इस भारतीय ने जिंदगी लगाई दांव पर, कोरोना वैक्सीन के ट्रायल के लिए खुद से आए आगे

deepak paliwal who come forward for corona vaccine trial in london  - Sakshi Samachar

दीपक पालीवाल ने दांव पर लगाई जिंदगी

कोरोना वैक्सीन के ट्रायल के लिए आए आगे

लंदन में चल रह वैक्सीन का ट्रायल 

नई दिल्ली : अगर आपसे कहा जाए कि कोरोना वैक्सीन के लिए आप आगे आएं तो शायद आप साहस नहीं जुटा पाएंगे। जीहां, ये ऐसा कार्य है जिसके लिए डाक्टरों और वैज्ञानिकों को ऐसे लोगों को ढूंढने में सबसे ज्यादा दिक्कतें आती हैं। कम ही लोग होते हैं जो वैक्सीन ट्रायल के लिए वॉलेटियर के तौर पर खुद से आगे आते हैं । एैसे ही लोगों में दीपक पालीवाल का नाम शुमार हो गया है। 

जयपुर में जन्मे दीपक पालीवाल जो लंदन में रह रहे हैं।  उन्होने वैक्सीन के ट्रायल के लिए खुद को आगे किया है और अपनी जिंदगी दांव पर लगाई है। हर शख्स चाहता है कि कोरोना की वैक्सीन जल्द से जल्द बनें, जिससे दुनिया भर में हो रही मौतों पर लगाम लगाई जाए। वैक्सीन को बनाने के लिए दुनिया भर के देशों में प्रयास जारी हैं। लेकिन बड़ी बात ये है कि वैक्सीन को फाइनल करने से पहले उसका ह्यूमन ट्रायल जरूरी होता है। दीपक पालीवाल जैसे लोगों के चलते ही वैक्सीन तैयार करने की राह आसान हो पाती है।  

मिली जानकारी के मुताबिक इस वैक्सीन के ट्रायल के लिए ऑक्सफ़ोर्ड को करीब एक हज़ार लोगों की जरूरत थी। इसमें दुनिया के सभी मूल के लोगों की जरूरत है, जिससे वैक्सीन तैयार होने के बाद दुनिया के सभी देशों में इसका इस्तेमाल हो सके। ऑक्सफोर्ड में चल रही इस वैक्सीन में 85 फीसदी कंपाउड मेनिंनजाइटिस वैक्सीन से मिलता जुलता है। इसके ट्रायल में जान का भी खतरा होता है।  बुख़ार, कपकपी जैसे दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं । 

यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि जिस बीमारी की वैक्सीन के लिए ट्रायल किया जा रहा है, वालंटियर उस बीमारी से संक्रमित न हो। ट्रायल के दौरान इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि केवल लोग एक उम्र और एक मूल के ना हों, साथ ही महिला और पुरुष दोनों ट्रायल की इस प्रक्रिया का हिस्सा बनें। वैक्सीन के ट्रायल के लिए तमाम प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। 

यहां बतादे कि इस वैक्सीन के ट्रायल के लिए किस तरह के पैसे नहीं दिये जाते हैं, इतना जरूर है कि ट्रायल कराने वाले व्यक्ति का बीमा किया जाता है। दीपक पालीवाल ने आगे आकर जहां साहस कार्य किया है, तो वहीं वो देश और समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत जरूर बन गये हैं। 

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