चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों को घेरा, फिर लोहे की छड़ों, पत्थर और डंडे से किया अटैक

Chinese Forces Attacked on Indian Forces with Sticks and Fencing wire in Ladakh    - Sakshi Samachar

नई दिल्ली :  भारत और चीन के बीच लद्दाख के गलवान नदी इलाके में तनाव चरम पर पहुंच चुका है। कई दौर की बातचीत के बाद भी इस मुद्दे का कोई हल निकलता नहीं दिख रहा है।  चीनी सेना खुद को पेशेवर बल होने का दावा करती है, लेकिन हाल ही में भारतीय सेना के जवानों के साथ गतिरोध के दौरान उसने काफी गैर-पेशेवर रवैया दिखाया। कुछ समय से सीमा को लेकर जारी विवाद के बीच चीनी सैनिकों की नीच हरकत और गुंडागर्दी का सबूत सामने आया है। पूर्वी लद्दाख सेक्टर में पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में भारतीय सेना के साथ हालिया गतिरोध में चीनी सैनिकों ने भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए लाठी, कंटीले तारों वाले डंडों और पत्थरों का इस्तेमाल किया।

कंटीले तारों डंडो से जवानों को पीटा
भारतीय और चीनी सैनिक पांच मई को पैंगोंग त्सो झील इलाके में भिड़ गए थे और इस दौरान लोहे की छड़ों, लाठियों से एक दूसरे पर हमला किया तथा पथराव भी किया जिसमें दोनों तरफ के सैनिकों को चोट आई थी। एक अन्य घटना में करीब 150 भारतीय और चीनी सैनिक नौ मई को सिक्किम सेक्टर के नाकुला पास में आमने-सामने आ गए और इस दौरान हुई झड़प में दोनों पक्षों के कम से कम 10 सैनिक घायल हुए। चीन की सेना का रवैया पाकिस्तान समर्थित उन पत्थरबाजों जैसा था, जो कश्मीर में भारतीय जवानों को मारते है। 

गैरपेशवर रहा चीनी सेना का रवैया
सूत्रों ने कहा कि गतिरोध के दौरान चीनी सैनिकों की संख्या ज्यादा थी और यह एडवांटेज था उनके लिए, मगर वहां मौजूद भारतीय सैनिकों के प्रति अनुचित आक्रामकता दिखाते हुए उन्होंने गैरे पेशेवर सेना की तरह व्यवहार किया। बता दें, भारतीय और चीनी दोनों सेनाएं लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ सभी जगह राइफल से लैस हैं, लेकिन इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए 1967 से क्षेत्र में गोलियां नहीं चलाई गई हैं। गौरतलब है कि लद्दाख के पूर्व में भारत व चीन की सेनाओं के बीच साल 2017 में डोकलाम जैसे हालात हैं। दोनों देशों की सेनाएं कुछ सौ मीटर की दूरी पर तैनात हैं।

भारतीय जमीन पर चीनी सैनिकों ने लगाए टेंट
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी सैनिकों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, तो भारत भी अपने सैनिक की संख्या बढ़ाने की तैयारी कर चुका है। कुछ हफ्ते पहले इस क्षेत्र में जहां कुछ सौ चीनी सैनिक होते थे अब उनकी संख्या हजारों में बताई जा रही है। भारत भी इसी अनुरूप अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है। भारत चीन से सटे अपने हिस्से में ढांचागत विकास का काम भी तेज कर चुका है। सैन्य सूत्रों ने स्वीकार किया है कि चीन की सेना की तरफ से टेंट लगाने के जो फोटो सोशल मीडिया में आए हैं वे भारतीय जमीन पर लगाए गए है। पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर अभी तक जो दोनों देशों की सेनाओं के बीच अलिखित समझौता था, चीन उसका साफ-साफ उल्लंघन कर रहा है।

3 साल पहले डोकलाम में आमने सामने हुए भारत- चीन
इससे पहले डोकलाम में 2017 में 73 दिनों तक तक दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने डटे हुए थे जिससे परमाणु हथियार से लैस दो पड़ोसी देशों के बीच युद्ध का खतरा भी मंडराने लगा था। भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी को लेकर विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा ठोकते हुए उसे दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है जबकि भारत अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न अंग मानता है।

पूर्वी लद्दाख की स्थिति पर चर्चा करेंगे शीर्ष सैन्य कमांडर
भारतीय सेना के शीर्ष सैन्य कमांडर बुधवार से शुरू हो रहे तीन दिवसीय सम्मलेन के दौरान पूर्वी लद्दाख के कुछ इलाकों में भारत और चीनी सैनिकों के बीच तनावपूर्ण गतिरोध की गहन समीक्षा करेंगे। सूत्रों ने कहा कि कमांडर जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर भी चर्चा करेंगे। इसके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर भी इस दौरान चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान मुख्य रूप से ध्यान पूर्वी लद्दाख की स्थिति पर ही होगा जहां पैंगोंग त्सो, गल्वान घाटी, देमचोक और दौलत बेग ओल्डी में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने अड़े हैं। इस इलाके के सभी संवेदनशील क्षेत्रों में भारत और चीन दोनों ने अपनी मौजूदगी महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा दी है, जिससे संकेत मिलते हैं कि इस टकराव का जल्द कोई समाधान शायद न मिले। दोनों तरफ से इसे बातचीत के जरिये सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। 

कैसे बिगड़े हालात ?
पूर्वी लद्दाख में स्थिति तब बिगड़ गई जब पांच मई की शाम को करीब 250 चीनी और भारतीय सैनिकों में हिंसक झड़प हुई और यह अगले दिन भी जारी रही जब तक कि स्थानीय कमांडर स्तर की बैठक में दोनों पक्षों में “अलग होने” पर सहमति नहीं बन गई। इस हिंसा में 100 से ज्यादा भारतीय और चीनी सैनिक घायल हुए थे। पैंगोंग त्से में हुई इस घटना के बाद नौ मई को उत्तरी सिक्किम में भी ऐसी ही घटना देखने को मिली। पैंगोंग त्से में हुई इस घटना के बाद नौ मई को उत्तरी सिक्किम में भी ऐसी ही घटना देखने को मिली। 

चीन के आक्रामक रवैया से निपटने की तैयार होगी रणनीति
सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने ज्यादा विस्तार दिये बिना कहा, “भारतीय सेना का शीर्ष स्तरीय नेतृत्व उभरती हुई मौजूदा सुरक्षा व प्रशासनिक चुनौतियों के साथ ही भारतीय सेना के भविष्य पर मंथन केरेगा।” कमांडरों का यह सम्मेलन पहले 13 से 18 अप्रैल को होना था लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। कर्नल आनंद ने कहा कि अब यह दो चरणों में होगा। पहला चरण 27 से 29 मई तक होगा और दूसरा चरण जून के अंतिम हफ्ते में। नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, “भारत ने परिपक्व तरीके से स्थिति को संभाला है। कमांडरों के चीन के आक्रामक व्यवहार से निपटने की रणनीति समेत कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने की उम्मीद है।” 
 

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