बिहार चुनाव 2020: वामदल बने राजद की हिचकी तो कांग्रेस के फेवरेट, सीट शेयरिंग का तमाशा जारी

Seat Sharing Crisis In Mahagathbandhant For Bihar Assembly Election  - Sakshi Samachar

वाम दलों को लेकर फंसा पेच 

राजद के साथ रहने में कांग्रेस को नुकसान

इस बार कांग्रेस के तेवर तल्ख

पटना :  बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर हलचल तेज हो गई है। लेकिन अभी तक सीटों के तालमेल पर अब तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। अब तो वाम दलों को लेकर भी नया पेच फंस गया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस वामपंथी पार्टियों को साथ लेने की पुरजोर कोशिश कर रही है। वहीं महागठबंधन का सबसे बड़ा घटक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) हिचकिचाहट दिखा रहा है, क्योंकि वह भाकपा-माले, भाकपा एवं माकपा को उनकी मांग के मुताबिक सीटें देने को तैयार नहीं है। 

वाम दलों को लेकर फंसा पेच 

मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘छोटे दलों के साथ सीटों पर फैसला नहीं होने के कारण सीट बंटवारे को अब तक अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। हम चाहते हैं कि वाम दलों को भी साथ लिया जाए क्योंकि बिहार के कुछ इलाकों में उनका भी आधार है और वे वैचारिक रूप से भाजपा विरोधी हैं।'  आप को बता दें कि 2015 के विधानसभा चुनाव में भाकपा-माले 98 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसे तीन सीटों पर जीत मिली थी, भाकपा 91 और माकपा 38 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन उन्हें कोई सीट नहीं मिली थी। 

उपेंद्र के कदम पर है नजर 

महागठबंधन के दलों की निगाहें अब उपेंद्र कुशवाहा के अगले कदम पर हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन का हिस्सा रहते हैं तो उनके हिस्से आठ से दस के करीब सीटें आ सकती हैं। फिलहाल उपेंद्र कुशवाहा अलग राह बनाने के मुड में हैं। वहीं राजद को यह लगता है कि कुशवाहा का वोट चुनाव में ट्रांसफर नहीं होता और ऐसे में उनके साथ रहने या नहीं रहने से फर्क नहीं पड़ने वाला है। 
 
राजद के साथ रहने में कांग्रेस को नुकसान

वहीं, बिहार कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि कांग्रेस को बिहार जिसे बड़े राज्य में अपने दम पर मजबूती हासिल करनी चाहिए।  इसके पीछे दो कारण हैं। पहला कारण ये है कि राजद के साथ रहकर कांग्रेस को लालू यादव के भ्रष्टाचार का नुकसान राजनीतिक रूप से झेलना पड़ता है और इससे उनके नेताओं की ईमानदारी भी शक के दायरे में आती है।  

तेजस्वी को सीएम उम्मीदवार नहीं मानते कांग्रेस  

 कांग्रेस के कई नेता युवा तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के पक्ष में नहीं हैं। कांग्रेस तेजस्वी यादव को कुछ शर्तों के साथ मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार स्वीकार कर सकती है। कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडेय ने कहा कि बिहार में राजद बड़ी पार्टी है इसलिए हम कुछ महत्वपूर्ण शर्तों के साथ तेजस्वी यादव को गठबंधन में सीएम उम्मीदवार मान सकते हैं। वो क्या शर्त होगी अभी खुल कर नहीं कहा है।   

इस बार कांग्रेस के तेवर तल्ख

बिहार कांग्रेस का एक वर्ग तेजस्वी यादव को अनुभव हीन मानता है और उनकी कार्यशैली से नाराज है। इन नेताओं का कहना है कि बिहार में भी सम्माजनक समझौता नहीं हुआ तो हम सभी 243 सीटों पर लड़ने को तैयार हैं। हमारा जनाधार वापस लौटा है। उम्मीदवारों की सूची भी तैयार है। यह कहा जा रहा है कि इस बार कांग्रेस को 65 से 70 सीट मिल सकती है। फिलहाल कांग्रेस में भी असमंजस बना हुआ है जब तक शीट शेयरिंग की घोषणा नहीं हो जाती।

डिप्टी सीएम के पद की मांग

वीआईपी यानी विकासशील इंसान पार्टी  के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश साहनी ने तेजस्वी यादव समेत कांग्रेस के नेताओं से डिप्टी सीएम के पद की मांग की है। सीट शेयरिंग के मामले को लेकर दिल्ली में कांग्रेस नेता अहमद पटेल के अलावा पटना में तेजस्वी यादव से मुकेश सहनी ने मुलाकात की है। वीआईपी ने 25 सीटों पर दावेदारी जताने के साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश साहनी की उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग रखी है।  

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