कभी मोदी के पीएम बनने पर कर्नाटक छोड़ने की बात करने वाले देव गौड़ा का ऐसा रहा सियासी सफर

Birthday special :Know former Prime Minister HD Deve Gowda said About PM Narendra Modi  - Sakshi Samachar

देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवे गौड़ा भी उन नेताओं की सूची में शामिल रहे जो पीएम नरेंद्र मोदी के कट्टर विरोधी हैं। पूर्व पीएम न सिर्फ मोदी के खिलाफ रहे बल्कि वह भाजपा के विरोधी रहे हैं। यही वजह है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी जब संसद में बहुमत साबित नहीं कर पाने के बाद कांग्रेस, वामदलों सहित अन्य राजनीतिक दलों के सहयोग से देवे गौड़ा ही तो देश के बतौर प्रधानमंत्री बने। 

देवे गौड़ा ने 2014 में कहा था कि अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन जाते हैं तो वह कर्नाटक ही छोड़ दूंगा। देवे गौड़ा का यह बयान उस वक्त सोशल मीडिया पर जमकर वायरल होने लगा जब देशभर में GST लागू करने के लिए 30 जून 2017 को संसद के सेंट्रल हॉल में बुलाए गए विशेष सत्र के दौरान पीएम  नरेंद्र मोदी के बगल में एचडी देवे गौड़ा बैठे हुए दिखे। हालांकि इस बैठक में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, वित्तमंत्री अरूणण जेटली भी मौजूद थे। देवे गौड़ा को मोदी के बगल में बैठा देख पीएम मोदी के फॉलोर्स सोशल मीडिया पर लिखने लगे थे कि मैच्योर इंसार और और दूसरों में फर्क होता है।

आपको बता दें कि अप्रैल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व पीएम और जनता दल (सेक्यूलर) के सुप्रीमो एच डी देवे गौड़ा ने कर्नाटक के शिमोगा जिले में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि चुनाव में भाजपा को बहुमत नहीं मिलेगा और नरेंद्र मोदी पीएम बनने का ख्वाब देख रहे हैं। उन्होंने कहा था कि अगर भाजपा जीतती है और नरेंद्र मोदी पीएम बन जाते हैं तो वह कर्नाटक छोड़ देंगे और किसी दूसरे राज्य में जाकर बस जाएंगे। 

18 मई 1933 को कर्नाटक के हासन जिले के हरदन हल्ली ग्राम के ताकुमा में जन्मे देवेगौड़ा के पत्नी का नाम चेनम्मा था और उनके 4 पुत्र एवं 2 पुत्रियां हैं। सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद इन्होंने मात्र 20 वर्ष की उम्र में ही सक्रिय राजनीति में एंट्री की थी। इनके पिता का नाम देड्डे गौड़ा व माता का नाम देवम्मा था।

देवे गौड़ा1953 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए और 1962 तक उसी में रहे। परंतु 1962 विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस का टिकट नहीं मिला तो वे कांग्रेस छोड़कर निर्दलीय टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। मार्च 1972 से मार्च 1976 तक और नवंबर 1976 से दिसंबर 1977 तक विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने ख्याति अर्जित की। 1975-76 में आपातकाल के दौरान इन्हें जेल में बंद रहना पड़ा था। जब वे 1991 में हासन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद के रूप में चुने गए तब उन्होंने राज्य की समस्याओं विशेष रूप से किसानों की समस्याओं के निवारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  हासन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 1991 में पहली बार वे सांसद चुने गए। 1994 में राज्य में जनता दल की जीत के सूत्रधार ये ही थे। जनता दल के नेता चुने जाने के बाद वे 11 दिसंबर 1994 को कर्नाटक के 14वें मुख्यमंत्री बने।

ऐसे बने पीएम

इसे देवेगौड़ा की किस्मत ही कहा जाना चाहिए कि वे मुख्यमंत्री पद से सीधे प्रधानमंत्री पद पर पहुंच गए थे। बात यह थी कि 31 मई 1996 को अटलजी की सरकार के अल्पमत में होने के कारण उन्होंने प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था। उसी के अगले दिन 1 जून 1996 को तत्काल में 24 दलों वाले संयुक्त मोर्चे का गठन कांग्रेस के समर्थन से किया गया और देवेगौड़ा को संयुक्त मोर्चे का नेता घोषित कर दिया गया और वे प्रधानमंत्री नियुक्त हो गए। लेकिन कांग्रेस की नीतियों के मनोनुकूल नहीं चल पाने के कारण देवगौड़ा को अप्रैल 1997 में अपने प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा था।

अपार राजनीतिक अनुभव

एचडी देवेगौड़ा को राजनीतिक अनुभव और निचले तबके के लोगों तक उनकी अच्छी पहुंच ने राज्य की समस्याओं से निपटाने में मदद की। जब उन्होंने हुबली के ईदगाह मैदान का मुद्दा उठाया, तब उनकी राजनीतिक विलक्षणता की झलक सभी ने फिर से उनमें देखी थी। यह अल्पसंख्यक समुदाय का मैदान हमेशा से ही राजनीतिक विवाद का मुद्दा रहा था। देवेगौड़ा ने सफलतापूर्वक इस मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकाला था।

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