कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूजा पंडालों को 'नो एंट्री जोन' बताने वाले आदेश में दी ढील, इतने लोग कर सकेंगे प्रवेश

Calcutta HC relaxes the order of pooja pandals 'no entry zone' - Sakshi Samachar

बड़े पंडालों में अधिकतम 60 लोग कर सकते हैं प्रवेश

पंडाल के गेट के बाहर बजा सकते हैं ढोल

बाबुल सुप्रियो ने अदालत के फैसले का किया स्वागत

कोलकाता: अभी दो दिनों पहले ​19 अक्टूबर को ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के सभी दुर्गा पूजा पंडालों को लोगों के लिए 'नो-एंट्री जोन' बनाने का निर्देश दिया था। हालांकि आज कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने ही फैसले पर पुनर्विचार करते हुए यह कह दिया है कि पूजा पंडाल अब नो एंट्री जोन नहीं रहेंगे।

बड़े पंडालों में अधिकतम 60 लोग कर सकते हैं प्रवेश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूजा पंडालों को 'नो एंट्री जोन' घोषित करने वाले आदेश में ढील दी है। कोर्ट के नए आदेश के अनुसार, अब छोटे पंडाल में 15 लोग और बड़े पंडालों में अधिकतम 60 लोग प्रवेश कर सकते हैं।

गौरतलब है कि दुर्गापूजा पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। कोर्ट ने कहा कि पंडाल में प्रवेश की इजाजत पाने वालों के नामों की लिस्ट हर दिन सुबह आठ बजे तक पंडाल के गेट पर लगानी होगी।

पंडाल के गेट के बाहर बजा सकते हैं ढोल

वहीं, कोर्ट ने ढाक या पारंपरिक ड्रम वादकों को भी नो एंट्री जोन में जाने की अनुमति दे दी है। वे अब पंडाल के गेट के बाहर ढोल बजा सकते हैं। हालांकि, पंडाल के अंदर उन्‍हें जाने की इजाजत नहीं होगी, क्‍योंकि इससे निर्धारित संख्‍या में इजाफा हो सकता है।

इससे पहले पूजा पंडालों को नो एंट्री जोन घोषित करने पर तृणमूल ने निराशा जताई थी। तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि पूजा पंडाल को प्रवेश निषेध क्षेत्र घोषित किए जाने के कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले से कई लोग निराश होंगे, जबकि राज्य में विपक्षी दलों ने फैसले का स्वागत किया है।

बाबुल सुप्रियो ने अदालत के फैसले का किया स्वागत

वहीं, तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने कहा था कि लोग दुर्गा पूजा मनाने के लिए सालभर इंतजार करते हैं। उन्होंने कहा, 'दुर्गा पूजा को संभव बनाने वाले कई आयोजक इस आदेश से निराश होंगे।' इस बीच, केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने अदालत के फैसले को सही बताते हुए उसका स्वागत किया।

उल्लेखनीय है कि अदालत ने कोविड-19 के प्रसार पर काबू के लिए राज्य भर के सभी दुर्गा पूजा पंडालों को प्रवेश निषेध क्षेत्र घोषित कर दिया था। न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने कहा था कि बैरिकेडों पर प्रवेश निषेध के बोर्ड लगे होने चाहिए।

आभासी 'दर्शन' का भी है प्रबंध

अदालत ने यह भी कहा कि आयोजन समितियों से जुड़े सिर्फ 15 से 25 लोगों को ही पंडालों में प्रवेश करने की अनुमति होगी। बता दें कि कोविड-19 के मद्देनजर इस बार कई दुर्गा पूजा समितियों ने आगंतुकों के आगमन पर रोक लगाते हुए आभासी 'दर्शन' का प्रबंध किया है।

अदालत ने आदेश दिया कि छोटे पंडालों के लिए प्रवेश द्वार से पांच मीटर की दूरी पर बैरिकेड लगाने होंगे, जबकि बड़े पंडालों के लिए यह दूरी 10 मीटर होनी चाहिए। हालांकि, कई अन्य दुर्गा पूजा संघों का कहना है कि यह महोत्सव समावेशिता की भावना से ओतप्रोत है और आगंतुकों को पंडालों में आने से नहीं रोका जा सकता।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में अब तक कोरोना वायरस के 3.2 लाख मामले सामने आ चुके हैं और इस बीमारी के कारण 6,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

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