राजस्थान में वसुंधरा का विकल्प तलाश रही भाजपा, राजघराने की इस नेता पर टिकी है नजर

Rajasthan: Rajsamand MP Diya Kumari can became an alternative to Vasundhara Raje for BJP - Sakshi Samachar

विधायक से सांसद बनीं दीया कुमारी

जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य हैं दीया कुमारी

खुद को साबित करने के बाद बीजेपी में बढ़ा दीया कुमारी का कद

राजस्थान बीजेपी में कम हो रहा वसुंधरा राजे का महत्व

जयपुर : राजस्थान की राजनीति में हमेशा से ही राजपरिवारों से जुड़े चेहरों का अलग ही महत्व रहा है। उनकी एक अलग और अहम भूमिका रही है। राजपरिवारों से जुड़े लोग यहां सांसद, विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक बने हैं। इसी कड़ी में अब एक नया नाम राजसमंद से भाजपा सांसद दीया कुमारी का भी आगे आ रहा है।

विधायक से सांसद बनीं दीया कुमारी

बता दें कि दीया कुमारी पहले विधायक थीं, अब सांसद बन गई हैं। पार्टी संगठन में वे पहले प्रदेश मंत्री थीं और हाल में उन्हें प्रदेश महामंत्री बनाया गया है। पार्टी में उनका बढ़ता कद राजस्थान भाजपा में आने वाले समय में नए समीकरणों की ओर संकेत कर रहा है। माना तो यह भी जा रहा है कि पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विकल्प के रूप में उन्हें आगे बढ़ाने की तैयारी में है। हालांकि खुद दीया कुमारी ऐसी चर्चाओं को सही मानने से इनकार किया है।

जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य हैं दीया कुमारी

दीया कुमारी जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य हैं। वे जयपुर के पूर्व महाराजा भवानी सिंह की इकलौती संतान हैं। शादी के 21 साल बाद वह अब पति से तलाक ले चुकी हैं। बता दें कि जयपुर राजपरिवार का राजनीति से पुराना नाता रहा है। राजमाता गायत्री देवी स्वतंत्र पार्टी से जयपुर की तीन बार सांसद रह चुकी हैं। वहीं, दीया कुमारी के पिता भवानी सिंह ने भी जयपुर कांग्रेस के टिकट पर सांसद का चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। दीया कुमारी का राजनीति में प्रवेश 2013 के विधानसभा चुनाव से पहले हुआ था। सितंबर 2013 में वसुंधरा राजे की चुनावी यात्रा की आखिरी बड़ी रैली जयपुर में हुई थी। इस रैली को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया था और इसी रैली में दीया कुमारी का राजनीति में प्रवेश हुआ था। वसुंधरा राजे ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी।

जल्दी ही वसुंधरा राजे से संबंध असहज हो गए

सदस्यता दिलाने के साथ ही उन्हें सवाई माधोपुर से भाजपा का टिकट दिया गया और वे किरोड़ीलाल मीणा जैसे बड़े जनाधार वाले नेता को हरा कर पहली बार में ही विधायक बन गईं। उनका कार्यकाल अच्छा रहा। लेकिन भाजपा सरकार के दौरान ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से उनके संबंध सहज नहीं रह गए। राजपरिवार की संपत्ति पर सरकार के कब्जे के विरोध में जयपुर में राजपूत समाज का एक बड़ा प्रदर्शन हुआ। बाद में जब विधानसभा टिकट का समय आया तो उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। बाद में उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में राजसमंद से टिकट दिया गया। यह उनके लिए बिल्कुल नया क्षेत्र था। राजसमंद देश के सबसे बड़े लोकसभा क्षेत्रों में से एक है और दीया कुमारी को अपने प्रचार के लिए मुश्किल से बीस दिन का समय मिल पाया क्योंकि उनका टिकट काफी अंत में घोषित किया गया था। इसके बावजूद उन्होंने यहां से बड़ी जीत हासिल की।

खुद को साबित करने के बाद बीजेपी में बढ़ा दीया कुमारी का कद

पहली बार में विधायक और दूसरी बार क्षेत्र बदलने के बावजूद सांसद के चुनाव में बड़ी जीत के कारण अब दीया कुमारी को राजस्थान भाजपा की राजनीति के बड़े चेहरों मे गिना जाने लगा है। पार्टी संगठन में भी वे काफी समय से हैं। प्रदेश की पिछली कार्यकारिणी में वे प्रदेश मंत्री रहीं। अब प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया की हाल में घोषित कार्यकारिणी में उन्हें प्रदेश महामंत्री बनाया गया है। इस तरह जनप्रतिनिधि और संगठन दोनों ही जगह उनका कद बढ़ा हैै और इसी के चलते माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें आगे और बड़े चेहरे के रूप में बढ़ाने की इच्छा रखती है। पार्टी सूत्रों की मानें तो दीया कुमारी स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़ाव रखती हैं और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में भी उनकी पैठ ठीकठाक है। लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदेश प्रभारी रहे केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर उनके खैरख्वाहों में माने जाते हैं।

राजस्थान बीजेपी में कम हो रहा वसुंधरा राजे का महत्व

पार्टी सूत्रों का कहना है कि राजस्थान भाजपा की मौजूदा राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का महत्व कम होता दिख रहा है। पार्टी की नई प्रदेश कार्यकारिणी में भी इसके संकेत मिले हैं और अब पार्टी नए संभावनाशील चेहरों की तलाश में है। दीया कुमारी उनमें सेे एक चेहरा हो सकती हैं। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि राजपरिवार से तो उनका जुड़ाव है ही, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने दो बड़े और कठिन चुनावों में जीत हासिल करके खुद को साबित भी किया है। इसके अलावा पार्टी की गतिविधियों में भी वह लगातार सक्रिय हैं तथा सोशल मीडिया पर भी उनकी उपस्थिति लगातार बनी रहती है। वे हर रोज प्रदेश से जुड़े किसी न किसी विषय पर बयान जारी करती रहती हैं। जातिगत लिहाज से भी देखा जाए तो राजपूत समाज उन्हें अच्छी तरह जानता है और राजपूत भाजपा के कोर वोट बैंकों में गिने जाते हैं।

मैं अभी बहुत जूनियर हूं

पिछले दिनों जब दीया कुमारी पार्टी मुख्यालय पर अपना नया पदभार ग्रहण करने गईं तो उन्होंने मीडिया से बातचीत में खुद को वसुंधरा के विकल्प के रूप में माने जाने की चर्चाओं को गलत बताया और कहा कि मैं अभी बहुत जूनियर हूं और मुझे बहुत कुछ सीखना है। उन्होंने कहा कि वसुंधरा राजे बहुत सीनियर नेता हैं। पार्टी में उनका जो स्तर और पोजिशन है, उसका कोई मुकाबला नहीं है। वे ही मुझे पार्टी में लेकर आईं और प्रदेश मंत्री बनवाया। मैं उनका बहुत सम्मान करती हूं। ऐसे में इस तरह की चर्चाओं का कोई अर्थ नहीं है। हालांकि इस बात से कतई भी इनकार नहीं किया जा सकता कि राजस्थान बीजेपी में अंदरखाने यह चर्चा आम है कि दीया कुमारी को पार्टी वसुंधरा राजे के विकल्प के रूप में देख रही है। बहरहाल, राजस्थान की राजनीति में आए दिन हो रहे नएनए बदलाव को देखते हुए कहना होगा कि यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि आखिर राजस्थान की राजनीति में ऊंट किस करवट बैठेगा और उसका फायदा किस पार्टी के किस नेता को होगा!

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