल्कि देश के कोने-कोने में उन्हें पसंद करने वाले थे। वह हमेशा कहती थी कि उनकी जिंदगी एक खुली किताब है, लेकिन कई ऐसे किस्से थे, जिसे लोग आज भी बड़ी दिलचस्पी से सुनते हैं।

राजनीति से पहले जयललिता फिल्मी पर्दे पर जनता का दिल जीत चुकी थीं। दक्षिण के सिनेमा में जयललिता बेहद सफल रहीं। दक्षिण भारत की फिल्मों में पर्दे पर स्कर्ट पहनने वाली जयललिता पहली एक्ट्रेस थीं। उन्होंने करीब 300 फिल्मों में काम किया। 

कई भाषाओं की फिल्मों में किया काम

जयललिता 15 वर्ष की आयु में कन्नड़ फिल्मों में मुख्‍य अभिनेत्री की भूमिकाएं करने लगी थी। कन्नड भाषा में उनकी पहली फिल्म 'चिन्नाडा गोम्बे' है जो 1964 में रिलीज की गई थी। उसके बाद जयललिता ने तमिल फिल्मों में भी कई अभिनय किए। उन्होंने लगभग 300 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया है। उन्होंने तमिल, कन्नड़ के अलावा हिन्दी, अंग्रेजी और तेलुगु फिल्मों में भी काम किया है।

सियासत में एंट्री

जयललिता साल 1982 में सक्रिय राजनीति में आ गईं। 1984 में एमजीआर ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। एमजीआर के सहयोग से जयललिता ने राजनीति में भी बड़ी जल्दी कामयाबी पा ली। एमजीआर जबबीमार पड़े तो उनकी गैरमौजूदगी में जयललिता ने पूरी पार्टी संभाली और एमजीआर की राजनीतिक वारिस बनीं। 

जयललिता 24 जून 1991 से 12 मई 1996 तक राज्य की पहली निर्वाचित मुख्‍यमंत्री और राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री रहीं। अप्रैल 2011 में जब 11 दलों के गठबंधन ने 14वीं राज्य विधानसभा में बहुमत हासिल किया तो वे तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने 16 मई 2011 को मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लीं और तब से वे राज्य की मुख्यमंत्री पद पर रहीं। 

बेबाकी से देती थीं हर सवाल का जवाब 

जयललिता अपनी स्पष्टवादिता और बेबाकी के लिए जानी जाती थीं। वो जब कोई फैसला ले लेतीं तो उसके लिए जी-जान लगा देती थीं। विषम परिस्थितियों में पराजय का मुंह देखने पर भी वो तब तक आराम नहीं करती थीं जब तक कि उसे फिर से जीत में न बदल दिया जाए। उनकी क्षमताओं पर दूसरे लोगों को संदेह हो सकते थे लेकिन खुद पर उन्हें पूरा भरोसा था।

राजनीतिक ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन को लेकर किए गए सवालों का भी वो बेझिझक होकर जवाब दिया करती थीं। 1999 में एक अंग्रेजी चैनल ने उनका इंटरव्यू लिया और उनसे सवाल किया गया कि क्यों उनके जीवन के हर मोड़ में अफवाहें उड़ती रही हैं। इस सवाल का जयललिता ने बड़े ही गंभीर अंदाज में जवाब दिया था।

उन्होंने कहा था, "मैं अपनी निजी जिंदगी में विफल हो गई। मेरी जिंदगी एक खुली किताब की तरह है। एमजीआर को हर कोई प्यार करते हैं। मैंने भी वहीं किया। लेकिन कानूनी संबंध (विवाह) के लिए मैं राजी नहीं हुई थी। तभी से मेरे अंदर एक जिद सी पैदा हुई कि मुझे खुद का सम्मान करना चाहिए। मैं अक्सर यह सोचकर चिंता करती हूं कि ऐसी मुश्किल परिस्थितियों में अगर मेरी मां जिंदा होतीं तो मेरी निजी जिंदगी जरूर कुछ और ही होती।" 

जयललिता ने आगे कहा कि मैंने तय कर लिया कि मेरी पहचान एमजीआर के तौर पर हो। इसीलिए राजनीति में कदम रखा। भारतीय परंपरा के हिसाब से हर लड़की को एक बेटी के रूप में जन्म लेकर, एक पत्नी के रूप में जीवन बिताकर, एक माता के रूप में मर जाना चाहिए। हालांकि मैं पत्नी का दर्जा हासिल न कर सकी। लेकिन आखिर में मैं जरूर अम्मा के रूप में अपनी पहचान बनाकर मर जाऊंगी।" 5 दिसम्बर 2016 को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में जयललिता ने अंतिम सांसें ली थी।

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