थाली बजवाने, दीया जलवाने वाले मोदी जी से क्या आप भी पूछना चाहते हैं कुछ सवाल

Covid-19 Victims Dead bodies are not Burrying in Grave Yards - Sakshi Samachar

 डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी भी इस कोरोना वायरस की चपेट में

5 अप्रैल की रात 9 बजे 9 मिनट तक दीया जलाने की अपील 

नई दिल्ली : देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। मार्च महीने की शुरूआत में बहुत ही धीमी गति से फैल रही कोरोना मरीजों की संख्या में पिछले दो दिन यानि 1 से 2 अप्रैल भारी तेजी देखी जा रही है। अब तक भारत में करीब ढाई हजार लोग इस वायरस से संक्रमित हैं और करीब 70 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि करीब 150 लोग इस वायरस से बिलकुल ठीक होकर वापस घर लौट गए हैं। 

इस महामारी से संक्रमित लोगों के इलाज में जुटे डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी भी इस कोरोना वायरस की चपेट में आने लगे हैं। कोरोना वायरस से लोगों को बचाने में जुटे इन योद्धाओं के पास मुफ्त में दस्ताने, मॉस्क और खुद की बचाव के लिए जरूरी किट तक उपलब्ध नहीं है। बीमारी के संक्रमित होने की जांच जल्द से जल्द होना बेहतर रहेगा क्योंकि जितनी जल्दी जांच होगी उस बीमारी को रोकने में उतना ही कम वक्त लगेगा। दूसरी तरफ, देशभर में बढ़ती मरीजों की संख्या के कारण कोरोना टेस्ट करने वाले लैबेरेटरीज पर दबाव बढ़ रहा है। 

दूसरी तरफ, कुछ लोग देश में जांच किट बनने और बहुत कम समय में इनकी रिपोर्ट मिलने की दावा कर रहे हैं, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं है कि ये किट किन-किन अस्पतालों में उपलब्ध रहेंगे या कब मुहैया कराए जाएंगे। 

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से 5 अप्रैल की रात 9 बजे 9 मिनट तक घरों में लाइट बंद करके दीया, मोमबत्ती, टॉर्च और सेलफोन का फ्लैश लाइट जलाने की अपील की है। गौरतलब है कि पीएम ने 22 मार्च को सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक जनता कर्फ्यू मनाने की अपील की थी और इसे देशभर के लोगों से समर्थन मिला था। गौरतलब है कि देशभर में 21 दिन के लॉकडाउन घोषित है और 14 अप्रैल को लॉकडाउन की सीमा खत्म होने वाली है।  इस बीच, लोगों को पीएम नरेंद्र मोदी से उम्मीद है कि वह इन कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर दें। 
 
कम से कम समय में जांच की क्या तैयारी है ?
कोरोना महामारी को कंट्रोल करने के लिए घोषित लॉकडाउन के अतिरिक्त इससे संक्रमित मरीजों की जल्द जांच भी काफी मायने रखती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है दक्षिण कोरिया। कुछ दिन पहले ही दावा किया गया था कि पुणे की एक लैब ने देसी जांच किट बना ली है जो जल्द रिपोर्ट दे सकेगी. लेकिन इसके बाद इसे कितने अस्पतालों को उपलब्ध कराया गया है इस पर भी कोई ठोस जानकारी नहीं है।

क्वारंटाइन में लोगों की देखभाल कैसे हो रहा है?

जिन संदिग्ध मरीज को क्वारंटाइन में रखा गया है उनकी क्या देखभाल हो रही है। क्योंकि कुछ मरीजों के फरार होने की खबर है. अगर ऐसे मरीजों ने दूसरों को संक्रमित कर दिया तो बड़ी मुसीबत हो जाएगी। दूसरी ओर जो लोग शहरों से छोड़कर गांवों में आए हैं उन पर कैसे नजर रखी जा रही है। इस पर भी पीएम मोदी को ठोस जानकारी देनी चाहिए। 

लॉकडाउन के अलावा और क्या उपाय कर रही है सरकार?

9 दिन के लॉकडाउन के अलावा सरकार और क्या कदम उठा रही है। इस दौरान भी मरीजों की संख्या बढ़ी है। क्या सरकार ने मरीजों के बढ़ते ग्राफ का कुछ विश्लेषण किया और उसके नतीजे में और क्या कदम उठाने की तैयारी है।

मजदूरों के लिए क्या उपाय हैं?
दिहाड़ी मजदूरों पर लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। क्या सरकार के पास ऐसे लोगों का कोई ठोस आंकड़ा है और इनके परिवार की रोजी-रोटी पर कोई असर न पड़े क्या सरकार ने कोई प्लान बनाया है। 

कैसे पहुंचेगी सरकारी मदद?

जिन लोगों के लिए आर्थिक पैकेज का ऐलान किया गया है। उनमें से आज भी कई ऐसे हैं जिनका रजिस्ट्रेशन किसी भी सरकारी योजना में नहीं है। ऐसे लोगों के लिए क्या योजना है। ग्राम प्रधान स्तर पर जो भ्रष्टाचार और भेदभाव होता है। इस दौर में इसकी सबसे बड़ी मार गरीब तबके पर ही पड़ेगी। क्या सरकार ने इसको लेकर कोई समीक्षा की है। 

लोगों की नौकरियां सुरक्षित रखने की दिशा में क्या कदम उठाए हैं ?

जैसा की IMF भी कह चुका है कि दुनिया इस समय मंदी की चपेट में आ चुकी है। इस हालात में अगले 6 महीनों तक के लिए भारत सरकार की क्या तैयारी है ताकि लोगों को नौकरियां सुरक्षित रहे। क्योंकि आरबीआई ने जीडीपी के आंकड़े जारी नहीं किए हैं और इस बीमारी का असर इस पर पड़ना तय है। पीएम मोदी अगर कोई ठोस आश्वासन देते हैं तो निश्चित तौर लोगों का विश्वास और मजबूत होता। 

तबलीगी जमात के कितने लोग पहचाने गए?
सारी तैयारियों के बीच तबलीगी जमात में आए लोगों के संक्रमण ने चिंता बढ़ा दी है। इन लोगों को कैसे ट्रैक किया जा रहा है और अब तक क्या सफलता है इसका ठोस आंकड़ा नहीं है। पीएम मोदी को इस बारे में केंद्र की सूचनाओं को साझा करना चाहिए। 

इसे भी पढ़ें : 

कोरोना के खिलाफ जंग में बेहद अहम साबित होगा 9 मिनट, जानिए क्यों पीएम ने की यह अपील

'स्वास्थ्य योद्धाओं' की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था है ?
इस बीमारी से अग्रिम मोर्चे पर लड़ाई रहे डॉक्टर और नर्स भी इस खतरे से दूर नहीं है। कई डॉक्टर इसकी चपेट में आ चुके हैं। इस समय इनकी सुरक्षा भी बहुत जरूरी है। कई जगहों से खबरें आ रही हैं इन लोगों के बीच जरूरी दस्ताने और मॉस्क उपलब्ध नहीं हैं। पीएम मोदी को देश को इस मुद्दे पर भी आश्वासन देना चाहिए कि सरकार इस दिशा में क्या काम रही है। 

Advertisement
Back to Top