25 टन प्याज खरीदा और लॉकडाउन में यूं पहुंचे मुंबई से प्रयागराज, आप न करना ऐसा जुगाड़

Bought 25 tons of onion and reached Mumbai to Prayagraj during lockdown - Sakshi Samachar

घर पहुँचने के लिए लगाया जुगाड़

होम क्वारेंटीन में हैं, लेकिन खुश हैं

मुंबई में बढ़ते कोरोना मामलों से डरे

प्रयागराज (उप्र) : बेशक जुगाड़ टेक्नीक में हमारा कोई सानी नहीं। हम भारतीय हर बात, हर काम के लिए कोई न कोई जुगाड़ निकाल ही लेते हैं। हाँ, यह और बात है कि कभी वो जुगाड़ हमें फेमस कर देता है तो कभी उसके चक्कर में हम बुरी तरह फंस जाते हैं। हालाँकि हमारे खून में जुगाड़ इस कदर रचा-बसा है कि इसके लिए हम ये रिस्क उठाने को भी हर वक़्त तैयार रहते हैं।

घर पहुँचने के लिए लगाया जुगाड़
दरअसल, कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन लागू है। देश में कहीं भी कोई ट्रेन या फ्लाइट्स नहीं चल रही। जो जहां है, वहीं फंसा है। ऐसे माहौल में कुछ लोग पैदल ही कई सौ किलोमीटर की दूरी तय कर अपने गांव पहुँचने की जुगत में लग गए तो कुछ अन्य ने घर वापस आने के लिए दिमाग का इस्तेमाल किया और घर लौटने के लिए जुगाड़ लगाने लगे। लॉकडाउन के दिनों में अपने पैतृक निवास पहुँचने की जिद और ललक में ऐसा ही कुछ कर दिखाया, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के मूल निवासी प्रेम मूर्ति पांडेय ने, जो मुम्बई में फंसे हुए थे। 

होम क्वारेंटीन में हैं, लेकिन खुश हैं
हालांकि फिलहाल अपने गांव पहुंचकर भी प्रेम मूर्ति पांडेय होम क्वारेंटीन में हैं, लेकिन खुश हैं। अपनी आपबीती बताते हुए प्रेम कहते हैं, "मुंबई से अपने घर आने के लिए तीन लाख रुपये खर्च करके मैंने 25 टन प्याज खरीदा और प्रयागराज पहुंचा।" बता दें कि प्रेम मूर्ति पांडेय मुंबई हवाई अड्डे पर काम करते हैं। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन होने के बाद वह मुंबई में ही रुके थे। उन्हें उम्मीद थी कि लॉकडाउन खुल जाएगा, लेकिन पहला चरण वहीँ रुके रहने के बावजूद जब लॉकडाउन जारी रहा तो उनके लिए वहां रुकना मुश्किल हो गया।

मुंबई में बढ़ते कोरोना मामलों से डरे
प्रेम ने बताया कि वह अंधेरी ईस्ट के आजाद नगर में रहते हैं। वहां का इलाका बहुत भीड़भाड़ वाला है। महाराष्ट्र और मुंबई के हालात बहुत खराब हैं। ऐसे में उन्हें कोरोना को लेकर और ज्यादा डर लग रहा था। वह प्रयागराज स्थित अपने पैतृक गांव आना चाहते थे, लेकिन कोई साधन नहीं था। ट्रेनें, बसें, फ्लाइट्स सब बंद थीं। ऐसे में उन्होंने सोचा कि सरकार ने फल, सब्जी या जरूरत का सामान लाने-ले जाने वाले ट्रकों को छूट दी है। उन्होंने इसी के जरिए अपने घर तक पहुंचने की सोची।

मिनी ट्रक किराए पर लेकर निकल पड़े
प्रेम ने बताया कि उन्होंने 17 अप्रैल को लगभग 200 किलोमीटर दूर नासिक के पास पिंपलगांव के लिए एक मिनी ट्रक किराए पर लिया। वहां, उन्होंने 10,000 रुपये में 1,300 किलो तरबूज खरीदे और खेप के साथ वाहन को वापस मुंबई भेजा। पांडेय ने कहा कि उन्होंने 25,520 किलो प्याज 9.10 रुपये प्रति किलो में खरीदा। यह प्याज उन्हें 2.32 लाख रुपये का पड़ा। फिर उन्होंने 77,500 रुपये में एक ट्रक किराए पर लिया और 20 अप्रैल को प्रयागराज के लिए 1200 किलोमीटर की यात्रा पर रवाना हुए। वह 23 अप्रैल को प्रयागराज में सीधे शहर के बाहरी इलाके में मुंडेरा होलसेल मार्केट पहुंचे।

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होम क्वारंटाइन में भेजा गया
दुर्भाग्य से उन्हें यहां कोई भी नहीं मिला, जो प्याज का भुगतान करके उनसे खरीद सके। वह ट्रक को एक-दो किलोमीटर दूर अपने गांव, कोटवा मुबारकपुर ले गए। वहां प्याज उतारे गए। टीपी नगर पुलिस चौकी प्रभारी अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि पांडेय शुक्रवार को धूमनगंज पुलिस स्टेशन आए और एक मेडिकल टीम ने उनकी जांच की। अभी के लिए उसे घर पर खुद को क्वारंटाइन करने के लिए कहा गया है।हालाँकि प्याज बेचने के लिए प्रेम को अभी अच्छा सौदा मिलने की उम्मीद है। फिलहाल वहां की मंडी मध्य प्रदेश के सागर से आ रहे प्याज से भरी हुई है। उनका मानना है कि सागर की आपूर्ति समाप्त होने के बाद ही नासिक से लाए गए उनके प्याज के लिए उन्हें खरीददार मिलेंगे। वह खुश हैं कि तब तक क्वारेंटीन की उनकी अवधि भी पूरी हो चुकी होगी।

चेतावनी 
माना कि प्रेम का यह जुगाड़ कामयाब रहा, इसके बावजूद उनका कहना है कि दूसरा कोई भी ऐसा जुगाड़ लगाने की कोशिश न ही करे तो बेहतर।क्योंकि कहा नहीं जा सकता कि ऐसा पाशा कब उल्टा पड़ जाये और कब हम अपने इस जुगाड़ के चंगुल में फंस जाएँ।    

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