हर राज्य की सरकारों को खोजना होगा जमातियों का इलाज, वरना महंगे पड़ेंगे हालात

All State Govts have to find the solution for Jamaties otherwise it will be late - Sakshi Samachar

केवल उत्तर प्रदेश की तस्वीर देखिये

जमातियों की गलती ने शामली को बनाया संवेदनशील

छिपे जमातियों की तलाश में मोहल्लों को छान रही पुलिस

सूचना छिपाने पर अब गुजरात के 12 जमातियों पर मुकदमा

हैदराबाद : जिन राज्यों में कोरोना के कंफर्म्ड संक्रमितों की संख्या 100 से ज्यादा है, एक नजर उनके सरकारी आंकड़ों पर डालिए। 
आंध्र प्रदेश - 161
दिल्ली- 445
गुजरात - 105
कर्नाटक - 144
केरल - 304 
मध्य प्रदेश - 104
महाराष्ट्र - 490
राजस्थान - 200
तमिलनाडु - 485
तेलंगाना - 269
उत्तर प्रदेश - 227

अलग-अलग राज्यों की चुनौतियां भी हैं अलग
देश में कोरोना संक्रमितों की बढती संख्या को अगर कंट्रोल करना है, इस पर लगाम लगानी है, इस बीमारी से बचना है तो एक टीम बनानी होगी, एक बेस तैयार करना होगा क्योंकि अलग-अलग लोग अलग तरह से इसे डील कर रहे हैं और स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ती जा रही है। पूरे देश के लिए अगर कोई एक जैसी नीति नहीं बनेगी, एक जैसी पॉलिसी नहीं तैयार की जायेगी तो बस सभी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रह जाएंगे। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यूपी की अलग चुनौती है। वहां योगी का शासन है। उसके हर काम को एंटी मुस्लिम बताया जाता है और उसी चश्मे से देखा भी जाता है। 

बिहार की अलग चुनौती है। नीतीश सरकार का मुसलमानों के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर है। भले ही वो बीजेपी के एलायंस हैं। महाराष्ट्र की अलग चुनौती है। शिवसेना एंटी मुस्लिम मानी जाती है, लेकिन वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते क्योंकि कांग्रेस और एनसीपी उनके साथ है। एमआईएम के साथ तेलंगाना की अलग चुनौती है। केसीआर मोदी के साथ दीया जलाने को भले ही तैयार हैं लेकिन जितना कठोर निर्णय उन्हें लेना चाहिए, या जितना कठोर अनुशासन उनका होना चाहिए, वह उनका है नहीं। यानि हर राज्य की अलग चुनौती है। जो बड़े राज्य हैं, यानि जहां सौ से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, उनकी दशा और दिशा वाकई दयनीय है। इन राज्यों की मौजूदा स्थिति क्या है जानिए।

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केवल उत्तर प्रदेश की तस्वीर देखिये
महराजगंज में 6 जमातियों में कोरोना की पुष्टि हुई है। तबलीगी जमात से लौटे जिले के 21 लोगों में से पुरंदरपुर थाना क्षेत्र के तीन व कोल्हुई थाना क्षेत्र के तीन लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है। सभी के परिजनों को आइसोलेट कर नमूने जांच के लिए भेजे गए है। सहारनपुर जिले में अब तक 500 से अधिक जमातियों को चिह्नित किया गया है। सहारनपुर में छह एफआईआर पंजीकृत की गई हैं। बस्ती में 50 जमाती पकड़े गए हैं। ये सभी मुंबई के रहने वाले हैं। इनमें से 31 को ओपेक कैली व 10 को जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में जबकि शेष 9 को रुधौली तहसील की जामा मस्जिद में रखा गया है। पिछले दिनों औरैया से पकड़े गए 13 जमातियों में से चार की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। 13 में से 11 शामली के और दो तेलंगाना के थे। लखनऊ के कैंट क्षेत्र की मस्जिद में पकड़े गए 12 लोगों के शुक्रवार को कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद उनके संपर्क में आए लोगों की धरपकड़ जारी है। पुलिस ने मड़ियांव के केशवनगर में स्थित मस्जिद में रुके छह लोगों को पकड़ा है। सभी के नमूने लिए गए हैं। सभी असम के रहने वाले हैं। ये सभी सदर इलाके में मिले कोरोना पॉजिटिव मरीजों के संपर्क में थे।

सभी 249 जमातियों की होगी जांच
जिले में नेपाल से दो दलों में 28 जमाती आए। इनमें 17 खेकड़ा क्षेत्र के मदरसे में चले गए और 11 बागपत में आए। 19 मार्च को आए इन जमातियों में एक पॉजिटिव मिला है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के लिए पहले इन्हें तलाशना मुश्किल हुआ। रेंडम जांच में ही एक पॉजिटिव निकल आया। जिले के 249 जमातियों को तीन जगह क्वारंटीन किया गया है। 

नोएडा और आगरा की तस्वीर
नोएडा में 3 और कोरोना पॉजिटिव मिले हैं जिससे यहां की संख्या बढ़कर 58 तक पहुंच गई है। नोएडा में आज 8 कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आए हैं लेकिन राहत की बात यह है कि 8 कोरोना मरीज डिसचार्ज हो चुके हैं जबकि अभी 50 कोरोना मरीजों का उपचार चल रहा है। वहीं, 94 संक्रमित जमातियों में से सबसे ज्यादा 29 आगरा के हैं। आगरा में कोरोना के मरीजों की संख्या 45 पहुंच चुकी है। पूरे इलाके को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है। क्वारेंटाइन किए गए मरीजों की निगरानी की जा रही है।

हाथरस में चार जमातियों में कोरोना की पुष्टि
हाथरस जिले के सासनी क्षेत्र से पिछले दिनों पकड़े गए जमातियों में से चार की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। चारों संक्रमितों को मुरसान के सरकारी चिकित्सालय के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। वहीं जिला प्रशासन इनकी ट्रैवल हिस्ट्री समेत तमाम जानकारियां जुटाने में लग गया है। महाराजगंज जिले में 6 कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हुई हैं। ये सभी निजामुद्दीन के तबलीगी मरकज में शामिल हुए थे। स्वास्थ्य विभाग ने सभी कोरोना पॉजिटिव मरीजों के परिजनों को जिला अस्पताल के क्वारन्टीन वार्ड में शिफ्ट कर दिया है।

जमातियों की गलती ने शामली को बनाया संवेदनशील
कोरोना का कहर शुरू होते ही शासन, प्रशासन ने विदेश और गैर राज्यों से आए लोगों से अपनी जांच कराने को कहता रहा। पीएम और सीएम भी सहयोग मांगते रहे, लेकिन मस्जिदों में ठहरे जमातियों के कान पर जूं नहीं रेंगी। पुलिस प्रशासन ने सर्च कराया तो 200 जमाती मिले। इनमें से 100 दिल्ली के जलसे से शामली पहुंचे थे। 12 बांग्लादेशी और बाकी देश के अलग प्रांतों से आए थे। स्वास्थ्य विभाग ने इनकी जांच करानी शुरू की तो तीन जमाती कारोना पॉजिटिव निकले। डीएम जसजीत कौर के अनुसार पॉजिटिव मिले जमाती 17 मार्च को यहां पहुंचे थे। इन 15 दिनों में ये लोग न जाने कितनों के संपर्क में आए और उन्हें भी संक्रमित किया होगा, जो बेहद चिंताजनक है। 
शामली जिले में अब तक-
निगरानी में जमाती - 200
तबलीगी जमाती भारतीय - 98
बांग्लादेेशी जमाती- 12
विदेशी नागरिक फरवरी में आए- 09
जमातियों के नमूने लिए गए- 80
पॉजिटिव रिपोर्ट मिली- 03
विदेश यात्रा से आए लोग- 93
कुल होम क्वारंटीन- 1073
लॉकडाउन उल्लंघन के केस 61
आरोपी बनाए गए 244

लाला नगला समेत सासनी व हाथरस में घूमे जमाती
इन जमातियों का पहला ठहराव हाथरस के नगला लाला में हुआ था, इसके बाद ही वह सासनी गए थे। मगर हैरानी की बात यह है कि इनमें से प्रशासन की ओर से लाला नगला में न तो सैनिटाइज कराया गया और न नगला लाला को अलर्ट किया गया। जमातियों की टोली पहले हाथरस और फिर सासनी में रुकी, तो जाहिर है जमाती बाजार में घूमे-फिरे भी होंगे। जानकारी मिल रही है कि जमातियों की टोली हाथरस में कई जगह और सासनी के कई गांव में भी घूमी थी। बड़ा सवाल यह है कि सासनी और हाथरस के वे कौन लोग थे, जिनके संपर्क में ये सब जमाती सबसे पहले आए।

231 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव
देश का सबसे बड़ा राज्य होने की वजह से यूपी में संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। यूपी सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश में संक्रमित मरीजों की संख्या 231 हो गई है। तबलीगी जमात से जुड़े लोगों की वजह से संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इनमें 18 जिलों के 94 मरीज निजामुद्दीन मरकज से लौटे तबलीगी जमाती हैं। सबसे ज्यादा संक्रमित जमाती आगरा में मिले हैं। जबकि, कुल संक्रमितों में सबसे ज्यादा 58 नोएडा में हैं। उत्तर प्रदेश के 24 जिलों में अब कोरोना पॉजिटिव मामले हो गए हैं।अब तक जमात के कुल 1302 लोग मिले हैं जिनमें से 1000 को क्वारेंटाइन किया गया है। इनमें 306 लोग विदेशी मूल के हैं। तबलीगी जमात से जुड़े लोग पूरे यूपी से पकड़े गए हैं। इनमें यूपी के मेरठ से 307, बरेली में 148, कानपुर में 33, वाराणसी में 242, लखनऊ में 83, आगरा में 115, प्रयागराज में 51, गोरखपुर में 230 और नोएडा में 70 जमाती मिले हैं। 

18 जिलों में 94 जमाती संक्रमित मिले
निजामुद्दीन मरकज में हुई तबलीगी जमात में शामिल हुए यूपी के 18 जिलों के 94 लोग अब तक संक्रमित मिले हैं। इनमें आगरा के 29, गाजियाबाद के 9, कानपुर के 6, वाराणसी के 2, शामली के 5, जौनपुर के 2, बागपत के 1, मेरठ के 5, गाजीपुर के 3, आजमगढ़ के 3, फिरोजाबाद के 4, हरदोई का 1, प्रतापगढ़ के 3, सहारनपुर के 13, महाराजगंज के 6, हाथरस के 4, शाहजहांपुर के 1 और बांदा का एक जमाती शामिल हैं।  ताजनगरी में कोरोना के कुल 45 मामले हो गए हैं। इनमें 32 जमाती हैं। ये सभी दिल्ली के मरकज से लौटे थे। कुल 137 जमातियों के नमूने लेकर इन्हें क्वारंटीन सेंटर में रखा गया है। उधर, हरदोई में जमात में शामिल होकर लौटे धौलपुर के एक व्यक्ति में कोरोना की पुष्टि हुई है। हाथरस के सासनी की मस्जिद में मिले कुछ जमातियों में से चार जमाती कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। वहीं वाराणसी और मिर्जापुर मंडल के जिलों में शनिवार को चार और जमाती कोरोना संक्रमित पाए गए। इनमें दो मिर्जापुर और दो गाजीपुर में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती है।

छिपे जमातियों की तलाश में मोहल्लों को छान रही पुलिस
जमातियों की तलाश में पुलिस ने कई दिनों तक जनपद में अभियान चलाया। दिनभर पुलिस गली-मोहल्लों की खाक छानती रही। पुलिस को एक भी जमाती नहीं मिला। पहले तीन दिन पुलिस को 260 जमाती मिले थे, इनमें से 249 जमाती तीन स्थानों पर तथा 11 जमाती होम क्वारंटाइन हैं। जमातियों का पता लगाने में ग्राम प्रहरी लगे हुए है। जो पुलिस को पल-पल की जानकारी दे रहे हैं। पुलिस ने अपने मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया है। जमातियों के संबंध में पुलिस के पास फर्जी कॉल भी आ रही हैं। पुलिस मौके पर पहुंचती है तो सूचना झूठी निकलती है।

जमातियों की हिस्ट्री खंगालने में जुटा प्रशासन
सासनी में चार जमातियों की कोरोना वायरस की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद अब प्रशासन इन जमातियों की हिस्ट्री खंगालने में जुट गया है ताकि ये पता लगाया जा सके कि इन जमातियों से कोरोना का वायरस किन गली और मोहल्लों के अलावा गांव तक पहुंचा। ये जमाती हाथरस के लाला नगला के बाद सासनी की मस्जिदों में रुके थे व निजामुद्दीन के जमातियों के संपर्क में रहे थे।

सूचना छिपाने पर अब गुजरात के 12 जमातियों पर मुकदमा
दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में आयोजित जमात में शामिल लोगों की तलाश के दौरान ऊपरकोट कोतवाली क्षेत्र के उस्मानपाड़ा की अताइयान मस्जिद में भी गुजरात के 12 जमाती मिले थे। इनके विषय में भी मस्जिद इमाम और खुद जमातियों ने सूचना छिपाई थी। इस पर पुलिस ने इन जमातियों, मस्जिद इमाम सहित 15 लोगों पर महामारी अधिनियम-लॉकडाउन उल्लंघन आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। वहीं चेकिंग के दिन से ही सभी जमाती 14 दिन के लिए मस्जिद में ही क्वारंटीन हैं। 

कई धाराओं में मुकदमा दर्ज़ 
कोतवाली इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार सिंह के मुताबिक तुर्कमान गेट चौकी इंचार्ज मोनू कुमार की ओर से इन लोगों पर लॉक डाउन के दौरान एकत्रित होने के आरोप में धारा 188, महामारी अधिनियम 1897 की धारा 3, आईपीसी की धारा 269, 271 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमे में मस्जिद के इमाम रफीक पुत्र सुहैब समेत कुल 15 लोगों को नामजद किया गया है। इन पर आरोप है कि 1 अप्रैल को जमातियों की चेकिंग के दौरान जब पुलिस वहां पहुंची तो ये लोग वहां जमा थे। इमाम से जब पूछताछ की गई तो उनके विषय में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इतना ही नहीं, जब सख्ती से जमातियों से पूछताछ हुई तो उन्होंने बताया कि वह जमाती के रूप में 23 जनवरी को अलीगढ़ में आए थे और 21 मई 2020 तक उनका यहां रुकने का प्लान था। इस दौरान सिविल लाइंस के पहासू हाउस व जामा मस्जिद में रुकने के बाद 28 मार्च को जमातियों की चेकिंग की सूचना पर अतइयान मस्जिद में जाकर छिप गए थे। जहां पुलिस ने चेकिंग के दौरान इन सभी को तलाश लिया। पुलिस ने स्वास्थ्य टीम बुलाकर सभी की चेकिंग के बाद फिलहाल इनको मस्जिद में ही 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया है।

अन्य देशों की तुलना में कम हैं संक्रमित
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि देश के 17 राज्यों में तबलीगी जमात के मरकज में इज्तिमा से जुड़े लोगों में कोविड-19 संक्रमण के 1023 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं और देश में कोरोना वायरस के करीब 30 प्रतिशत मामले ‘एक खास स्थान' से जुड़े हैं। 
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने दैनिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि भारत में कोविड-19 के मामलों के दुगुना होने की दर अन्य देशों की तुलना में कम है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण के अब तक कुल 2902 मामले सामने आए हैं और शुक्रवार के बाद से 601 मामले बढ़े हैं। संयुक्त सचिव ने कहा कि अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 68 लोगों की मौत हुई है।

सबसे बड़ा सवाल आखिर है क्या 
अन्य राज्यों की छोड़कर यदि हम केवल उत्तर प्रदेश के हालात पर ही नजर डालते हैं तो यह साफ हो जाता है कि मरकज से आए लोगों ने किस तरह पूरे देश को कोरोनागाह बनाकर रख दिया है। उस पर अपनी पहचान छुपाने की उनकी कोशिश पुलिस वालों के लिए गले की हड्डी बनी हुई है। अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर वे संबंधित जानकारी जुटाने की कोशिश में रात-दिन एक किए हुए हैं। बावजूद इसके सफलता मुश्किल से ही मिल पा रही है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि प्रशासन की ओर से जितनी सख्ती होनी चाहिए, उतनी नहीं हो रही। मौजूदा हालात सभी राज्य सरकारों के लिए यह एक बडी चुनौती बना हुआ है। यह समझना होगा कि सरकार जितने दिन चुप रहेगी, परिणाम उतने ही भयावह होंगे। यह समझ पाना मुश्किल है कि आखिर सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ क्या करेगी? जमातियों को लेकर सबके मन में यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या केंद्र सरकार इस मामले में कोई ठोस निर्णय ले रही है या नहीं? सभी राज्यों के साथ मिलकर इस मुद्दे की गंभीरता पर एकजुट होकर कडे कदम उठा रही है या नहीं?ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसके लिए केंद्र स्तर से कोई कठोर निर्णय क्यों नहीं लिया जा रहा, जिसे सभी राज्य फॉलो करें। अगर जल्दी ही कोई गंभीर कदम न उठाया गया तो स्थिति दिन पर दिन हाथ से निकलती जाएगी। कोरोना संक्रमितों के मामले जिस तरह से बढ़ते जा रहे हैं, उस पर जो लोग गायब हैं, लापता हैं या खुद को छुपकर रखा हुआ है, वे और भी बड़ा खतरा हो सकते हैं।  ऐसे लोगों को खोजने की केंद्र सरकार की क्या नीति-रणनीति है, इस पर भी सब खामोश हैं। लेकिन क्यों? यही सबसे बड़ा सवाल है।

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- सुषमाश्री (वरिष्ठ उप संपादक)

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