दिल्ली दंगों में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा, अब तक 2,647 लोग किए गए अरेस्ट

Amit Shah Clarifies No one Person Spared who involved in Delhi Riots in Rajya Sabha  - Sakshi Samachar

दंगा पीड़ितों का अबाध रूप से पुनर्वास होगा

अभी तक 2647 लोग अरेस्ट

तकरीबन 50 गंभीर मामलों की जांच तीन एसआईटी करेंगी

नयी दिल्ली : एनआरसी और सीएए से जुड़े सभी भ्रमों को दूर करने के लिए विपक्षी सांसदों को चर्चा की खातिर आमंत्रित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने गुरूवार को आश्वासन दिया कि दिल्ली में पिछले दिनों हुई हिंसा में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा, भले ही वह किसी पक्ष, धर्म या पार्टी का क्यों न हो।

 पिछले दिनों दिल्ली की कानून व्यवस्था की स्थिति पर राज्यसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने यह भी आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) में किसी से कोई भी अतिरिक्त दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। शाह ने संसद में सरकार द्वारा दिल्ली हिंसा को लेकर चर्चा से भागने के विपक्ष के आरोप से इंकार करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस अपना काम ठीक से कर सके, दंगा पीड़ितों का अबाध रूप से पुनर्वास हो सके, घायलों का उपचार किया जा सके और दंगाइयों को पकड़ा जा सके, इसलिए सरकार ने होली के बाद चर्चा करवाने का प्रस्ताव दिया था।

 उन्होंने कहा कि दंगों के बाद 700 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गयी हैं। उन्होंने कहा कि जिसने भी प्राथमिकी के लिए कहा, उसकी शिकायत दर्ज की गयी। पुलिस ने किसी को भी प्राथमिकी दर्ज करने से मना नहीं किया। उन्होंने कहा कि दंगा प्रभावित इलाकों से संबद्ध 12 थानों के लिए विशेष अभियोजक नियुक्त किये गये हैं और उनकी सलाह पर काम किया जा रहा है। शाह ने कहा कि अभी तक 2647 लोगों को गिरफ्तार किया गया है या हिरासत में लिया गया है। 

उन्होंने कहा कि सरकार ने विज्ञापन देकर जनता से इन घटनाओं से जुड़े वीडियो और फुटेज मांगे थे। उन्होंने कहा कि जनता ने बहुत सारे वीडियो एवं फुटेज दिए हैं। दिल्ली दंगों में आरोपियों की पहचान के लिए आधार कार्ड के प्रयोग के विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए उन्होंने कहा कि कि वीडियो में लोगों की पहचान के लिए आधार कार्ड का उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस को यह अधिकार मिलना चाहिए कि जिसने दंगा किया, उसके बारे में वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत में पेश किया जा सकें। उन्होंने कहा कि अब तक मिले साक्ष्यों के आधार पर गुरुवार दोपहर 12 बजे तक 1922 संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान कर ली गयी है।

 चर्चा के दौरान विपक्ष के कई सदस्यों ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एस मुरलीधर के तबादले का जिक्र करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाया था। इसका उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि यह तबादला कालेजियम की सिफारिश और संबंधित न्यायाधीश की सहमति मिलने के बाद किया गया था। उन्होंने इसे नियमित तबादला बताते हुये कहा कि इस बारे में सरकार के इस कदम पर संदेह व्यक्त करने वाले व्यक्तियों को यह भी सोचना चाहिए कि क्या एक ही न्यायाधीश न्याय कर सकता है? क्या बाकी न्यायाधीश न्याय नहीं करते? उन्होंने कहा कि इस प्रकार न्यायपालिका पर सवाल उठाना उचित नहीं है। 

उन्होंने कहा कि दंगों से जुड़े तकरीबन 50 गंभीर मामलों की जांच तीन एसआईटी करेंगी। यह जांच डीआईजी एवं आईजी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में की जाएगी। शाह ने कहा कि दंगों में इस्तेमाल किये गये 125 हथियार जब्त किये गये हैं। थाना स्तर पर दोनों संप्रदायों के लोगों की अमन समितियों की 321 बैठक कर दंगें रोकने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि 40 से अधिक टीमों का गठन कर संलिप्त लोगों की पहचान कर उन्हें पकड़ने की जिम्मेदारी दी गयी है। गृह मंत्री ने कहा कि 24 फरवरी के पहले सरकार के पास यह सूचना आ चुकी थी कि विदेश और देश से आये पैसे को दिल्ली में बांटा गया था। उन्होंने कहा कि इस संबंध में दिल्ली पुलिस जल्द ही ब्योरे की घोषणा करेगी। पुलिस ने इस संबंध में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। 

उन्होंने कहा कि दिल्ली हिंसा में कोई भी दोषी बच नहीं सकता। उन्होंने कहा, ‘‘हम उन्हें पाताल से भी ढूंढ कर लाएंगे और कानून के सामने खड़ा करेंगे।'' शाह ने कहा कि दोनों पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि वीडियो फुटेज के आधार पर इन मामलों में लोगों की पहचान की गयी है। उन्होंने कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी सरकार इन मामलों की वैज्ञानिक, प्रामणिक तरीके से जांच कर रही है और जांच द्रुत गति से की जा रही है।'' उन्होंने कहा कि दंगा करने वाला व्यक्ति किसी पक्ष, किसी धर्म, किसी पार्टी या किसी जाति का हो, उसको छोड़ा नहीं जाएगा एवं कोई पक्षपात नहीं किया जाएगा। 

उल्लेखनीय दिल्ली हिंसा में दिल्ली पुलिस कर्मी रतनलाल और आईबी कर्मी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गयी थी। उन्होंने कहा कि जब इतने लोग भडकाने वाले थे तब दिल्ली पुलिस ने हिंसा को राजधानी के चार प्रतिशत इलाके और 13 प्रतिशत आबादी तक सीमित रखा और फैलने नहीं दिया, जो कम उपलब्धि नहीं है। शाह ने कहा कि 25 फरवरी को एक बैठक हुई थी, उसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने ऐसा कोई सुझाव नहीं दिया कि सेना को बुलाया जाना चाहिए। किंतु बाद में केजरीवाल ने 27 फरवरी को सेना बुलाए जाने का सुझाव दिया, तब तक दंगे रूक गये थे। 

उन्होंने कहा कि वह केजरीवाल की राजनीतिक मजबूरी समझ सकते हैं क्योंकि उनके एक पार्षद के घर से हथियार मिले और उसे बाद में बर्खास्त करना पड़ा। नफरत फैलाने वाले भाषणों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सीएए कानून बनने के बाद से ही अल्पसंख्यकों विशेषकर मुसलमानों के मन में एक भय बैठाने का प्रयास किया गया। शाह ने कहा कि उन्होंने विपक्षी नेताओं से पूछा कि सीएए की एक भी ऐसी धारा बता दें, जिसमें नागरिकता लेने की बात कही गयी है। 

उन्होंने कांग्रेस नेता सिब्बल से पूछा कि वह ‘‘संशोधित नागरिकता कानून में ऐसी कोई धारा बता दें जिससे मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी। '' सिब्बल द्वारा इसके जवाब में एनपीआर का उल्लेख करने पर शाह ने कहा कि उन्होंने विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि एनपीआर में कोई दस्तावेज नहीं मांगा गया है। उन्होंने कहा, ‘‘देश में किसी को एनपीआर की प्रक्रिया से डरने की जरूरत नहीं है।'' गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘‘डी'' एवं एनपीआर को लेकर यदि कोई संदेह है तो नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, गृह संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष आनंद शर्मा एवं जो भी सांसद चाहें, आकर उनसे चर्चा कर सकते हैं। वह उनके संदेह दूर करेंगे। उन्होंने कहा कि एनपीआर और सीएए को लेकर सारे भ्रम को दूर करने का समय आ गया है। 

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आजाद ने गृह मंत्री से पूछा कि क्या उनकी बात का आशय यह है कि एनपीआर में ‘‘डी (संदिग्ध प्रविष्टि)'' नहीं होगा? इस पर शाह ने सिर हिलाते हुए कहा कि उनका यही आशय है। किंतु इसी बीच विपक्षी सदस्यों ने कुछ और सवाल पूछने शुरू कर दिये जिसके कारण शाह अपना वाक्य पूरा नहीं कर पाये। शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि एनपीआर में किसी से कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी जाएगी। दंगों को 'राज्य प्रायोजित'' करार देने वाले विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए शाह ने कहा कि जब कोई राष्ट्राध्यक्ष हमारे देश में आया हुआ हो तो ऐसे में सरकार क्या दंगा करवाएगी? उन्होंने कहा, ‘‘हमारी ऐसी फितरत नहीं है कि हम दंगा करायेंगे, हमारी फितरत यह है कि जिसने भी दंगा किया है, उसे ढूंढ ढूंढ कर पकड़ा जाए।'' 

शाह ने कहा कि उनकी पार्टी और उसकी विचारधारा से दंगों को जोड़ने की कोशिश पहले से चल रही है। किंतु आजादी के बाद के आंकड़े कुछ और ही हैं। इसके बाद उन्होंने आजादी के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में हुए दंगों के आंकड़ों का विस्तार से हवाला दिया। उन्होंने कहा कि दंगों में मारे गये 76 प्रतिशत लोग कांग्रेस के शासन के दौरान मारे गये।

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