...तो क्या बिहार में इस बार गुंडे मवाली लड़ रहे चुनाव? पूछ रहे लोग

ADR report on tainted candidates in Bihar Assembly Poll 2020 - Sakshi Samachar

बिहार चुनाव 2020 पर विशेष

एडीआर रिपोर्ट में दागी कैंडिडेट्स पर खुलासा

पटना: बिहार में इस बार हर पार्टी ने दागी उम्मीदवारों को टिकट देने में दरियादिली दिखाई है। तभी तो पढे लिखे समझदार लोग सवाल दाग रहे हैं कि क्या इस बार गुंडे मवाली ही चुनाव लड़ रहे हैं? खैर जिम्मेदार मीडिया होने के नाते हम किसी आरोपी को गुंडा मवाली तो नहीं कह सकते। इतना जरूर है कि बिहार में राजनीति और अपराध का गठजोड़ चरम पर है। 

एडीआर की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि RJD के 73 और BJP के 72 फीसदी प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि इन प्रत्याशियों का दावा है कि राजनीति से प्रेरित मामले उनके खिलाफ चल रहे हैं, वास्तव में वे बेकुसूर हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मैदान में ताल ठोंकने वाले 1,064 उम्मीदवारों में से 30 प्रतिशत ने स्वीकार किया है कि उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। हालांकि इनके ऊपर अपराध साबित होना लंबित है। अगर इनके खिलाफ दोष सिद्ध हो जाता है तो इन्हें पांच साल या फिर इससे अधिक की सजा मिल सकती है। 

एडीआर की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुल 375 या फिर 35 फीसदी प्रत्याशियों की संपत्ति करोड़ों में है। जबकि पांच ऐसे उम्मीदवार भी मैदान में हैं जिन्होंने खुद के पास किसी तरह की संपत्ति नहीं होने की घोषणा की है। आंकड़ों पर गौर करें तो राजद के 41 उम्मीदवारों में से 30 यानी कुल 73 फीसदी के ऊपर आपराधिक मामले चल रहे हैं। इनमें 54 फीसदी के ऊपर संगीन आरोप लगे हैं। 

वहीं एनडीए में शामिल बीजेपी ने भी इस बार आरोपियों को टिकट देने में पूरा दिल खोला है। रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के 29 उम्मीदवारों में से 21 यानी 72 फीसदी के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। इनमें 45 फीसदी के ऊपर तो गंभीर आरोप लगे हैं। जिनके खिलाफ अगर दोष सिद्ध हो जाता है तो ये पांच या फिर इससे भी अधिक सालों के लिए जेल की हवा खा सकते हैं। 

आरोपियों को टिकट देने में अपेक्षाकृत कांग्रेस पार्टी पीछे रही है। कांग्रेस के 21 उम्मीदवारों में से 12 यानी 57 प्रतिशत पर ही आरोप लगे हैं। जदयू की बात की जाय तो इनके 35 उम्मीदवारों में से 15 दागी हैं। वहीं बसपा के 26 में से आठ उम्मीदवारों ने खुद के ऊपर लगे चार्जेज की घोषणा की है। 

महिलाओं के खिलाफ अपराध में आरोपी हैं प्रत्याशी

भारतीय सभ्यता में महिलाओं के खिलाफ अपराध को जघन्य माना जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि कुल 29 उम्मीदवारों के खिलाफ महिलाओं ने संगीन आरोप लगाए हैं। तीन के ऊपर तो बलात्कार के मामले भी चल रहे हैं। 

एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच की भूमिका

चुनावों से पहले एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच जैसी संस्थाएं उम्मीदवारों के बारे में वास्तविक तथ्य उजागर करती है। ताकी जनता  वोट देने से पहले एक बार सोचे कि वो किन्हें वोट करने जा रही है। एडीआर और ‘नेशनल इलेक्शन वॉच’ के संस्थापक सदस्य एवं ट्रस्टी जगदीप छोकर ने कहा कि उम्मीदवारों के चयन में राजनीतिक दल अपने फायदे का फार्मूला ही चुनते हैं। उन्हें पता है कि दबंग छवि के लोग जिताऊ हो सकते हैं। लिहाजा ऐसे लोगों को टिकट देने में ये परहेज नहीं करते। इस बारे में उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक पार्टियों को निर्देश भी दिये हैं जिसका अनुपालन ठीक तरीके से नहीं हो पा रहा है।

बता दें कि बिहार में पहले चरण में 28 अक्टूबर को 71 सीटों, दूसरे चरण में तीन नवंबर को 94 सीटों और तीसरे चरण में सात नवंबर को 78 सीटों पर मतदान होगा। जबकि चुनाव परिणाम 10 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। अब ऐसे में पूरा दारोमदार वोटर्स पर ही है कि वो अच्छे लोगों को चुनकर ही विधानसभा में भेजें। 
 

Advertisement
Back to Top