कोरोना वायरस ने बिहार में दिहाड़ी मजदूरों का छीना रोजगार

Impact Of Coronavirus On Daily Laborers In Bihar - Sakshi Samachar

बिहार में कोरोना वायरस का प्रभाव

कोरोना वायरस से मजदूरों पर असर 

पटना : बिहार में कोरोना का दो मामला पॉजिटिव पाया गया है, जिसमें एक की मौत हो गई है और एक का एनएमसीएच में इलाज चल रहा है। बिहार सरकार वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सभी एहतियाती कदम उठा रही है। सरकार ने सभी मॉल, शॉपिंग, पॉर्क, रेस्तरां, स्कूल, कॉलेज को बंद करवा दिए हैं। शहर में लोगों की आवाजाही कम हो गई और रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों की संख्या कम हो गई है। इन सबका सबसे अधिक प्रभाव दिहाड़ी मजदूर पर देखने को मिल रहा है।

नालंदा जिले के गिरियक थाना क्षेत्र के दुर्गानगर गांव का रहने वाला मोहन दिहाड़ी मजदूर का काम करने पटना आया था, लेकिन अब काम नहीं मिलने के कारण अपने गांव लौट रहा है। उसका कहना है कि होली के दौरान काम मंदा ही था और अब कोरोनावायरस के कारण सभी काम बंद हैं। पटना में करीब सभी निर्माण कार्य बंद हैं। मजदूर रोज काम की तलाश में इलाके के चौक पर जाते हैं, लेकिन कोई काम देने वाला नहीं आ रहा है।

कंकड़बाग की सड़कों पर काम की तलाश में निकले राजमिस्त्री विशम्भर कहते हैं कि वे काफी दिनों से पटना में रह रहे हैं, लेकिन बेरोजगारी की ऐसी स्थिति कभी नहीं दिखी थी। लोग घर में चल रहे कामों को बंद करवा दे रहे हैं। इधर, सामान ढोने वाले ठेला चालकों की भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है। राजा बजार के ठेला चालक रमेश कुमार कहते हैं, सभी शॉपिंग मॉल बंद हैं। कुछ छोटी दुकानें खुले हैं, लेकिन उनके पास काम ही कितना है!

पालीगंज के रहने वाले यदुनाथ सिंह पटना में रिक्शा चलाते हैं। उन्हें अब सवारी नहीं मिल रही है। वे कहते हैं, "रिक्शा मालिक को प्रतिदिन के हिसाब से 250 रुपये देना है और कमा रहे हैं मुश्किल से 100 रुपये। बाकी पैसा कहां से लाएंगे। हमलोग बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं।" गौरतलब है कि कोरोना वायरस को लेकर सरकार की एडवायजरी के कारण लोग भी सड़कों पर कम निकल रहे हैं।

पटना रेलवे स्टेशन के आसपास काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों की हालत और खराब है। इन मजदूरों का रोजगार यात्रियों पर ही निर्भर रहता है। कोरोना के कारण ट्रेनों की आवाजाही कम होने से यात्रियों की संख्या में कमी आ गई है, जिससे स्थानीय दिहाड़ी मजदूर के सामने रोजगार की समस्या आ गई है।

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स्टेशन के बाहर कुली का काम करने वाला प्रफुल्ल कहता है कि बहुत सी ट्रेन बंद हो गई हैं, रेलवे खुद कह रहा है कि लोग इन दिनों अपनी यात्रा टाल दें। यात्री आते थे, तो वह रोजाना 1200 से 1300 कमा लेता था, लेकिन आजकल 100 रुपये ही मिल जाए तो भी बड़ी बात है।

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