इलाज के बीच घर का ख्याल भी नहीं आता, कोरोना के खिलाफ जंग लड़ते एक डॉक्टर की कहानी

Coronavirus : Doctor Love Upadhyaya Motivestional Story - Sakshi Samachar

दिल्ली के डॉक्टर समीर उपाध्याय की कहानी

मरीजों के इलाज के बीच घर का ख्याल भी नहीं आता

कोरोना के खौफ पर बोले, 'डॉक्टर कभी डर के नहीं जी सकता'

नई दिल्ली : कोरोना के खिलाफ इस वक्त पूरा विश्व एक अघोषित जंग लड़ रहा है। भारत में भी सरकार से लेकर आम आदमी तक अपने सहयोग से कोरोना के खात्मे की कोशिश में लगे हैं। इन सब के बीच एक ऐसा वर्ग है, जो लोगों के लिए किसी 'देवदूत' से कम नहीं है, वो हैं डॉक्टर्स। कहा जाए तो सही मायने में डॉक्टर्स ही वो असली 'कोरोना वॉरियर्स' हैं, जिनके विश्वास पर यह पूरी जंग लड़ी जा रही है। आज हम अपने 'कोरोना वॉरियर्स' सीरीज में डॉक्टर समीर उपाध्याय (लव) के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बिना अपनी परवाह किए लोगों की सेवा में लगे हैं।

डॉ समीर उपाध्याय एक लैब चलाते हैं, जो राजधानी दिल्ली के आदर्शनगर में है। इनके पैथोलॉजी में सारी जांचें की जाती है। विदेश से ऑफर मिलने के बाद ही उन्होंने देश में ही रहने का फैसला किया।

सिर्फ कुछ घंटों के लिए आते हैं घर
डॉ. समीर उपाध्याय ने बताया कि वह अपने घर दिनभर में सिर्फ दो या तीन घंटे के लिए ही आ पाते हैं। दिनभर मरीजों का इलाज, हॉस्पिटल जाना इन सब के बीच अपने लिए टाइम ही नहीं बचता। उन्होंने बताया कि मरीजों के इलाज के बीच घर का ख्याल भी नहीं आता क्योंकि यह सेवा सबसे बड़ी है।

घर में हुए 'बेघर'
खुद के घर में जाकर सिर्फ एक कमरे में रहना वो भी बिल्कुल अलग, यह बात सोचकर भी घबराहट होती है, लेकिन डॉ. समीर उपाध्याय ने कहा पिछले कुछ दिनों में यह आदत सी हो गई है। उन्होंने बताया कि इतने बड़े घर में वह सिर्फ एक कमरे में जाकर अकेले रहते हैं। घर वालों से दूरी बना ली है और खाने का बर्तन भी अलग हो चुका है। ऐसे में उनके साथ घरवालों को भी यह देखकर तकलीफ जरूर होती है।

10 महीने के बच्चे से भी दूरी
किसी पिता के लिए उसका बच्चे से दूर होना काफी मुश्किल भरा होता है और यह मुश्किल उस वक्त और बढ़ जाती है, जब बच्चा आपके सामने हो और उसे आप प्यार न कर सकें, खिला न सकें। डॉ. समीर उपाध्याय ने ऐसी ही कुछ बातें शेयर की। उन्होंने बताया कि उनका 10 महीने का बेटा है। वह उसके पास नहीं जाते हैं बस दूर से ही खिला लेते हैं। वह भी दूर से देखता रहता है।

परिजनों का मिल रहा साथ
ऐसे मुश्किल वक्त में जब घरवालों का साथ मिलता है तो समस्याएं कम हो जाती हैं। डॉ. समीर उपाध्याय ने भी ये महसूस किया है। उन्होंने बताया कि घर में माता-पिता और पत्नी ने यह बात समझ ली है। इसलिए वह भी मौके की नजाकत को समझ रहे हैं और बखूबी साथ दे रहे हैं। दिनभर की थकान के बाद वह घर आते हैं तो कुछ दूरी पर बैठकर ही दिनभर की चर्चा करते हैं। इस दौरान उन्हें उनके घरवालों का पूरा साथ मिलता है।

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डॉक्टर डर के नहीं जी सकता
क्या खुद पर कोरोना वायरस के संक्रमण का डर नहीं लगता, इस बारे में डॉ. लव कुमार ने एक सच्चे योद्धा की तरह जवाब दिया, उन्होंने कहा, 'डॉक्टर कभी डर के नहीं जी सकता।' उन्होंने कहा कि अगर हम डर के घर में बैठ जाएं तो उन मरीजों की सेवा कौन करेगा जो उम्मीद के साथ हमारे पास आए हैं। बीमारों का इलाज ही हमारी सच्ची सेवा है।

अफवाह से बचें सीधा हॉस्पिटल जाएं
डॉ. समीर उपाध्याय ने बताया कि कोरोना वायरस से घबराने की जरूरत नहीं है। अगर बीमारी के लक्षण हैं तो सीधा डॉक्टर से संपर्क करें या फिर हॉस्पिटल जाएं। घर में रहने या फिर बीमारी छुपाने से यह और भी खतरनाक हो सकती है। इससे मरीज के साथ-साथ उनके आस-पास के लोगों में भी इसका खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बिना देर करे सीधे मेडिकल टीम से संपर्क करें।

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