कोरोना से बचने के लिए अमिताभ लेते थे होमियोपैथी दवा, अब सवालों के घेरे में

Amitabh Bachchan was taking homeopathy to prevent coronavirus - Sakshi Samachar

कोरोना से बचाव के लिए होमियोपैथी दवा लेते थे अमिताभ 

अमिताभ की सलाह पर प्रशंसकों ने उड़ाया था मजाक 

होमियोपैथी को लेकर आयुष मंत्रालय भी बैकफुट पर 

मुंबई: अमिताभ बच्चन पूरे परिवार समेत कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। इस बीच उनका एक पुराना ट्वीट वायरल हो रहा है। जिसमें उन्होंने होमियोपैथी दवा की कोरोना से बचाव को लेकर हिमायत की थी। कई सारे लोग अमिताभ के इस भरोसे को देखते हुए होमियोपैथी आजमाने लगे थे। लगातार कोरोना प्रिवेंटिव मेडिसिन लेने के बावजूद अमिताभ बच्चन खुद को कोरोना से बचा नहीं सके। अब इस दवाई पर भी सवालिया निशान उठने लगे हैं। इसके साथ ही होमियोपैथी और आयुर्वेद के नाम पर प्रचारित कोरोना दवाइयों को लेकर भी लोगों की शंकाएं बढ़ गई है। 

अमिताभ बच्चन को उम्मीद थी कि होमियोपैथी दवाओं को लेकर आयुष मंत्रालय जल्दी ही अपना मंतव्य जाहिर करेगा। इसके अलावा इस तरह की दवाओं के जरिए भारत कोरोना के खिलाफ दुनिया को राह दिखा सकेगा। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि अमिताभ बच्चन की भ्रांति इन दवाओं को लेकर अब दूर हुई होगी। 

अमिताभ को नेटिजन्स ने पहले ही किया था आगाह

होमियोपैथी दवा को लेकर अमिताभ बच्चन के ट्वीट पर कुछ लोगों ने सवाल भी किया था। एक नेटीजन ने तो यहां तक उन्हें सलाह दी कि कुछ संजीदा ट्वीट करें, कोरोना महामारी के दौर में इस तरह की सलाह कारगर नहीं है। ये दवा कैसे मदद करेगी विस्तार से जानकारी दें। अमिताभ ने प्रश्न का उत्तर नहीं दिया था।  

हालांकि अमिताभ ने कभी भी दवा को लेकर प्रशंसकों की टिप्पणी पर आपत्ति जाहिर नहीं की। एक अन्य शख्स ने तो होमियोपैथी दवाई इंडोर्स करने के चलते अमिताभ के ट्विटर हैंडल को सस्पेंड करने तक की सलाह दे दी। ट्विटर पर सवाल किया गया कि 1982 में हादसे का शिकार होने के बाद बीते करीब चालीस सालों से अमिताभ एलोपैथिक इलाज करा रहे हैं। अब उनका होम्योपैथी की ओर झुकाव क्यों हो रहा है?

हालांकि अमिताभ के होमियोपैथी दवा इंडोर्स करने को लेकर कुछ सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी मिली थी। एक नेटीजन ने लिखा था कि भारत जरूर कोरोना वायरस से उबर पाएगा। आयुष मंत्रालय बेहतर काम कर रहा है और इसके जरिए जागरुकता अभियान भी जारी है। 

अमिताभ बच्चन को तब भी आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा जब उन्होंने एक चीनी एक्सपर्ट से चर्चा की कि कहीं मक्खी से तो कोरोना वायरस नहीं फैलता? इसका वीडियो जारी होते ही लोगों ने बच्चन को पाठ पढाया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस तरह की आशंकाओं को पहले ही खारिज कर दिया है फिर इसे प्रचारित करने की जरूरत क्या है? 

खैर जो भी हो, अमिताभ के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद उनके करोड़ों प्रशंसक बेहतर स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं। डॉक्टरों की टीम अमिताभ बच्चन के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। संयमित दिनचर्या और खान पान को देखते हुए माना जा रहा है कि अमिताभ जल्दी ही कोरोना वायरस से मुक्त होंगे। हालांकि देश में एक नई बहस उन दवाओं को लेकर शुरू हो चुकी है जिनके बारे में कोरोना के खात्मे की ताकत रखने के साथ प्रचारित किया जा रहा है। आने वाले समय में सेलेब्रिटीज को आगाह भी किया जा रहा है कि वे इस तरह की किसी भी दवा को इंडोर्स न करें। 

आयुष मंत्रालय भी बैकफुट पर 

भारत के आयुष मंत्रालय ने इसी साल 29 जनवरी को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कोरोना वायरस के लक्षणों के उपचार के लिए होम्योपैथी में कारगर दवाएं उपलब्ध है। मंत्रालय ने जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी उसका शीर्षक था "कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षणों को रोकने में होम्योपैथी, यूनानी चिकित्सा उपयोगी".

आयुष मंत्रालय के मुताबिक होम्योपैथिक का सिद्धांत कहता है कि यदि अत्यधिक पानी के साथ खाने की कोई चीज़ इंसान के पेट में पहुंचती है तो उसकी "मेमोरी" शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रक्रिया को शुरु कर सकती है। इसके साथ ही आयुष मंत्रालय ने 30सी डाइल्यूशन को इंडोर्स किया था। हालांकि इसकी आलोचना होने के बाद मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी थी। खुद आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने बयान जारी किया कि उनका मंत्रालय केवल उन दवाओं के नाम बताती है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। कभी भी ऐसा दावा नहीं किया गया है कि इससे कोरोना वायरस का विषाणु ख़त्म हो सकता है।" 

आयुष मंत्रालय के सलाहों को तोड़ मरोड़कर कई दवाओं को व्हाट्सएप और सोशल मीडिया फोरम के जरिए प्रचारित किया गया। जिसके बाद मंत्रालय ने एक और प्रेस विज्ञप्ति जारी कर लोगों को आगाह किया था। मंत्रालय ने साफ तौर पर दावा किया कि होम्योपैथी, यूनानी या फिर आयुर्वेद में भी ऐसी कोई दवा नहीं बनी है जो कोरोना वायरस को खत्म कर दे। यहां तक कि आयुष मंत्रालय ने बहु प्रचारित बाबा रामदेव की कोरोनिल दवा को भी खारिज कर दिया था। 

बता दें कि कोरोना वायरस कोविड 19 के लिए दुनियाभर में अब तक कोई कारगर इलाज नहीं मिला है। न ही इससे बचाव के लिए कोई टीका या वैक्सीन ही बन पाया है। लोग अपनी संतुष्टी के लिए रोग प्रतिरोधक वैकल्पिक दवाएं ले रहे हैं। जिसको लेकर भारत का आयुष मंत्रालय या सरकार की तरफ से कोई रोक नहीं है। साक्षी समाचार जागरूक मीडिया के तौर पर लोगों को आगाह करता है कि किसी भी खास दवा पर निर्भर न हों। या फिर किसी भी शख्स के कोरोना इलाज के दावे को सच न मानें। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने का उपाय करने में कोई बुराई नहीं है। इससे कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों से भी राहत मिल सकती है। 
 

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